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सुप्रीम कोर्ट: न्यायिक फैसलों में AI का उपयोग नहीं, NCLT का आदेश रद्द

Briovo· 03 Jul 2026, 05:17 am IST
सुप्रीम कोर्ट: न्यायिक फैसलों में AI का उपयोग नहीं, NCLT का आदेश रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक फैसलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल की कड़ी निंदा की है और इसे "अदृश्य और घातक" रसायन बताया है। शीर्ष अदालत ने एक दिवाला मामले में AI-जनित मनगढ़ंत कानूनी नजीरों पर आधारित NCLT के फैसले को रद्द कर दिया। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे ने कहा कि कानूनी कार्यवाही में AI-जनित संदर्भों का उपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने जोर देकर कहा कि ऐसी सामग्री पर निर्भरता न्यायिक प्रक्रिया को दूषित करती है और ऐसे कार्यों के लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इसका संज्ञान लेते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया को इस मुद्दे पर एक समिति गठित करने का भी निर्देश दिया है।

AI सारांश

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न्यायपालिका में AI के उपयोग की SC ने की निंदा

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक निर्णयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग की कड़ी निंदा की है, इसे

NCLT का आदेश पलटा गया

शीर्ष अदालत ने विशेष रूप से एस्सेल इन्फ्राप्रोजेक्ट्स से जुड़े एक दिवालियापन मामले में राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) के एक आदेश को रद्द कर दिया। NCLT के फैसले में AI के माध्यम से उत्पन्न मनगढ़ंत और गैर-मौजूद कानूनी नजीरों पर निर्भरता पाई गई थी। यह फैसला कानूनी प्रक्रिया में एक गंभीर चूक को उजागर करता है।

AI-जनित संदर्भों के लिए कोई सहिष्णुता नहीं

पीठ की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और आलोक अराधे ने दृढ़ता से कहा कि न्यायिक निर्णयों में AI-जनित संदर्भों के उपयोग के खिलाफ शून्य-सहिष्णुता नीति होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अधिवक्ताओं द्वारा इस तरह के असत्यापित निर्णयों को प्रस्तुत करना पेशेवर कदाचार है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका निर्णय AI के उचित उपयोग को प्रभावित नहीं करेगा।

जवाबदेही और बीसीआई की कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर कहा कि किसी न्यायाधीश द्वारा AI-जनित सामग्री पर निर्भरता एक गंभीर त्रुटि है और ऐसे निर्णय, यदि उनमें मनगढ़ंत सामग्री का थोड़ा सा भी अंश पाया जाता है, तो उन्हें रद्द कर दिया जाना चाहिए। अदालत ने भारतीय विधिज्ञ परिषद (BCI) को इस मुद्दे पर विचार-विमर्श करने और अधिवक्ताओं द्वारा मनगढ़ंत सामग्री को कानूनी नजीर के रूप में प्रस्तुत करने के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई निर्धारित करने के लिए एक समिति गठित करने का भी निर्देश दिया। इसका उद्देश्य जवाबदेही सुनिश्चित करना और कानूनी प्रणाली की अखंडता बनाए रखना है।

क्यों मायने रखता है

न्यायिक निर्णयों में AI के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख कानूनी कार्यवाही में सटीकता और प्रामाणिकता की महत्वपूर्ण आवश्यकता को रेखांकित करता है। यह फैसला इस बात के लिए एक मिसाल कायम करता है कि प्रौद्योगिकी को न्याय प्रणाली में कैसे एकीकृत किया जाना चाहिए, यह सुनिश्चित करते हुए कि मानवीय निरीक्षण और सत्यापित नजीरें सर्वोपरि रहें। यह कानूनी अखंडता की रक्षा करता है और अविश्वसनीय AI आउटपुट के कारण संभावित न्याय की विफलता को रोकता है। यह निर्णय न केवल न्यायपालिका को प्रभावित करता है, बल्कि कानूनी पेशेवरों को भी प्रभावित करता है, जिससे AI उपकरणों के उपयोग में नैतिक दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है।

मुख्य तथ्य

  • Ruling Date: July 3, 2026
  • Court: Supreme Court of India
  • Justices: P.S. Narasimha & Alok Aradhe
  • Original Ruling Authority: NCLT (National Company Law Tribunal)
  • Case Type: Insolvency dispute (Essel Infraprojects)
  • Prohibited Action: Use of AI-generated references/precedents in judicial decisions

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