सावरकर के परपोते का दावा: 1923 में कांग्रेस ने मांगी थी रिहाई
राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान, वीर सावरकर के परपोते सत्यकी सावरकर ने दावा किया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 1923 में उनके परदादा की रिहाई का समर्थन करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया था। उन्होंने तर्क दिया कि मौजूदा कांग्रेस की आलोचना के बावजूद, ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि कांग्रेस ने सावरकर की वकालत की थी, जो 1911 से 1924 तक कैद थे। सावरकर के परपोते अगली सुनवाई में इस प्रस्ताव का सबूत पेश करेंगे। मानहानि का मामला राहुल गांधी के मार्च 2023 में लंदन में एक मुस्लिम व्यक्ति को पीटने की कथित घटना के संबंध में सावरकर के बारे में दिए गए कथित झूठे बयानों से उपजा है।
AI सारांश
3 bulletsराहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ वीर सावरकर के परपोते सत्यकी सावरकर ने मानहानि का मुकदमा दायर किया है। यह मामला मार्च 2023 में लंदन में गांधी द्वारा की गई टिप्पणियों से जुड़ा है, जहां उन्होंने कथित तौर पर वीर सावरकर के बारे में झूठे और अपमानजनक बयान दिए थे। सत्यकी सावरकर का कहना है कि इन बयानों से उनके परदादा की छवि को अनुचित रूप से धूमिल किया गया है।
कांग्रेस का कथित 1923 का प्रस्ताव
पुणे में अदालत की कार्यवाही के दौरान, सत्यकी सावरकर ने एक महत्वपूर्ण दावा किया: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 1923 में वीर सावरकर की रिहाई की वकालत करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया था। उन्होंने तर्क दिया कि यह सावरकर के प्रति कांग्रेस के मौजूदा आलोचनात्मक रुख के विपरीत है, जो राजनीतिक दृष्टिकोण में एक ऐतिहासिक बदलाव को उजागर करता है। सावरकर के परपोते ने कहा कि वह अगली सुनवाई में इस प्रस्ताव का सबूत पेश करेंगे।
सावरकर की कैद का ऐतिहासिक संदर्भ
वीर सावरकर को ब्रिटिशों द्वारा 1911 से 1924 तक कैद किया गया था। उनकी प्रारंभिक कैद 1911 से 1921 तक कुख्यात अंडमान सेलुलर जेल, जिसे 'काला पानी' के नाम से भी जाना जाता है, में हुई थी। बाद में उन्हें रत्नागिरी जेल में स्थानांतरित कर दिया गया, और अंततः 1924 में सशर्त रिहाई मिली, हालांकि वे 1937 तक रत्नागिरी जिले तक ही सीमित रहे।
राहुल गांधी के पिछले बयान और बचाव
राहुल गांधी ने अक्सर सावरकर की आलोचना की है, उन्हें एक विशिष्ट विचारधारा से जोड़कर भाजपा और आरएसएस नेतृत्व पर सवाल उठाया है। वह अक्सर दावा करते हैं कि सावरकर ने एक किताब लिखी थी जिसमें एक मुस्लिम व्यक्ति को पीटने का आनंद लेने का वर्णन था, एक दावा जिसे सत्यकी सावरकर मनगढ़ंत बताते हैं। पिछले मानहानि के मुकदमों का सामना करने और माफी मांगने के बावजूद, गांधी ने कहा है कि वह 'गांधी' हैं और अपनी आलोचना के लिए माफी नहीं मांगेंगे।
अदालत की जांच और अगली सुनवाई
अदालत के निर्देश के बाद, पुणे पुलिस ने 27 मई 2024 को एक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें संकेत दिया गया कि राहुल गांधी के भाषण ने वीर सावरकर को संभावित रूप से बदनाम किया। गांधी ने जुलाई 2025 में इस मामले में पहले ही खुद को निर्दोष बताया था। इस चल रहे मानहानि मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई को निर्धारित है, जहां सत्यकी सावरकर अपना सबूत पेश करने वाले हैं।
क्यों मायने रखता है
मानहानि का चल रहा मामला और ऐतिहासिक दावे वीर सावरकर की विरासत और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ उनके संबंधों पर विवादास्पद बहस को फिर से जगाते हैं, जिसका समकालीन राजनीतिक आख्यानों पर असर पड़ता है।
मुख्य तथ्य
- •Litigant: Satyaki Savarkar (Veer Savarkar's grand-nephew)
- •Accused: Rahul Gandhi (Congress leader)
- •Allegation: Defamation over Rahul Gandhi's London statements about Savarkar
- •Key Claim: Congress passed a resolution for Savarkar's release in 1923
- •Savarkar's Imprisonment: 1911-1924 (Andaman and later Ratnagiri)
- •Next Hearing: July 7
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