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Madhya Pradesh High CourtCulpable HomicideSentence ReductionGrave Provocation

MP हाई कोर्ट ने गर्भवती पत्नी के हत्यारे की उम्रकैद कम की

Briovo· 30 Jun 2026, 02:34 pm IST
MP हाई कोर्ट ने गर्भवती पत्नी के हत्यारे की उम्रकैद कम की

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक व्यक्ति की उम्रकैद की सज़ा को घटाकर सात साल कर दिया, जिसने अपनी सात महीने की गर्भवती पत्नी की हत्या की थी। कोर्ट ने दोषी को "गंभीर और अचानक उकसावे" के कारण हत्या के बजाय गैर इरादतन हत्या का दोषी माना। यह घटना जुलाई 2021 में हुई थी जब पत्नी ने कथित तौर पर बहस के दौरान अपने पति को उकसाया था। कोर्ट ने यह भी कहा कि घटना के तुरंत बाद पति ने पुलिस को सूचित किया था, जिससे पूर्व-योजना की कमी का पता चलता है। उस पर ₹1,000 का जुर्माना भी लगाया गया।

AI सारांश

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एमपी हाई कोर्ट ने घटाई सज़ा

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक व्यक्ति, शिवा, की उम्रकैद की सज़ा को घटाकर सात साल के कठोर कारावास में बदल दिया है। यह फैसला उस मामले में आया है जहां शिवा को पहले अपनी सात महीने की गर्भवती पत्नी किरण की हत्या का दोषी ठहराया गया था।

घटना का संदर्भ

यह घटना जुलाई 2021 में छिंदवाड़ा जिले में कुलभेरी नदी के खर्रा घाट पर हुई थी। एक बहस के दौरान, शिवा की पत्नी किरण ने कथित तौर पर एक भड़काऊ बयान दिया था, जिसमें उसने उससे कहा था, 'मेरे जैसे हज़ार पति हो सकते हैं तुम्हारे।'

गंभीर और अचानक उकसावा

जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिन्द्र कुमार सिंह की जबलपुर पीठ ने फैसला सुनाया कि यह अपराध "गंभीर और अचानक उकसावे" के तहत किया गया था। इसी कारण से दोषसिद्धि को हत्या से बदलकर गैर इरादतन हत्या कर दिया गया।

तत्काल सूचना, पूर्व-योजना नहीं

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हाई कोर्ट ने गौर किया कि घटना के तुरंत बाद खुद शिवा ने पुलिस और अपनी पत्नी के परिवार को सूचित किया था। इस कार्रवाई से पूर्व-योजना की कमी का पता चला, जिससे कोर्ट के इस विचार का समर्थन मिला कि यह कार्य पूर्व-नियोजित हत्या नहीं थी।

संशोधित दोषसिद्धि और सज़ा

कोर्ट ने दोषसिद्धि को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 भाग I से धारा 304 भाग II में संशोधित किया। परिणामस्वरूप, शिवा को सात साल के कठोर कारावास और ₹1,000 के जुर्माने की सज़ा सुनाई गई, जिससे उसकी अपील आंशिक रूप से स्वीकार कर ली गई।

क्यों मायने रखता है

यह फैसला दिखाता है कि अदालतें हिंसक अपराधों में सज़ा कम करने के लिए "गंभीर और अचानक उकसावे" को कैसे मानती हैं, हत्या से गैर इरादतन हत्या में बदल देती हैं। यह कानूनी निर्णयों में इरादे बनाम तात्कालिक भावनात्मक प्रतिक्रिया के मूल्यांकन के लिए एक मिसाल कायम करता है, जो समान परिस्थितियों वाले भविष्य के मामलों को प्रभावित करेगा।

मुख्य तथ्य

  • Accused: Shiva
  • Victim: Kiran (7 months pregnant)
  • Original Sentence: Life Imprisonment
  • Revised Sentence: 7 years rigorous imprisonment + ₹1,000 fine
  • Reason for reduction: Grave and sudden provocation
  • Location of incident: Kharra Ghat, Kulbehri river, Chhindwara

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