जैसलमेर: ग्रामीणों ने श्रमदान से चांदसर नाड़ी को पुनर्जीवित किया
राजस्थान पत्रिका के अमृतम् जलम् अभियान से प्रेरित होकर, जैसलमेर के लाठी क्षेत्र के केरालिया गांव के ग्रामीणों ने मिलकर चांदसर नाड़ी (तालाब) को पुनर्जीवित करने के लिए एक विशाल सामुदायिक श्रमदान किया। स्थानीय प्रतिनिधियों, समाजसेवियों और निवासियों ने मिलकर नाड़ी के पायतन से रेत हटाई और उसकी पाल को मजबूत किया। इस पहल से जल निकाय की क्षमता में वृद्धि हुई और जल संरक्षण एक जन-अभियान बन गया। यह नाड़ी कभी पानी का एक प्रमुख स्रोत थी, जो उपेक्षा के कारण सूख गई थी, और इस सामूहिक प्रयास का उद्देश्य इसे आगामी मानसून के लिए बहाल करना, साथ ही पर्यावरण जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना है।
AI सारांश
3 bulletsजल संरक्षण के लिए सामुदायिक एकजुटता
जैसलमेर के केरालिया गांव के निवासियों ने, राजस्थान पत्रिका के अमृतम् जलम् अभियान से प्रेरित होकर, जल संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण सामुदायिक प्रयास किया। उनका लक्ष्य पारंपरिक जल स्रोत, चांदसर नाड़ी को पुनर्जीवित करना था, जो समय के साथ खराब हो गया था।
सहयोगात्मक पुनरुद्धार के प्रयास
लगभग दो घंटे तक चले श्रमदान में नाड़ी के तल से जमा रेत को हटाने और उसकी पाल को मजबूत करने का काम शामिल था। इस सहयोगात्मक कार्रवाई का उद्देश्य नाड़ी की जलधारण क्षमता को बढ़ाना और उसे आगामी मानसून के लिए तैयार करना था।
पूर्व महत्व और वर्तमान स्थिति
चांदसर नाड़ी कभी आस-पास के घरों के लिए पेयजल का एक महत्वपूर्ण स्रोत थी। हालांकि, लंबे समय तक नियमित रखरखाव की कमी के कारण, इसके जलग्रहण क्षेत्र में बड़ी मात्रा में रेत जमा हो गई, जिससे इसकी जल भंडारण क्षमता गंभीर रूप से कम हो गई।
नेतृत्व और प्रतिभागियों की भागीदारी
इस पहल में भाजपा ओबीसी मोर्चा सांकड़ा मंडल के आईटी संयोजक पर्वतराम सुथार और कामधेनु सेना के केरिलिया ग्राम प्रभारी रणवीर सिंह भाटी सहित विभिन्नA समुदाय के सदस्यों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। समाजसेवी शेर सिंह भाटी और आईदानसिंह भाटी ने भी ऐसे अभियानों में जनभागीदारी के महत्व पर जोर दिया और सभी प्रतिभागियों को उनकी प्रतिबद्धता के लिए धन्यवाद दिया।
व्यापक प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं
इस सामूहिक प्रयास ने नाड़ी के भौतिक जीर्णोद्धार को तो शुरू किया ही है, साथ ही ग्रामीणों में पर्यावरणीय जिम्मेदारी की एक नई भावना भी जगाई है। यह इस बात का एक आदर्श उदाहरण है कि समुदाय की कार्रवाई के माध्यम से पारंपरिक जल स्रोतों को कैसे पुनर्जीवित किया जा सकता है, जिससे भविष्य के लिए बेहतर जल सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
क्यों मायने रखता है
चांदसर नाड़ी का पुनरुद्धार पर्यावरणीय मुद्दों को संबोधित करने में सामुदायिक कार्रवाई की शक्ति को दर्शाता है और जनभागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण के लिए एक सफल मॉडल को उजागर करता है।
मुख्य तथ्य
- •Location: Keralia Village, Lathi area, Jaisalmer, Rajasthan
- •Initiative: Amritam Jalam campaign by Rajasthan Patrika
- •Activity: Community shramdaan (voluntary labor) to revive Chandasar Nadi
- •Participants: Villagers, local representatives, social workers
- •Duration of Shramdaan: Approximately two hours
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