अयोध्या राम मंदिर दान घोटाला: 8 गिरफ्तार
अयोध्या के राम मंदिर में दान के कथित गबन के संबंध में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपियों से ₹79.85 लाख बरामद किए हैं, जो कथित तौर पर नकदी और कीमती सामान गिनने में शामिल थे। ये गिरफ्तारियाँ उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एक विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद हुई हैं। मामले में चोरी, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप शामिल हैं। विपक्ष ने FIR पर सवाल उठाया है, आरोप लगाया है कि मंदिर ट्रस्ट से जुड़े प्रमुख हस्तियों को नामजद नहीं किया गया है, जबकि मुख्यमंत्री ने कहा है कि कार्रवाई SIT रिपोर्ट पर आधारित है।
AI सारांश
3 bulletsदान गबन के आरोप
अयोध्या के राम मंदिर में दान के कथित गबन के संबंध में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ये गिरफ्तारियाँ एक विशेष जांच दल (SIT) द्वारा मंदिर परिसर में दान पेटियों से धन के गबन के दावों की जांच के बाद हुई हैं। आरोपी कथित तौर पर श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए नकदी और कीमती सामानों की गिनती की प्रक्रिया में शामिल थे।
पुलिस हिरासत और बरामदगी
गिरफ्तार व्यक्तियों से कुल ₹79.85 लाख बरामद किए गए हैं। एक अदालत ने सभी आठ आरोपियों को 29 जून 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है, ताकि जांचकर्ता उनसे पूछताछ जारी रख सकें। उन्हें बाद में भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों से निपटने वाली एक विशेष अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा।
SIT जांच और FIR
प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी, और SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट की सिफारिशों का पालन किया गया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने 7 जून 2026 को कथित गबन को लेकर विवाद सामने आने के बाद, ट्रस्ट के अनुरोध पर 13 जून 2026 को SIT का गठन किया था।
आरोप और आरोपियों का विवरण
आरोपियों में लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रामशंकर यादव उर्फ टिन्ना, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और करुणेश पांडे शामिल हैं, जिन पर भारतीय न्याय संहिता के तहत चोरी, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए हैं। सुभाष चंद्र श्रीवास्तव कथित तौर पर नकदी-गिनती कर्मचारियों के प्रभारी थे।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और मुख्यमंत्री का बयान
उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों ने सवाल उठाया है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय सहित प्रमुख व्यक्तियों को FIR में क्यों नामजद नहीं किया गया, और भाजपा सरकार पर उन्हें बचाने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जवाब में कहा कि सरकार की कार्रवाई पूरी तरह से SIT रिपोर्ट पर आधारित है, और उन्होंने इसकी प्रस्तुति के बाद तत्काल कार्रवाई पर जोर दिया।
क्यों मायने रखता है
राम मंदिर के लिए दान के कथित गबन में, जो अत्यधिक धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व का स्थल है, जनता की गहरी रुचि है, जिससे धार्मिक ट्रस्टों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही के बारे में सवाल उठते हैं। SIT की संलिप्तता और उसके बाद हुई गिरफ्तारियां आरोपों की गंभीरता और संभावित राजनीतिक नतीजों को उजागर करती हैं।
मुख्य तथ्य
- •Arrests Made: Eight individuals arrested
- •Amount Recovered: ₹79.85 lakh recovered
- •Investigation Agency: Special Investigation Team (SIT) formed by UP government
- •Charges Filed: Theft, criminal breach of trust, cheating, criminal conspiracy
- •Custody Period: Police custody till June 29, 2026
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