FCRA विवाद: अमेरिकी सांसद की चिंता पर VHP का पलटवार, विपक्ष ने कहा- अमेरिका दखल न दे
भारत में प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी सांसद राइली मूर ने आरोप लगाया कि इन संशोधनों से धार्मिक चैरिटी, स्कूल और स्वास्थ्य संस्थानों की संपत्तियों पर सरकार का नियंत्रण हो सकता है, यदि उनके FCRA लाइसेंस रद्द या सरेंडर किए जाते हैं। उन्होंने इसे "भारतीय ईसाइयों पर हमला" और अमेरिका-भारत संबंधों के लिए चिंता का विषय बताया। VHP ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि कानून का उद्देश्य अवैध धर्मांतरण और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के लिए विदेशी धन के दुरुपयोग को रोकना है। भारतीय विपक्षी नेताओं ने अमेरिकी हस्तक्षेप की आलोचना की, हालांकि कुछ ने FCRA के नागरिक समाज पर पड़ने वाले प्रभाव पर चिंता व्यक्त की।
AI सारांश
3 bulletsअमेरिकी सांसद ने जताई चिंता
अमेरिकी सांसद राइली मूर ने हाल ही में सोशल मीडिया पर भारत के प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि इन संशोधनों से भारत में धार्मिक चैरिटी, स्कूल और स्वास्थ्य संस्थानों पर सरकार का नियंत्रण बढ़ सकता है। मूर ने विशेष रूप से चेतावनी दी कि यदि किसी संगठन का FCRA लाइसेंस रद्द या सरेंडर होता है, तो सरकार उसकी संपत्तियों को अपने कब्जे में ले सकती है, इसे 'भारतीय ईसाइयों पर हमला' और द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक संभावित मुद्दा बताया।
VHP ने आरोपों को खारिज किया
विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने अमेरिकी सांसद मूर के दावों को पुरजोर तरीके से खारिज किया। VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने मूर को चुनौती दी कि वे FCRA के ऐसे किसी नियम का उल्लेख करें जो धार्मिक संस्थानों पर सरकारी कब्जे की अनुमति देता हो। बंसल ने जोर देकर कहा कि नया कानून अवैध धर्मांतरण और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के लिए विदेशी धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए है, और अमेरिकी सांसद को निराधार जानकारी फैलाने से बचने की सलाह दी।
भारतीय राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
भारतीय राजनीतिक हस्तियों ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी है। सीपीआई (एम) सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने कहा कि भारत के आंतरिक मामलों में अमेरिकी हस्तक्षेप अस्वीकार्य है, हालांकि उनकी पार्टी ने FCRA परिवर्तनों का शुरू में विरोध किया था। वहीं, शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता संजय निरुपम ने संशोधनों का समर्थन करते हुए कहा कि वे मानवाधिकारों या धार्मिक प्रचार की आड़ में काम करने वाले मिशनरी समूहों और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा विदेशी धन के दुरुपयोग को रोकेंगे।
FCRA: विकास और उद्देश्य
विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, जो मूल रूप से 1976 में लागू किया गया था, भारत में विदेशी योगदान की स्वीकृति और उपयोग को नियंत्रित करता है। इसमें कई संशोधन हुए हैं, जिनमें 2010, 2016, 2018, 2020 और अब प्रस्तावित 2026 के बदलाव शामिल हैं। वर्तमान संशोधनों का उद्देश्य पंजीकरण समाप्त होने या रद्द होने पर विदेशी-वित्तपोषित संपत्तियों को सुरक्षित करने के लिए एक नामित प्राधिकरण स्थापित करना है, और अनुमत धार्मिक गतिविधियों से धर्मांतरण के उद्देश्य से किए जाने वाले प्रचार-प्रसार को बाहर करना है।
क्यों मायने रखता है
यह विवाद भारत में विदेशी फंडिंग नियमों और गैर-सरकारी संगठनों, धार्मिक संगठनों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर उनके संभावित प्रभाव को लेकर चल रही बहस को उजागर करता है। संशोधनों का उद्देश्य राष्ट्रीय हित के लिए हानिकारक मानी जाने वाली गतिविधियों के लिए विदेशी धन के दुरुपयोग को रोकना है।
मुख्य तथ्य
- •Bill Name: Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill 2026
- •US Congressman's Allegations: Government control over religious charities, schools, healthcare institutions; 'attack on Indian Christians'.
- •VHP's Stance: Refutes allegations; states law targets misuse of funds for illegal conversions, anti-national activities.
- •Opposition's Stance: Opposes US interference; some concern over FCRA's impact on civil society.
- •FCRA Origin: Initiated in 1976; amended in 2010, 2016, 2018, 2020, and now 2026.
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