जनरल द्विवेदी सेवानिवृत्त, संयुक्त युद्ध के भविष्य पर दिया जोर
जनरल उपेंद्र द्विवेदी 30वें सेना प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त हुए और जनरल धीरज सेठ को कमान सौंपी। द्विवेदी ने जोर देकर कहा कि भविष्य के युद्ध "संयुक्त, एकीकृत और थिएटर-उन्मुख" होंगे, जिसमें तीनों सेवाओं के बीच अधिक समन्वय की आवश्यकता होगी। उन्होंने अपने चार दशक के करियर पर प्रकाश डालते हुए आभार और गर्व व्यक्त किया। द्विवेदी ने उत्तरी सीमा पर "ऑपरेशन स्नो लेपर्ड" और पश्चिमी मोर्चे पर "ऑपरेशन सिंदूर" का हवाला देते हुए सेना की उच्च परिचालन तत्परता पर प्रकाश डाला, जिसने अंतर-सेवा समन्वय बढ़ाया। रक्षा मंत्रालय ने उनके "परिवर्तन के दशक" के दौरान बल पुनर्गठन और प्रौद्योगिकी अवशोषण में उनके योगदान की सराहना की।
AI सारांश
3 bulletsकमान परिवर्तन समारोह
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को 30वें सेना प्रमुख के पद से आधिकारिक तौर पर सेवानिवृत्ति ली। उन्होंने जनरल धीरज सेठ को कमान सौंपी, जो अब 31वें सेना प्रमुख का पदभार संभालेंगे। कमान परिवर्तन का औपचारिक समारोह नई दिल्ली में साउथ ब्लॉक के लॉन में हुआ।
एक विशिष्ट करियर पर विचार
कार्यभार सौंपने से पहले, जनरल द्विवेदी ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने अपने चार दशक के सैन्य करियर पर प्रकाश डालते हुए गहरा आभार, गर्व और संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि चालीस से अधिक वर्षों तक भारतीय सेना की सेवा करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य था।
भविष्य का युद्ध: संयुक्त और एकीकृत
जनरल द्विवेदी ने जोर देकर कहा कि भविष्य के संघर्षों में तीनों सेवाओं के बीच अधिक समन्वय की आवश्यकता होगी, जिसे उन्होंने "संयुक्त, एकीकृत और थिएटर-उन्मुख" युद्ध कहा। उन्होंने सशस्त्र बलों के लिए एक स्पष्ट दिशा निर्धारित की: "एक साथ देखना, एक साथ निर्णय लेना और एक साथ कार्रवाई करना।" यह दृष्टिकोण उभरती सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए महत्वपूर्ण है।
परिचालन तैयारी और प्रमुख अभियान
अपने पूरे कार्यकाल के दौरान, जनरल द्विवेदी ने सुनिश्चित किया कि सेना उच्च स्तर की परिचालन तैयारी बनाए रखे। उन्होंने उत्तरी सीमा पर "ऑपरेशन स्नो लेपर्ड" पर प्रकाश डाला, जिसमें मजबूत और सतर्क तैनाती पर जोर दिया गया। पश्चिमी मोर्चे पर, उन्होंने मई 2025 के पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद शुरू किए गए "ऑपरेशन सिंदूर" को सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच बढ़े हुए समन्वय का एक प्रमुख उदाहरण बताया।
विरासत और उत्तराधिकारी का दृष्टिकोण
रक्षा मंत्रालय ने "ऑपरेशन सिंदूर" को जनरल द्विवेदी के कार्यकाल का एक निर्णायक क्षण बताया, जिसमें बल पुनर्गठन, प्रौद्योगिकी अपनाने और मानव संसाधन प्रबंधन में उनके सुधारों को स्वीकार किया गया। जनरल द्विवेदी ने अपने उत्तराधिकारी, जनरल धीरज सेठ पर पूरा भरोसा व्यक्त किया, उनकी एक अनुभवी सैनिक और सक्षम नेता के रूप में प्रशंसा की।
क्यों मायने रखता है
सेना प्रमुख की सेवानिवृत्ति और एक नए प्रमुख की नियुक्ति भारत की रक्षा रणनीति के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है। भविष्य के युद्ध पर जनरल द्विवेदी की अंतर्दृष्टि, विशेष रूप से संयुक्त, एकीकृत और थिएटर-उन्मुख संचालन पर जोर, भारतीय सशस्त्र बलों के लिए उभरती चुनौतियों और आवश्यक अनुकूलन पर प्रकाश डालती है।
मुख्य तथ्य
- •Outgoing COAS: General Upendra Dwivedi (30th COAS)
- •Incoming COAS: General Dhiraj Seth (31st COAS)
- •Key message on future wars: Joint, integrated, and theatre-oriented
- •Significant operations mentioned: Operation Snow Leopard (northern border), Operation Sindoor (western front)
- •Tenure highlight: Army's 'Decade of Transformation'
- •Retirement Date: Tuesday
क्या यह मददगार था?
Reader pulse
0 votesGenerate a 5-question quiz from this article.
चर्चा
Discussion (0)
Loading…