असम में हेरिटेज स्थलों के पास भूमि बिक्री नियमों में संशोधन
असम विधानसभा ने एक संशोधन विधेयक पारित किया है, जिसके तहत 250 साल से अधिक पुराने धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के 5 किलोमीटर के दायरे में भूमि खरीद के नियमों में बदलाव किया गया है। अब इन हेरिटेज क्षेत्रों में केवल मूल निवासी, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और स्थानीय समुदाय के लोग ही जमीन खरीद सकेंगे। 2006 से तीन पीढ़ियों से रह रहे परिवारों को बिना पट्टे के भी वहां रहने की अनुमति होगी। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इसे राज्य का "सबसे धर्मनिरपेक्ष" कानून बताया है, और इसके गैर-धार्मिक अनुप्रयोग तथा अनधिकृत कब्जे से ऐतिहासिक संस्थानों की सुरक्षा पर जोर दिया है, यह सुनिश्चित करते हुए कि मौजूदा कानूनी भूमि मालिकों पर नए कानून का कोई प्रभाव न पड़े।
AI सारांश
3 bulletsनया भूमि कानून लागू
असम विधानसभा ने असम भूमि और राजस्व विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया है। यह महत्वपूर्ण कानून 250 साल से अधिक पुराने धार्मिक और ऐतिहासिक संस्थानों के 5 किलोमीटर के दायरे में भूमि खरीद और स्वामित्व नियमों को संशोधित करता है।
कौन खरीद सकता है जमीन?
नए कानून के तहत, इन संरक्षित क्षेत्रों में केवल 'मूल निवासी', अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और स्थानीय आदिवासी समुदायों को ही जमीन खरीदने की अनुमति होगी। 'मूल निवासी' उसे माना जाएगा जो 1 जनवरी 2006 तक अपने परिवार के साथ तीन पीढ़ियों (लगभग 75 साल) से उस इलाके में रह रहा हो।
मौजूदा निवासियों के लिए सुरक्षा
जो परिवार 2006 तक तीन पीढ़ियों से इन क्षेत्रों में रह रहे हैं, उन्हें बिना किसी औपचारिक भूमि पट्टे के भी वहां रहने की अनुमति दी जाएगी। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने जोर देकर कहा कि यह नियम गैर-धार्मिक है और सभी समुदायों पर समान रूप से लागू होता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि मौजूदा कानूनी भूमि मालिकों पर इसका कोई प्रभाव न पड़े।
अनधिकृत कब्जेदारों की बेदखली
विधेयक में यह प्रावधान है कि इन संरक्षित क्षेत्रों में बिना उचितG अनुमति के भूमि पर कब्जा करने वाले व्यक्तियों को बेदखल किया जा सकता है। हालांकि, यह खंड अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और स्थानीय समुदायों के सदस्यों पर लागू नहीं होता है, जिससे उन्हें कुछ सुरक्षा मिलती है।
मुख्यमंत्री ने की 'धर्मनिरपेक्ष' कानून की प्रशंसा
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने नए कानून को राज्य का "सबसे धर्मनिरपेक्ष" कानून बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नियम सभी 250 साल पुराने धार्मिक स्थलों पर लागू होता है, चाहे वह किसी भी धर्म का हो, और वैध भूमि दस्तावेजों वाले लोगों पर इसका पूर्वव्यापी प्रभाव नहीं पड़ेगा।
क्यों मायने रखता है
यह कानून असम की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत की रक्षा के लिए प्राचीन स्थलों के आसपास भूमि स्वामित्व को विनियमित करने का लक्ष्य रखता है। इसका उद्देश्य सांस्कृतिक अखंडता को बनाए रखना और अनधिकृत अतिक्रमण को रोकना है, साथ ही लंबे समय से रहने वाले निवासियों के अधिकारों को सुनिश्चित करना है।
मुख्य तथ्य
- •Bill Name: Assam Land and Revenue Regulation (Amendment) Bill, 2026
- •Affected Area: 5 km radius around 250+ year old religious/historical sites
- •Eligible Buyers: Indigenous residents, SC, ST, local communities
- •Residential Exemption: Families residing for 3 generations since 2006
- •Government Statement: Assam CM called it state's 'most secular' law
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