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तमिलनाडु विधानसभा: DMK, AIADMK ने तमिल थाई वाजथु अनिवार्य करने का किया समर्थन

Briovo· 12 Aug 2026, 08:31 pm IST
तमिलनाडु विधानसभा: DMK, AIADMK ने तमिल थाई वाजथु अनिवार्य करने का किया समर्थन

तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के प्रस्ताव को व्यापक राजनीतिक समर्थन मिला, जिसमें शिक्षण संस्थानों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक उपक्रमों में कार्यक्रमों की शुरुआत में 'तमिल थाई वाजथु' को अनिवार्य करने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि राज्य गीत तमिल गौरव और एकता का प्रतीक है, और उन्होंने सर्वसम्मति से समर्थन की अपील की। यह कदम 1970 के सरकारी आदेश के बाद आया है, जिसमें पहली बार आधिकारिक कार्यक्रमों में गीत के उपयोग को लागू किया गया था, और दिसंबर 2021 में इसे आधिकारिक तौर पर राज्य गीत के रूप में मान्यता मिली थी। प्रस्ताव का उद्देश्य विभिन्न सार्वजनिक मंचों पर इसके अनिवार्य गायन को औपचारिक बनाना है।

AI सारांश

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राज्य गीत अनिवार्य करने का प्रस्ताव

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने राज्य विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें राज्य गीत 'तमिल थाई वाजथु' को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव किया गया है। प्रस्ताव में शिक्षण संस्थानों, सरकारी कार्यालयों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों में होने वाले सभी कार्यक्रमों की शुरुआत में इसे गाने का आह्वान किया गया है। इस कदम का उद्देश्य राज्य गान के सम्मानजनक गायन को औपचारिक और लागू करना है।

व्यापक राजनीतिक सहमति

इस प्रस्ताव को व्यापक राजनीतिक समर्थन मिला, जिसमें द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK), अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेtra कड़गम (AIADMK) और कांग्रेस पार्टी ने मुख्यमंत्री के प्रस्ताव का समर्थन किया। मुख्यमंत्री विजय ने सभी सदस्यों से पार्टीगत मतभेदों को दरकिनार करते हुए सर्वसम्मति से प्रस्ताव का समर्थन करने की अपील की। यह एकजुटता गीत के सांस्कृतिक महत्व की व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाती है।

मुख्यमंत्री का तमिल गौरव पर जोर

प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री विजय ने 'तमिल थाई वाजथु' के गहरे सांस्कृतिक महत्व पर जोर दिया, कहा कि 'तमिल का मतलब गर्व है, तमिल का मतलब शक्ति है।' उन्होंने जोर देकर कहा कि यह गीत राज्य में सर्वोच्च प्राथमिकता पर होना चाहिए क्योंकि यह पूरे तमिलनाडु को एकजुट करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 'तमिल थाई वाजथु' को पहला स्थान देना राज्य का अधिकार है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और आधिकारिक दर्जा

'तमिल थाई वाजथु' मूल रूप से 1891 में मनोन्मनियम सुंदरनार द्वारा लिखित नाटक 'मनोनमनियम' का हिस्सा था। इसे पहली बार 23 नवंबर, 1970 को जारी एक आदेश के माध्यम से सरकारी कार्यक्रमों के लिए अनिवार्य किया गया था। इस गीत को 12 दिसंबर, 2021 को आधिकारिक राज्य गीत का दर्जा प्राप्त हुआ, जिससे तमिलनाडु के सांस्कृतिक परिदृश्य में इसकी स्थिति मजबूत हुई।

प्रस्ताव का संदर्भ

वर्तमान प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा राज्य गीत के संबंध में की गई टिप्पणियों के जवाब में पेश किया गया है। मंत्रालय के 9 जुलाई के एक पत्र में विशेष रूप से 'तमिल थाई वाजथु' के गायन के मामले को संबोधित किया गया था। यह विधायी कार्रवाई अपने गान के अनिवार्य गायन पर राज्य के रुख को मजबूत करना चाहती है।

क्यों मायने रखता है

राज्य गीत 'तमिल थाई वाजथु' को अनिवार्य करना सार्वजनिक संस्थानों में तमिल सांस्कृतिक पहचान और गौरव को मजबूत करता है, जिससे पूरे राज्य में इसकी व्यापक मान्यता और सम्मान सुनिश्चित होता है। विपक्षी दलों का समर्थन इस गीत के सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करता है।

मुख्य तथ्य

  • Political Support: DMK, AIADMK, and Congress supported the resolution.
  • Mandate Scope: Mandatory singing in educational institutions, government offices, and public sector undertakings.
  • Chief Minister's Statement: CM C. Joseph Vijay emphasized Tamil pride and unity.
  • Historical Context (1970): First implemented in government programs via a 1970 order.
  • Official State Song (2021): Officially designated as state song on December 12, 2021.
  • Source of Resolution: Follows a letter from the Union Home Ministry regarding comments on the state song.

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