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सुप्रीम कोर्ट ने जयपुर में कमर्शियल कोचिंग सेंटरों पर JDA को फटकारा

Briovo· 06 Aug 2026, 03:37 pm IST
सुप्रीम कोर्ट ने जयपुर में कमर्शियल कोचिंग सेंटरों पर JDA को फटकारा

सुप्रीम कोर्ट ने जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) को कमर्शियल इलाकों में चल रहे कोचिंग सेंटरों के खिलाफ निष्क्रियता पर फटकार लगाई है, जबकि उनके लिए निर्धारित इमारतें उपलब्ध हैं। जस्टिस एहसानुद्दीन अमानुल्लाह और आर. महादेवन की पीठ ने सवाल उठाया कि ये केंद्र मास्टर प्लान का उल्लंघन करते हुए कमर्शियल क्षेत्रों में क्यों चल रहे हैं। कोर्ट ने JDA से तीन हफ्तों के भीतर जवाब मांगा है, जिसमें इन संस्थानों को स्थानांतरित करने और मास्टर प्लान का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण मांगा गया है। कोर्ट ने कोचिंग सेंटरों के लिए बनी इमारतों के गलत आवंटन और संबंधित मामलों के निपटारे में देरी पर भी चिंता व्यक्त की।

AI सारांश

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सुप्रीम कोर्ट ने JDA को कोचिंग सेंटरों पर कार्रवाई का…

सुप्रीम कोर्ट ने जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) के खिलाफ कमर्शियल इलाकों में चल रहे कोचिंग संस्थानों के संबंध में कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस एहसानुद्दीन अमानुल्लाह और आर. महादेवन की पीठ ने JDA से तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है। यह निर्देश इन कोचिंग सेंटरों को निर्धारित इमारतों में स्थानांतरित करने और शहर के मास्टर प्लान का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों पर केंद्रित है।

समर्पित इमारतों के गलत आवंटन पर चिंता

सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने कोचिंग सेंटरों के स्थानांतरण के लिए विशेष रूप से निर्मित बहुमंजिला इमारतों के गलत आवंटन पर नाराजगी व्यक्त की। इन समर्पित सुविधाओं के उपलब्ध होने के बावजूद, कई संस्थान अभी भी कमर्शियल क्षेत्रों में चल रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि इनमें से कुछ निर्धारित इमारतों को अन्य संस्थाओं को आवंटित कर दिया गया है, जिससे ऐसे आवंटन अमान्य हो गए हैं।

मास्टर प्लान उल्लंघन और अतिक्रमण के मुद्दे

सुनवाई में जयपुर के मास्टर प्लान के उल्लंघन से संबंधित गंभीर चिंताएं भी सामने आईं। यह उजागर किया गया कि विशिष्ट उपयोगों के लिए निर्दिष्ट भूमि का उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है, और JDA को सौंपी गई भूमि का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं हो रहा है। अतिक्रमण के आरोप भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए, जिसे अदालत ने गंभीर और चिंताजनक माना।

अदालत ने अपीलों के समय पर निपटान का आदेश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने JDA की कार्रवाइयों से संबंधित मामलों के निपटारे में देरी की भी आलोचना की। इसे दूर करने के लिए, अदालत ने अपीलीय प्राधिकरण को निर्देश दिया है कि सभी लंबित मामलों का दो सप्ताह की सख्त समय-सीमा के भीतर निपटारा किया जाए। इस समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित पीठासीन अधिकारी की होगी।

मामले की उत्पत्ति और राष्ट्रीय निहितार्थ

यह मामला एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) में दायर आवेदन की सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें भूमि उपयोग नियमों और भवन संहिता का पालन न करने, और मास्टर प्लान का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अप्रभावी कार्रवाई का आरोप लगाया गया था। महत्वपूर्ण रूप से, 25 मार्च 2026 को, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले के दायरे को पूरे देश में बढ़ा दिया, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कार्यवाही में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया।

क्यों मायने रखता है

सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप जयपुर में शहरी नियोजन और भूमि उपयोग नियमों के प्रवर्तन के महत्वपूर्ण मुद्दे को उजागर करता है। यह निर्णय बेहतर संगठित शहरी विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकता है और सुनिश्चित कर सकता है कि सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग इच्छित तरीके से हो, संभावित रूप से अन्य शहरों के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है।

मुख्य तथ्य

  • Court: Supreme Court of India
  • Bench: Justices Ahsanuddin Amanullah and R. Mahadevan
  • Authority Reprimanded: Jaipur Development Authority (JDA)
  • Issue: Coaching centers operating in commercial areas despite dedicated buildings
  • Timeline for Response: 3 weeks
  • National Scope: Case extended nationwide on March 25, 2026

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