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Jaish-e-MohammedDigital PropagandaOperation SindoorISI

ऑपरेशन सिंदूर की मार के बाद जैश-ए-मोहम्मद का डिजिटल प्रोपेगैंडा

Briovo· 08 Jul 2026, 05:31 pm IST

ऑपरेशन सिंदूर में भारी नुकसान और बहावलपुर मुख्यालय के तबाह होने के बाद जैश-ए-मोहम्मद (JeM) कथित तौर पर डिजिटल प्रोपेगैंडा का सहारा ले रहा है। अपने जमीनी नेटवर्क के खात्मे और सरगना मसूद अजहर की गुमशुदगी के बीच, यह आतंकी समूह आईएसआई के मार्गदर्शन में युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के लिए डॉक्टर्ड वीडियो और झूठे नैरेटिव का उपयोग कर रहा है। इस रणनीति का उद्देश्य भारत में "स्थानीय" आतंकवादियों की भर्ती करना और पाकिस्तानी युवाओं को भारत के खिलाफ भड़काना है, साथ ही अपने बाकी बचे कैडरों को बिखरने से रोकना भी है। भारतीय खुफिया एजेंसियां इन गतिविधियों पर बारीकी से नजर रख रही हैं क्योंकि जैश अपनी प्रासंगिकता बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है।

AI सारांश

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ऑपरेशन सिंदूर का घातक प्रहार

भारतीय खुफिया एजेंसियों ने पुष्टि की है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' ने जैश-ए-मोहम्मद (JeM) को बुरी तरह पंगु बना दिया है। इस अभियान के कारण बहावलपुर, पाकिस्तान में जैश का मुख्य मुख्यालय नष्ट हो गया और कई प्रमुख कमांडर व कैडर मारे गए। इस बड़े नुकसान ने आतंकी समूह की भौतिक क्षमताओं और परिचालन नेटवर्क को काफी कमजोर कर दिया है, जिससे वह अपनी उपस्थिति बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है।

डिजिटल प्रोपेगैंडा की ओर बदलाव

अपनी जमीनी पहुंच खोने और मसूद अजहर की अज्ञात स्थिति के साथ नेतृत्व के शून्य का सामना करते हुए, जैश अब एक डिजिटल प्रोपेगैंडा अभियान पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इस नई रणनीति में डॉक्टर्ड वीडियो और झूठे नैरेटिव फैलाने के लिए इंटरनेट का उपयोग करना शामिल है। इसका उद्देश्य अपने भारत विरोधी एजेंडे को जारी रखना और ऑनलाइन कट्टरता के माध्यम से नए सदस्यों की भर्ती करना है।

ऑनलाइन गतिविधियों में ISI का मार्गदर्शक हाथ

खुफिया सूत्रों से पता चलता है कि यह डिजिटल अभियान सीधे पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) द्वारा निर्देशित है। ISI जैश की हताशा का उपयोग भारत विरोधी भावना को जीवित रखने और भारतीय सुरक्षा बलों पर दबाव बनाए रखने के लिए कर रहा है। यह सहयोग प्रॉक्सी समूहों के माध्यम से क्षेत्र को अस्थिर करने के लगातार राज्य-प्रायोजित प्रयास को उजागर करता है।

भर्ती और उकसाने के उद्देश्य

डिजिटल प्रोपेगैंडा का दोहरा उद्देश्य है: भारत के भीतर युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर "स्थानीय" आतंकी मॉड्यूल बनाना और पाकिस्तानी युवाओं को भारत के खिलाफ उकसाना। विकृत जानकारी फैलाकर और झूठे मानवाधिकार नैरेटिव बनाकर, जैश और आईएसआई का लक्ष्य अशांति फैलाना और नए गुर्गों की भर्ती करना है। यह दृष्टिकोण उनकी घटी हुई भौतिक परिचालन क्षमताओं की भरपाई करने का प्रयास करता है।

मसूद अजहर की अनिश्चित स्थिति

जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक, मसूद अजहर, पहलगाम हमले के बाद भारत के अभियानों के बाद से सार्वजनिक रूप से काफी हद तक अनुपस्थित रहा है। रिपोर्टों से पता चलता है कि वह गंभीर रूप से बीमार है और छिपा हुआ है, जिससे उसकी नेतृत्व क्षमता के बारे में अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि जैश ने कथित तौर पर अपने बहावलपुर मुख्यालय का पुनर्निर्माण कर लिया है, लेकिन अजहर की अनुपस्थिति और सक्रिय कैडरों की संख्या में उल्लेखनीय कमी संगठन के गंभीर आंतरिक संकट की ओर इशारा करती है।

क्यों मायने रखता है

जैश-ए-मोहम्मद द्वारा भौतिक हमलों से डिजिटल प्रोपेगैंडा की ओर रणनीति में यह बदलाव सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नई चुनौती पेश करता है, जिसके लिए उन्हें कट्टरता के प्रयासों का मुकाबला करने और नए आतंकवादियों की भर्ती को रोकने के लिए ऑनलाइन गतिविधियों की निगरानी करने की आवश्यकता है।

मुख्य तथ्य

  • Operation Sindoor Impact: Destroyed Jaish-e-Mohammed's Bahawalpur headquarters and eliminated key commanders/cadres.
  • Jaish New Strategy: Digital propaganda campaign using doctored videos and false human rights narratives.
  • Objectives of Digital Campaign: Radicalize youth in India and Pakistan, prevent remaining cadres from dispersing.
  • ISI Involvement: Pakistani intelligence agency ISI is directly guiding this digital campaign.
  • Masood Azhar Status: Reported to be gravely ill and hiding, his whereabouts unknown since Indian operations post-Pahalgam attack.

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