कर्नाटक: निजी तस्वीरें-वीडियो बिना सहमति साझा करने पर तुरंत FIR
कर्नाटक सरकार ने निजी तस्वीरें और वीडियो बिना सहमति साझा करने पर तत्काल FIR दर्ज करना अनिवार्य कर दिया है। गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने सख्त निर्देश जारी किए, जिसमें निजता को अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार बताया गया है। FIR दर्ज करने में देरी या इनकार करने वाले पुलिस अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। ये नियम पुरुषों और महिलाओं दोनों पर लागू होते हैं, और रिकॉर्डिंग के लिए प्रारंभिक सहमति को साझा करने की सहमति से अलग मानते हैं। भारतीय न्याय संहिता 2023 और आईटी अधिनियम के तहत उल्लंघन करने वालों को कारावास और जुर्माना हो सकता है। ज़ीरो एफआईआर अनिवार्य है, और पुलिस को सोशल मीडिया से आपत्तिजनक सामग्री हटानी होगी, साथ ही पीड़ितों की पहचान गुप्त रखनी होगी।
AI सारांश
3 bulletsसहमति पर नई राज्य नीति
कर्नाटक सरकार ने एक नया निर्देश लागू किया है जिसके तहत यदि किसी व्यक्ति की निजी या अंतरंग तस्वीरें और वीडियो उसकी सहमति के बिना साझा किए जाते हैं, तो पुलिस को तत्काल FIR दर्ज करना अनिवार्य होगा। गृह मंत्री प्रियांक खरगे द्वारा घोषित इस निर्णय का उद्देश्य ब्लैकमेल और सेक्सटॉर्शन जैसे साइबर अपराधों से अधिक प्रभावी ढंग से निपटना है। यह नीति इस बात पर जोर देती है कि निजता का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है।
पुलिस के लिए कड़े निर्देश
गृह मंत्री खरगे ने सभी पुलिस आयुक्तों और जिला अधीक्षकों को कड़े निर्देश जारी किए हैं, जिसमें कहा गया है कि पुराने नियमों का हवाला देकर FIR दर्ज करने में किसी भी देरी या इनकार करने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस महानिदेशक (DG & IGP) एम.ए. सलीम ने इन नए नियमों को लागू करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। दिशानिर्देश स्पष्ट करते हैं कि रिकॉर्डिंग के लिए प्रारंभिक सहमति का मतलब सामग्री को सार्वजनिक रूप से साझा करने या पोस्ट करने की सहमति नहीं है।
कानूनी प्रावधान और दंड
भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 77 के तहत, किसी महिला की निजी तस्वीरें बिना सहमति के साझा करना पहली बार में एक से तीन साल की कैद और दोबारा अपराध करने पर तीन से सात साल की कैद के साथ-साथ जुर्माने से दंडनीय है। इसके अतिरिक्त, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की धारा 66(E) के तहत, निजी अंगों की तस्वीरें बिना सहमति के रिकॉर्ड या प्रसारित करने पर तीन साल तक की जेल या ₹2 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। ऑनलाइन अश्लील सामग्री भेजने पर सात साल तक की जेल या ₹10 लाख तक का जुर्माना हो सकता है।
FIR प्रक्रिया और पीड़ित सुरक्षा
नए नियमों के अनुसार, शिकायत मिलने पर तुरंत FIR दर्ज करना अनिवार्य है, भले ही वह स्थानीय पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र से बाहर हो, ऐसी स्थिति में 'जीरो FIR' दर्ज की जाएगी और फिर संबंधित थाने में स्थानांतरित की जाएगी। पुलिस को सोशल मीडिया कंपनियों को आपत्तिजनक सामग्री हटाने या ब्लॉक करने के लिए तत्काल नोटिस जारी करने का भी निर्देश दिया गया है। पीड़ितों की सुरक्षा के लिए, उनकी पहचान पूरी तरह से गुप्त रखी जाएगी, और महिला पीड़ितों की शिकायतें विशेष रूप से महिला पुलिस अधिकारियों द्वारा दर्ज की जाएंगी।
क्यों मायने रखता है
कर्नाटक सरकार का यह महत्वपूर्ण कदम ब्लैकमेल और सेक्सटॉर्शन जैसे साइबर अपराधों से लड़ने, निजता के अधिकारों को मजबूत करने और सहमति के बिना मीडिया साझा करने के पीड़ितों को त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से है।
मुख्य तथ्य
- •State: Karnataka
- •Legislation: Indian Justice Code (BNS) 2023, IT Act Section 66(E)
- •FIR Mandate: Immediate registration, including Zero FIR
- •Penalties for first offense: 1-3 years jail + fine (BNS 2023)
- •Penalties for repeated offense: 3-7 years jail + fine (BNS 2023)
- •IT Act penalties: Up to 3 years jail or ₹2 lakh fine for private body images, up to 7 years jail or ₹10 lakh fine for obscene material
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