जापान के पूर्व मंत्री ने बुलेट ट्रेन में देरी के लिए भारत को ठहराया जिम्मेदार
जापान के पूर्व न्याय मंत्री हिदेकी माकिहारा ने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में देरी के लिए भारतीय अधिकारियों और एक पूर्व मंत्री को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय पक्ष अक्सर वादों का पालन करने में विफल रहा और बातचीत के दौरान अपने हितों को प्राथमिकता दी, जिससे नकारात्मक रवैया पैदा हुआ। यह बयान जापानी रेलवे इंजीनियर इसाओ सुजिमुरा के एक लेख के बाद आया है, जिसमें उन्होंने सुझाव दिया था कि परियोजना मूल शिंकानसेन मॉडल से विचलित हो गई है। हालांकि, भारत सरकार इन दावों का खंडन करती है और कहती है कि बातचीत सकारात्मक रूप से आगे बढ़ रही है और निर्माण कार्य अगस्त 2027 से चरणबद्ध कमीशनिंग के लक्ष्य के साथ निर्धारित समय पर है।
AI सारांश
3 bulletsपूर्व जापानी मंत्री ने लगाए देरी के आरोप
जापान के पूर्व न्याय मंत्री हिदेकी माकिहारा ने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में देरी के लिए भारतीय अधिकारियों और एक पूर्व मंत्री को खुले तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। माकिहारा ने दावा किया कि भारतीय पक्ष ने बातचीत के दौरान एक गैर-जिम्मेदाराना रवैया दिखाया, अक्सर वादे पूरे करने में विफल रहा और परियोजना की प्रगति पर अपने हितों को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि उच्च स्तर पर ऐसे व्यवहार ने उत्पादक चर्चाओं को बाधित किया।
रेलवे इंजीनियर के लेख से बहस
माकिहारा की कड़ी टिप्पणियां टोक्यो के टोयो केइजाई ऑनलाइन में प्रकाशित एक वरिष्ठ जापानी रेलवे इंजीनियर इसाओ सुजिमुरा के एक लेख के बाद आईं। सुजिमुरा ने दावा किया था कि भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना मूल जापानी शिंकानसेन मॉडल से काफी विचलित हो गई थी। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भारतीय अधिकारी निजी तौर पर जानते थे कि 2023 तक पूरा होने का लक्ष्य अवास्तविक था।
भारत सरकार ने आरोपों को नकारा
माकिहारा के आरोपों के जवाब में, भारत सरकार ने इन दावों को दृढ़ता से खारिज कर दिया है, यह दावा करते हुए कि बुलेट ट्रेन परियोजना पर जापान के साथ बातचीत सकारात्मक रूप से आगे बढ़ रही है। सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच कोई असहमति नहीं है और हाल के महीनों में निर्माण कार्य में तेजी आई है। भारत भविष्य में घरेलू स्तर पर हाई-स्पीड ट्रेनों का निर्माण करने की भी योजना बना रहा है, जबकि जापान 2030 के दशक की शुरुआत में ई10 श्रृंखला की ट्रेनें प्रदान करेगा।
परियोजना की समय-सीमा और प्रगति
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, 508 किलोमीटर लंबा, मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स को अहमदाबाद से जोड़ने का लक्ष्य रखता है, जिससे यात्रा का समय आठ घंटे से घटकर केवल दो घंटे हो जाएगा। परियोजना की योजना 15 अगस्त, 2027 तक सूरत-बिलिमोरा खंड पर चरणबद्ध यात्री सेवाओं को शुरू करने की है। भूमि अधिग्रहण और राजनीतिक कारकों के कारण शुरुआती देरी के बावजूद, पुलों, सुरंगों और स्टेशनों का निर्माण अब तेजी से आगे बढ़ रहा है।
आरोपों पर राजनीतिक प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने पूर्व जापानी मंत्री के आरोपों के बाद मोदी सरकार की आलोचना की, और गंभीर दावों पर एक आधिकारिक प्रतिक्रिया की मांग की। इसके बावजूद, भारत सरकार का कहना है कि परियोजना योजना के अनुसार आगे बढ़ रही है और भारत-जापान का सहयोग मजबूत बना हुआ है। यह राजनीतिक जांच महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजना के आसपास चल रही चर्चा में एक और आयाम जोड़ती है।
क्यों मायने रखता है
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) परियोजना भारत की पहली बुलेट ट्रेन है और भारत-जापान सहयोग का एक प्रमुख बुनियादी ढांचा है। इसमें देरी या विवाद भविष्य की द्विपक्षीय परियोजनाओं और उन्नत रेल नेटवर्क के लिए भारत की आकांक्षाओं को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी पर सीधा असर पड़ेगा।
मुख्य तथ्य
- •Project Name: Mumbai-Ahmedabad Bullet Train Project (MAHSR)
- •Project Length: 508 kilometers
- •Target Speed: 320 kilometers per hour
- •Estimated Travel Time: 2 hours (from 8 hours)
- •First Section Commissioning: August 15, 2027 (Sura-Bilimora section)
- •Japanese Official: Hideki Makihara (Former Justice Minister)
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