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EPFO घोटाले में अनिल अंबानी के खिलाफ CBI का नया केस

Briovo· 01 Aug 2026, 04:42 pm IST
EPFO घोटाले में अनिल अंबानी के खिलाफ CBI का नया केस

सीबीआई ने रिलायंस कैपिटल लिमिटेड, उसके पूर्व अध्यक्ष अनिल डी. अंबानी और अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ ईपीएफओ को ₹1,816.22 करोड़ का नुकसान पहुंचाने के आरोप में एक नई FIR दर्ज की है। यह मामला 2013-14 में रिलायंस कैपिटल के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर में ईपीएफओ के ₹2,500 करोड़ के निवेश से जुड़ा है। आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और विश्वासघात के आरोप में, अंबानी की कंपनी पर धन के दुरुपयोग का आरोप है, जिसके कारण डिबेंचर का भुगतान नहीं हो सका। सीबीआई इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका और निवेश किए गए धन के अंतिम उपयोग की जांच कर रही है। यह रिलायंस एडीए ग्रुप के खिलाफ एक और मामला है, जिसमें पहले ही कई अन्य FIR और आरोपपत्र दायर किए जा चुके हैं।

AI सारांश

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EPFO घोटाले में सीबीआई ने दर्ज की नई FIR

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने श्रम और रोजगार मंत्रालय के तहत आने वाले कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की शिकायत के आधार पर एक नया मामला दर्ज किया है। यह FIR रिलायंस कैपिटल लिमिटेड (मुंबई), इसके पूर्व चेयरमैन अनिल डी. अंबानी, अज्ञात सरकारी अधिकारियों और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ है। उन पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक कदाचार जैसे अपराधों से ₹1007.55 करोड़ का गलत नुकसान और ₹808.67 करोड़ की ब्याज देनदारी पैदा करने का आरोप है।

धन के दुरुपयोग के आरोप

ईपीएफओ की शिकायत में आरोप है कि रिलायंस कैपिटल लिमिटेड ने 2013 और 2014 के दौरान सुरक्षित गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर जारी किए थे, जिसमें ईपीएफओ ने रिलायंस कैपिटल एसेट मैनेजमेंट सहित चार पोर्टफोलियो प्रबंधकों के माध्यम से ₹2,500 करोड़ का निवेश किया था। आगे यह भी आरोप है कि आरोपियों ने धोखाधड़ी वाले लेनदेन किए और धन का दुरुपयोग किया, जिसके कारण रिलायंस कैपिटल लिमिटेड डिबेंचर का भुगतान करने में विफल रही। इसका परिणाम ईपीएफओ को कथित तौर पर कुल ₹1,816.22 करोड़ का नुकसान हुआ।

सीबीआई जांच जारी

सीबीआई के अनुसार, सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों सहित इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। जांच का उद्देश्य कथित आपराधिक साजिश का खुलासा करना और निवेश किए गए धन के अंतिम उपयोग का पता लगाना है। यह व्यापक जांच जटिल वित्तीय लेनदेन में स्पष्टता लाने का प्रयास करती है।

रिलायंस एडीए समूह के खिलाफ मामलों का सिलसिला

यह नवीनतम FIR रिलायंस एडीए समूह की कंपनियों के खिलाफ मामलों की श्रृंखला में जुड़ गई है। सीबीआई ने पहले ही विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और एलआईसी से मिली शिकायतों के आधार पर रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड, रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड के खिलाफ सात एफआईआर दर्ज की हैं। अब तक, रिलायंस एडीए समूह से संबंधित मामलों में चार आरोपपत्र दाखिल किए गए हैं, और सात व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी

रिलायंस एडीए समूह से जुड़े इन मामलों की जांच वर्तमान में जारी है। उल्लेखनीय है कि भारत का सर्वोच्च न्यायालय इन जांचों की प्रगति की सक्रिय रूप से निगरानी कर रहा है। यह उच्च-स्तरीय निगरानी वित्तीय अनियमितताओं के इन आरोपों के आसपास की गंभीरता और सार्वजनिक हित को रेखांकित करती है।

क्यों मायने रखता है

यह मामला एक बड़े भारतीय समूह के भीतर कथित वित्तीय अनियमितताओं को उजागर करता है और लाखों ईपीएफओ ग्राहकों की बचत को प्रभावित करता है। एक प्रमुख कारोबारी व्यक्ति और सार्वजनिक निधियों की संलिप्तता इसे एक महत्वपूर्ण जांच बनाती है।

मुख्य तथ्य

  • Accused: Reliance Capital Limited, Anil D. Ambani (former chairman), unknown government officials, and others
  • Alleged Loss to EPFO: ₹1,816.22 crore
  • EPFO Investment: ₹2,500 crore in non-convertible debentures (2013-14)
  • Charges: Criminal conspiracy, cheating, criminal breach of trust, criminal misconduct
  • Ongoing Investigations: Several other cases against Reliance ADA Group companies, four chargesheets filed, seven arrests made

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