कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस्कॉन मिड डे मील अनुबंध पर हलफनामा मांगा
कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को कोलकाता के स्कूलों में पीएम-पोषण (मध्याह्न भोजन) योजना के लिए इस्कॉन को शामिल करने के प्रस्ताव के संबंध में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान आया, जिसमें सरकार के इस कदम को चुनौती दी गई थी। आलोचकों का तर्क है कि इससे अंडों का वितरण बंद हो जाएगा और स्वयं सहायता समूह के सदस्यों की आजीविका प्रभावित होगी। राज्य सरकार ने दावा किया कि अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है, जबकि याचिकाकर्ता ने मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री द्वारा इस प्रस्ताव के संबंध में की गई घोषणाओं का हवाला दिया। कोर्ट ने मामले को चार सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया।
AI सारांश
3 bulletsहाई कोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण
कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को कोलकाता के स्कूलों के लिए पीएम-पोषण मध्याह्न भोजन कार्यक्रम में इस्कॉन को शामिल करने की अपनी योजना के संबंध में एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश राज्य के प्रस्ताव को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) की कार्यवाही के दौरान जारी किया गया। कोर्ट ने राज्य को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।
विवादास्पद प्रस्ताव का विवरण
मध्याह्न भोजन योजना के लिए इस्कॉन को शामिल करने की घोषणा वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने 22 जून को राज्य बजट में की थी। इस कदम पर विपक्षी दलों, विशेषकर तृणमूल कांग्रेस की ओर से काफी आलोचना हुई है, जिन्होंने आरोप लगाया है कि यह अंडे को भोजन से हटाकर शाकाहार थोपने का एक प्रयास है।
याचिकाकर्ता के तर्क और चिंताएँ
एडवोकेट सिरसन्या बंद्योपाध्याय ने जनहित याचिका दायर की, जिसमें तर्क दिया गया कि प्रस्ताव छात्रों को अंडे से वंचित करेगा और वर्तमान में भोजन तैयार करने वाले हजारों स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) सदस्यों की आजीविका को खतरे में डालेगा। याचिकाकर्ता ने रेखांकित किया कि योजना का उद्देश्य केवल पौष्टिक भोजन प्रदान करना नहीं है, बल्कि एसएचजी के माध्यम से महिलाओं के लिए रोजगार भी सृजित करना है।
राज्य सरकार का बचाव
अदालत में, एडवोकेट जनरल सुरोजित नाथ मित्र ने कहा कि कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे याचिका समय से पहले हो गई है। उन्होंने यह भी बताया कि पीएम-पोषण योजना शहरी क्षेत्रों में जगह की कमी वाले केंद्रीयकृत रसोईघरों की अनुमति देती है, जो सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत काम कर सकते हैं।
विपक्ष के जवाबी तर्क
याचिकाकर्ता के वकील, कल्याण बंद्योपाध्याय ने राज्य के दावे का खंडन करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री दोनों ने पहले ही प्रस्ताव की घोषणा कर दी थी। उन्होंने तर्क दिया कि राज्य विधानसभा में ये बयान आधिकारिक रिकॉर्ड के रूप में कार्य करते हैं और राज्य के वर्तमान रुख से विवादित नहीं हो सकते हैं।
क्यों मायने रखता है
यह मामला मध्याह्न भोजन जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए सरकारी अनुबंधों, धार्मिक संगठनों की भूमिका और पोषण सामग्री तथा स्थानीय रोजगार के बारे में चिंताओं पर चल रही बहस को उजागर करता है।
मुख्य तथ्य
- •Court Directive: Calcutta High Court ordered West Bengal government to file an affidavit.
- •Scheme: PM-POSHAN (midday meal) scheme in Kolkata schools.
- •Proposed Partner: ISKCON (International Society for Krishna Consciousness).
- •Petitioner's Concern: Potential discontinuation of eggs and loss of livelihood for SHG members.
- •Government Stance: No decision has been taken yet; petition is premature.
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