यूपी: भदोही फिर से होगा संत रविदास नगर
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की है कि भदोही जिले का नाम बदलकर फिर से संत रविदास नगर रखा जाएगा। यह संत गुरु रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर किया जा रहा है। वाराणसी में भाजपा के दलित आउटरीच अभियान के तहत की गई यह घोषणा, समाजवादी पार्टी सरकार द्वारा 2014 में लिए गए एक फैसले को पलटती है। आदित्यनाथ ने विपक्ष की आलोचना करते हुए उन्हें बाबर और औरंगजेब जैसे शासकों से जोड़ा और उन पर समाज को बांटने का आरोप लगाया। उन्होंने सामाजिक सुधारकों के सम्मान में अन्य नामकरण पहलों और कल्याणकारी योजनाओं की भी घोषणा की, जिसमें मूर्तियों के लिए सुरक्षात्मक चंदवा और नए आवासीय विद्यालय शामिल हैं।
AI सारांश
3 bulletsभदोही renamed संत रविदास नगर
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की है कि भदोhi जिले को एक बार फिर संत रविदास नगर के नाम से जाना जाएगा। यह निर्णय समाजवादी पार्टी सरकार द्वारा 2014 के कदम को पलटता है, जिसने संत रविदास नगर का नाम बदलकर भदोही कर दिया था। यह घोषणा प्रधानमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में की गई।
आलोचना के बीच दलित आउटरीच पहल
यह नामकरण भाजपा के 'समरसता संकल्प अभियान' का हिस्सा है, जो 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले शुरू की गई एक दलित आउटरीच पहल है। आदित्यनाथ ने इस अवसर का उपयोग विपक्ष की आलोचना करने के लिए किया, उन पर बाबर और औरंगजेब जैसे ऐतिहासिक शख्सियतों से जोड़कर समाज को बांटने का आरोप लगाया। उन्होंने इसकी तुलना सामाजिक सुधारकों का सम्मान करके समाज को एकजुट करने के सरकार के दृष्टिकोण से की।
सामाजिक सुधारकों का सम्मान
मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि संत रविदास जैसे महान सामाजिक सुधारकों के नाम पर सार्वजनिक संस्थानों और स्थानों का नामकरण समाज को एकजुट करने का एक तरीका है। उन्होंने जालंधर में संत रविदास के नाम पर हवाई अड्डे और अयोध्या अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखे जाने जैसे उदाहरण दिए। उन्होंने माता शबरी और निषाद राज के नाम पर अयोध्या में सुविधाओं का भी उल्लेख किया।
कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा
आदित्यनाथ ने नाम बदलने के साथ-साथ कई कल्याणकारी पहलों की भी घोषणा की। इनमें सार्वजनिक स्थानों पर संत रविदास, महर्षि वाल्मीकि और बी.आर. अंबेडकर की मूर्तियों पर सुरक्षात्मक चंदवा स्थापित करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, सरकार अंबेडकर को समर्पित पार्क विकसित करने और प्रत्येक जिले में संत रविदास को समर्पित एक आवासीय विद्यालय स्थापित करने की योजना बना रही है।
आगे की परियोजनाएं और बुनियादी ढाँचा
मुख्यमंत्री ने आगे की विकास योजनाओं का भी विस्तार से बताया, जिसमें मलिन बस्तियों के लिए योजनाओं को संत रविदास और महर्षि वाल्मीकि को समर्पित करना शामिल है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि राज्य में पुनर्जीवित चमड़ा पार्कों का नाम संत रविदास के नाम पर रखा जाएगा, जबकि आगामी कपड़ा परियोजनाएं संत कबीर दास को समर्पित होंगी। इन पहलों का उद्देश्य सामाजिक सुधारकों की विरासत को आधुनिक विकास में एकीकृत करना है।
क्यों मायने रखता है
भदोही का नाम बदलकर संत रविदास नगर करना भाजपा का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और सांस्कृतिक कदम है, जो 2027 के यूपी विधानसभा चुनावों से पहले उसके दलित आउटरीच प्रयासों के अनुरूप है। यह मुख्यमंत्री आदित्यनाथ द्वारा व्यक्त ऐतिहासिक विरासत और सामाजिक एकता पर एक व्यापक वैचारिक लड़ाई को भी दर्शाता है।
मुख्य तथ्य
- •District Renaming: Bhadohi to be renamed Sant Ravidas Nagar
- •Occasion: Sant Guru Ravidas' 650th birth anniversary
- •Political Context: BJP's Dalit outreach campaign 'Samrasta Sankalp Abhiyan'
- •Previous Renaming: Renamed Bhadohi from Sant Ravidas Nagar in 2014 by Samajwadi Party
- •Announcement Location: Varanasi
- •Chief Minister: Yogi Adityanath
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