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आईएमडी ने भारत के लिए जुलाई में सामान्य से कम बारिश का अनुमान लगाया

Briovo· 30 Jun 2026, 09:54 pm IST
आईएमडी ने भारत के लिए जुलाई में सामान्य से कम बारिश का अनुमान लगाया

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने जुलाई में सामान्य से कम बारिश (दीर्घकालिक औसत के 94% से भी कम) का अनुमान लगाया है। यह एक दशक से अधिक समय में भारत के सबसे सूखे जून के बाद आया है, जिसमें बारिश LPA से 39.8% कम रही। आईएमडी ने अल नीनो की स्थिति के कारण 2026 के लिए दक्षिण-पश्चिम मानसून के समग्र पूर्वानुमान को LPA के 90% तक संशोधित किया है। इससे गर्मी का तनाव बढ़ सकता है, मिट्टी की नमी प्रभावित हो सकती है और वर्षा-आधारित कृषि प्रभावित हो सकती है। अर्थशास्त्रियों ने खरीफ की बुआई में संभावित देरी, कम फसल पैदावार और ग्रामीण मांग में कमी की चेतावनी दी है, जिससे अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।

AI सारांश

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सामान्य से कम मॉनसून की उम्मीद

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अपना नवीनतम मासिक पूर्वानुमान जारी किया है, जिसमें जुलाई के लिए सामान्य से कम बारिश, विशेष रूप से दीर्घकालिक औसत (LPA) के 94% से कम बारिश की भविष्यवाणी की गई है। यह पूर्वानुमान एक दशक से अधिक समय में भारत के सबसे सूखे जून के बाद आया है, जो 1901 में रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से पांचवां सबसे सूखा जून भी था। जून के दौरान, देश में 165.3 मिमी के सामान्य के मुकाबले केवल 99.5 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो एक महत्वपूर्ण कमी को दर्शाता है।

अल नीनो पूर्वानुमानों को प्रभावित कर रहा है

प्रचलित अल नीनो स्थितियों का हवाला देते हुए, आईएमडी ने 2026 के लिए दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के अपने पूर्वानुमान को पहले के 92% के अनुमान से घटाकर LPA के 90% कर दिया था। जून-सितंबर मॉनसून सीज़न के लिए LPA, जो 1971-2020 के जलवायु रिकॉर्ड पर आधारित है, 87 सेमी है। मजबूत होता अल नीनो अनुमानित बारिश की कमी और गर्म परिस्थितियों में योगदान देने वाला एक प्रमुख कारक है।

कृषि और अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव

सामान्य से कम बारिश और उच्च तापमान के संयोजन से गर्मी का तनाव बढ़ने की उम्मीद है और यह मिट्टी की नमी को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है, खासकर वर्षा-आधारित कृषि क्षेत्रों में। कृषि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इससे किसानों के लिए खेती की लागत बढ़ सकती है, जिससे खरीफ के मौसम में कम पानी वाली फसलों की ओर बदलाव हो सकता है। कमजोर मॉनसून आमतौर पर ग्रामीण मांग को कम करता है, जिससे दोपहिया वाहनों, ट्रैक्टरों और पैकेज्ड उपभोक्ता वस्तुओं जैसे क्षेत्रों पर असर पड़ता है।

महंगाई और विकास पर आरबीआई की चिंताएँ

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपने आर्थिक अनुमानों में मॉनसून की अनिश्चितताओं को शामिल किया है। 2026-27 के लिए CPI-आधारित मुद्रास्फीति को 5.1% पर अनुमानित करते हुए, इसने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधाओं और मॉनसून परिवर्तनशीलता से उत्पन्न होने वाले जोखिमों के बारे में चेतावनी दी। आरबीआई ने FY27 के लिए 6.6% की वास्तविक GDP वृद्धि का भी अनुमान लगाया, जिसमें बताया गया कि मौसम संबंधी झटके कृषि गतिविधि, ग्रामीण मांग और मुद्रास्फीति को बाधित कर सकते हैं। भारत की खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में 3.48% से बढ़कर मई में 3.93% हो गई।

क्यों मायने रखता है

सामान्य से कम मॉनसून भारत की कृषि को सीधे प्रभावित करता है, जो मौसमी बारिश पर बहुत अधिक निर्भर है। इससे किसानों के लिए बढ़ती लागत, संभावित खाद्य मुद्रास्फीति और ग्रामीण मांग में मंदी सहित आर्थिक परिणाम हो सकते हैं, जिससे समग्र आर्थिक विकास और उपभोक्ता क्षेत्र प्रभावित होंगे।

मुख्य तथ्य

  • July Rainfall Forecast: Below 94% of Long-Period Average (LPA)
  • June 2024 Rainfall Anomaly: 39.8% below LPA
  • Overal Monsoon Forecast (2026): 90% of LPA
  • El Niño Conditions: Likely to strengthen
  • Retail Inflation May 2024: 3.93%

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