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PokhranJaisalmerBus RobberyCourt Verdict

पोकरण बस लूट: 12 साल बाद 4 दोषियों को 3 साल कैद

Briovo· 30 Jun 2026, 02:34 pm IST

जैसलमेर के पोकरण में 12 साल पहले हुई एक बस लूटपाट, तोड़फोड़ और मारपीट की घटना में चार आरोपियों को तीन साल के कठोर कारावास और प्रत्येक पर ₹30,000 के जुर्माने की सज़ा सुनाई गई है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नवीन रत्तू ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने जुर्माने की राशि परिवादी मांगीलाल बिश्नोई को मुआवज़े के तौर पर देने का भी आदेश दिया। यह घटना 29 जुलाई, 2014 को हुई थी, जब आरोपियों ने एक लोक परिवहन बस को रोका था, यात्रियों को लूटा और वाहन में तोड़फोड़ की थी।

AI सारांश

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लंबी कानूनी लड़ाई का अंत

12 साल तक चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, पोकरण में बस लूट और तोड़फोड़ से जुड़े एक मामले में चार लोगों को दोषी ठहराया और सज़ा सुनाई गई है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नवीन रत्तू ने फैसला सुनाया, जो समय बीतने के बावजूद न्याय के प्रति अदालत की प्रतिबद्धता पर जोर देता है।

घटना का विवरण

यह घटना 29 जुलाई, 2014 की है, जब परिवादी मांगीलाल बिश्नोई ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह जिस लोक परिवहन बस को चला रहे थे, उसे जालू वाला में रोका गया था। इसके बाद आरोपियों ने बस में घुस कर लूटपाट, तोड़फोड़ और मारपीट को अंजाम दिया था।

अदालत की कार्यवाही और साक्ष्य

पुलिस ने अपनी जांच पूरी करने के बाद आरोपियों के खिलाफ आईपीसी और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र दायर किया। सुनवाई के दौरान, अभियोजन पक्ष ने अपने मामले के समर्थन में 19 गवाहों की गवाही और 26 दस्तावेजी सबूत पेश किए।

दोषी और सज़ा

प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सत्याया निवासी जब्बार सिंह, शिवदान सिंह, देवी सिंह और आशु सिंह उर्फ अशोक सिंह को दोषी पाया। प्रत्येक दोषी को तीन साल के कठोर कारावास की सज़ा सुनाई गई और ₹30,000 का जुर्माना भरने का आदेश दिया गया, जो मुआवज़े के तौर पर परिवादी को दिया जाएगा।

क्यों मायने रखता है

एक लंबे समय से लंबित मामले में आखिरकार न्याय मिला है, जो पिछले अपराधों को संबोधित करने और अपराधियों को जवाबदेह ठहराने में न्यायपालिका की दृढ़ता को उजागर करता है।

मुख्य तथ्य

  • Incident Date: July 29, 2014
  • Conviction Date: February 2024 (12 years later)
  • Number of Convicts: 4
  • Sentence: 3 years rigorous imprisonment each
  • Fine Amount: ₹30,000 each

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