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SC का प्रदर्शनकारियों पर फैसला: गंभीर मामलों में राहत नहीं

Briovo· 04 Aug 2026, 03:31 am IST
SC का प्रदर्शनकारियों पर फैसला: गंभीर मामलों में राहत नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामलों पर अपना रुख स्पष्ट किया है। जबकि राज्य गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों के खिलाफ आरोप हटा सकते हैं, हिंसा में शामिल या पहले से गंभीर आरोपों (जैसे बलात्कार या हत्या) वाले व्यक्तियों को राहत नहीं मिलेगी। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि इस उद्देश्य के लिए छोटे-मोटे अपराध या राजनीतिक भागीदारी को "आपराधिक पृष्ठभूमि" नहीं माना जाएगा। केंद्र सरकार ने छात्रों के खिलाफ मामलों को बंद करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, पुलिस क्लोजर रिपोर्ट या सरकारी वकीलों द्वारा अभियोजन वापस लेने जैसी कानूनी प्रक्रियाओं की खोज कर रही है। 18 अगस्त को अगली सुनवाई में एफआईआर रद्द करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने का लक्ष्य रखा जाएगा, जिससे प्रदर्शनकारियों और हिंसा के शिकार लोगों दोनों के लिए न्याय सुनिश्चित हो सके।

AI सारांश

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SC ने प्रदर्शनकारियों को राहत स्पष्ट की

सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर सहित भारत भर में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों के संबंध में एक आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामलों को बंद या वापस ले सकते हैं, लेकिन यह राहत सार्वभौमिक नहीं है। इसमें विशेष रूप से गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों या प्रदर्शनों के दौरान हिंसा में शामिल लोगों को बाहर रखा गया है।

किसे मिलेगी राहत, किसे नहीं

राहत उन प्रदर्शनकारियों को दी जाएगी जिनके खिलाफ कोई गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। हालांकि, बलात्कार या हत्या जैसे पहले से गंभीर आरोपों वाले या छात्र विरोध प्रदर्शन की आड़ में हिंसा भड़काने वाले व्यक्तियों को कानूनी राहत नहीं मिलेगी। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि मामूली अपराध, जैसे यातायात उल्लंघन या राजनीतिक विरोध प्रदर्शन में पिछली भागीदारी, इस संदर्भ में 'आपराधिक पृष्ठभूमि' नहीं बनाती है।

सरकार की प्रतिबद्धता और प्रक्रिया

केंद्र सरकार ने अदालत को छात्रों के खिलाफ मामलों को खत्म करने की अपनी प्रतिबद्धता का आश्वासन दिया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जबकि एफआईआर को सीधे वापस लेने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है, सरकार पुलिस द्वारा क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने या सरकारी वकीलों द्वारा अभियोजन वापस लेने की अनुमति मांगने जैसे विकल्पों की तलाश कर रही है। सरकार एक mutually agreeable प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए विरोध प्रदर्शन प्रतिनिधियों और वकीलों के साथ सहयोग करने का इरादा रखती है।

प्रदर्शनकारियों और अपराधियों के बीच अंतर

तुषार मेहता ने बताया कि अकेले जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शनों में लगभग 2,738 व्यक्ति शामिल हैं जिन पर बलात्कार और हत्या जैसे गंभीर आपराधिक आरोप हैं। सरकार गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड के बिना छात्रों के मामलों को सुलझाने के लिए तैयार है, लेकिन गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को राहत नहीं देगी, जिससे वास्तविक प्रदर्शनकारियों और गैरकानूनी गतिविधियों के लिए विरोध प्रदर्शन का उपयोग करने वाले तत्वों के बीच अंतर किया जा सके।

भविष्य की सुनवाई और न्यायिक निरीक्षण

18 अगस्त, 2026 को होने वाली अगली सुनवाई महत्वपूर्ण है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट पात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर रद्द करने के लिए एक स्पष्ट और सुव्यवस्थित कानूनी प्रक्रिया स्थापित करना चाहता है। न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने संकेत दिया कि अदालत ऐसी व्यवस्था बनाने में मदद कर सकती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक कार्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारियों और प्रदर्शनों के दौरान हिंसा करने वाले आपराधिक तत्वों दोनों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

क्यों मायने रखता है

यह फैसला शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और आपराधिक इरादे वाले लोगों के बीच अंतर करता है, जिससे भारत भर में हजारों मामलों पर असर पड़ेगा। यह भविष्य में विरोध-संबंधित मामलों को कैसे संभाला जाएगा, इसके लिए एक मिसाल कायम करता है।

मुख्य तथ्य

  • Court Ruling: Supreme Court allows states to close or withdraw cases against student protesters without serious criminal records.
  • Exclusion: Individuals with serious criminal charges (e.g., rape, murder) or those who committed violence during protests will not get relief.
  • Definition of 'Criminal Background': Does not include minor offenses or prior political protest involvement.
  • Government Stance: Central government is committed to dropping cases against students, exploring legal avenues.
  • Next Hearing: August 18, 2026, to streamline the process of quashing FIRs.

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