राजस्थान हाईकोर्ट ने चुनाव में देरी पर चुनाव आयोग को लगाई फटकार
राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों में देरी को लेकर चुनाव आयोग और ओबीसी आयोग दोनों को फटकार लगाई है। कोर्ट ने चुनाव आयोग को चुनाव की तारीखें घोषित करने के लिए पांच दिन का समय दिया है और ओबीसी आयोग से अपनी रिपोर्ट जमा करने की तारीख बताने को कहा है। राज्य सरकार से लॉटरी प्रक्रिया पूरी होने की तारीख के बारे में भी पूछा गया। हाईकोर्ट ने सवाल किया कि चुनाव आयोग के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों शुरू न की जाए, और यह भी बताया कि पिछले आदेशों के अनुसार 31 जुलाई तक चुनाव होने थे। अगली सुनवाई सोमवार को होगी। चुनाव आयुक्त ने बताया कि तैयारियां पूरी हैं, बस सरकार से आरक्षण का वर्गीकरण मिलने का इंतजार है।
AI सारांश
3 bulletsहाईकोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी
राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों में हो रही अत्यधिक देरी को लेकर चुनाव आयोग और ओबीसी आयोग के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने देरी के कारणों पर सवाल उठाया और संभावित अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की चेतावनी दी।
चुनाव आयोग को मिला अल्टीमेटम
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा और न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने चुनाव आयोग को पांच दिनों के भीतर चुनाव की तारीखों की घोषणा करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने 31 जुलाई तक चुनाव कराने के पिछले निर्देशों का पालन करने में आयोग की विफलता पर असंतोष व्यक्त किया।
ओबीसी आयोग भी जांच के दायरे में
ओबीसी आयोग को भी हाईकोर्ट से अपनी रिपोर्ट जमा करने में हुई देरी को लेकर कड़ी पूछताछ का सामना करना पड़ा, खासकर जब इसे 9 मई 2025 (sic) को तीन महीने की अवधि के लिए गठित किया गया था। कोर्ट ने अब ओबीसी आयोग को सोमवार तक सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए एक समय-सीमा प्रदान करने का निर्देश दिया है।
सरकार को आरक्षण डेटा का इंतजार
राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह ने अदालत को सूचित किया कि चुनाव की तैयारियां पूरी हैं, लेकिन वे राज्य सरकार द्वारा आरक्षण के वर्गीकरण का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ही सरकार आरक्षण के लिए लॉटरी की जानकारी प्रदान करेगी, चुनाव प्रक्रिया दो दिनों के भीतर शुरू हो सकती है।
अगली सुनवाई सोमवार को
हाईकोर्ट ने पहले 22 मई को राज्य सरकार और चुनाव आयोग को 31 जुलाई तक पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव कराने का आदेश दिया था। कोई प्रगति न होने के कारण नए कड़े निर्देश दिए गए हैं। इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई सोमवार को निर्धारित की गई है।
क्यों मायने रखता है
स्थानीय निकाय चुनावों में देरी से लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और स्थानीय शासन प्रभावित होता है, जिससे चुनावी प्रक्रियाओं में जनता का विश्वास कमजोर हो सकता है। हाईकोर्ट का हस्तक्षेप चुनावी समय-सीमा को बनाए रखने में न्यायपालिका की भूमिका को रेखांकित करता है।
मुख्य तथ्य
- •Court Ultimatum: Election Commission given 5 days to announce poll dates
- •OBC Commission Deadline: Must report by Monday on when it will submit its report
- •Previous Election Deadline: High Court had ordered elections by July 31
- •Judges: Acting Chief Justice S.P. Sharma and Justice Sanjeet Purohit
- •Next Hearing: Scheduled for Monday
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