जम्मू-कश्मीर किताब विवाद: BJP ने आतंकी महिमामंडन के आरोपों पर प्रतिबंध और जांच की…
जम्मू-कश्मीर में सरकारी स्कूल पुस्तकालयों के लिए कथित रूप से स्वीकृत 'पर्सनैलिटीज़ एंड लेजेंड्स ऑफ जम्मू-कश्मीर' नामक एक किताब ने भारी हंगामा खड़ा कर दिया है। किताब पर मकबूल भट और हाफिज सईद जैसे आतंकवादियों के साथ-साथ सैयद अली शाह गिलानी, मसरत आलम और मीरवाइज उमर फारूक जैसे अलगाववादियों का महिमामंडन करने का आरोप है। इसमें कथित तौर पर क्षेत्र को "भारतीय अधिकृत कश्मीर" बताते हुए समग्र शिक्षा, जम्मू-कश्मीर का लोगो भी है। जवाबदेही की राजनीतिक मांगों के बाद, अधिकारियों ने किताब वापस ले ली है और इसके अनुमोदन और वितरण की उच्च-स्तरीय जांच का आदेश दिया है।
AI सारांश
3 bulletsविवादास्पद किताब ने भड़काया आक्रोश
जम्मू-कश्मीर में सरकारी स्कूल पुस्तकालयों के लिए कथित रूप से स्वीकृत 'पर्सनैलिटीज़ एंड लेजेंड्स ऑफ जम्मू-कश्मीर' नामक एक किताब ने एक महत्वपूर्ण विवाद को जन्म दिया है। इस प्रकाशन पर आतंकवादियों और अलगाववादी नेताओं का महिमामंडन करने वाली सामग्री होने का आरोप है, जिससे पूरे क्षेत्र और उसके बाहर व्यापक आक्रोश फैल गया है। इसने संवेदनशील क्षेत्रों में शैक्षिक सामग्री की जांच को तीव्र रूप से केंद्रित किया है।
आतंकवाद और अलगाववाद के महिमामंडन के आरोप
किताब के खिलाफ विशिष्ट आरोपों में जेकेएलएफ आतंकवादी मकबूल भट को "शहीद" के रूप में चित्रित करना और सैयद अली शाह गिलानी, मसरत आलम और मीरवाइज उमर फारूक जैसे अलगाववादी नेताओं को सकारात्मक रूप से प्रस्तुत करना शामिल है। इसके अलावा, बीजेपी का दावा है कि किताब 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद की प्रशंसा करती है। किताब विवादास्पद रूप से इस क्षेत्र को "भारतीय अधिकृत कश्मीर" और "भारतीय कब्जे वाले कश्मीर" के रूप में भी संदर्भित करती है, जिससे आगे और आलोचना हुई।
भाजपा ने जवाबदेही और प्रतिबंध की मांग की
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने किताब की सामग्री की कड़ी निंदा की है, उच्च-स्तरीय जांच और तत्काल प्रतिबंध की मांग की है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता, सुनील शर्मा ने स्कूल पुस्तकालयों में किताब के व्यापक वितरण का आरोप लगाया और लेखक, प्रकाशक, विशेषज्ञ समिति और यहां तक कि शिक्षा मंत्री से भी जवाबदेही की मांग की। भाजपा ने प्रकाशन के पीछे एक बड़े षड्यंत्र का भी सुझाव दिया।
किताब वापस ली गई, जांच शुरू
बढ़ते सार्वजनिक और राजनीतिक दबाव के जवाब में, अधिकारियों ने तुरंत सभी सरकारी स्कूल पुस्तकालयों से विवादास्पद किताब को वापस लेने के लिए कदम उठाए। इसके साथ ही, किताब के अनुमोदन और वितरण से संबंधित परिस्थितियों की गहन जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय जांच का आदेश दिया गया है। जांच का उद्देश्य इस महत्वपूर्ण चूक में शामिल सभी व्यक्तियों की पहचान करना और उन्हें जवाबदेह ठहराना है।
शैक्षिक अखंडता पर प्रभाव
यह घटना जम्मू-कश्मीर में शैक्षिक सामग्री की जांच प्रक्रिया के बारे में महत्वपूर्ण सवाल उठाती है, खासकर युवा छात्रों को प्रस्तुत किए गए विचारों के संबंध में। इतिहास और पहचान की निष्पक्ष और सटीक समझ को बढ़ावा देने के लिए स्कूल पाठ्यक्रमों की अखंडता सुनिश्चित करना सर्वोपरि है। जांच का परिणाम संभवतः शैक्षिक सामग्री निरीक्षण के लिए नए दिशानिर्देश स्थापित करेगा।
क्यों मायने रखता है
यह विवाद संवेदनशील क्षेत्रों में शैक्षिक सामग्री और पाठ्यक्रम सामग्री पर संभावित राजनीतिक प्रभाव के बारे में चिंताओं को उजागर करता है। यह राष्ट्रीय अखंडता और शांति के लिए हानिकारक हो सकने वाले विचारों के प्रसार को रोकने के लिए स्कूलों में वितरित की जाने वाली पुस्तकों के लिए कड़ी जांच प्रक्रियाओं के महत्व को रेखांकित करता है।
मुख्य तथ्य
- •Book Title: 'Personalities and Legends of J&K'
- •Allegations: Glorifies terrorists/separatists, refers to region as 'Indian Held/Occupied Kashmir'
- •Accused Personalities: Maqbool Bhat, Hafiz Saeed, Syed Ali Shah Geelani, Masarat Alam, Mirwaiz Umar Farooq
- •Associated Body: Samagra Shiksha, J&K (logo on book)
- •Action Taken: Book withdrawn, high-level probe ordered
क्या यह मददगार था?
Reader pulse
0 votesGenerate a 5-question quiz from this article.
चर्चा
Discussion (0)
Loading…