भाजपा-जद(एस) ने होरत्ती का इस्तीफा खारिज करने के लिए राज्यपाल से की अपील
भाजपा-जद(एस) के एक प्रतिनिधिमंडल ने कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात की और विधान परिषद के अध्यक्ष बसवराज होरत्ती के इस्तीफे को अस्वीकार करने का आग्रह किया। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल के नेताओं, जिनमें डीके शिवकुमार और बीके हरिप्रसाद शामिल थे, ने "गुंडागर्दी" और गैरकानूनी तरीकों से होरत्ती पर इस्तीफा देने का दबाव डाला, जिससे विधायिका की स्वायत्तता कमजोर हुई। होरत्ती ने खुद कहा था कि कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें अविश्वास प्रस्ताव की धमकी देकर पद छोड़ने को कहा था। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से इसमें शामिल लोगों के खिलाफ संवैधानिक और कानूनी जांच शुरू करने और कानून का शासन बनाए रखने का अनुरोध किया। होरत्ती का इरादा मूल रूप से 14 अगस्त को इस्तीफा देने का था लेकिन कथित तौर पर उन्हें पहले ही मजबूर किया गया।
AI सारांश
3 bulletsविपक्ष ने लगाया जबरदस्ती का आरोप
भाजपा और जद(एस) के एक प्रतिनिधिमंडल ने कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात कर विधान परिषद अध्यक्ष बसवराज होरत्ती के इस्तीफे को खारिज करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल के नेताओं ने दबाव की रणनीति और "गुंडागर्दी" के माध्यम से होरत्ती को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया। विपक्ष का दावा है कि यह कृत्य विधायिका की स्वायत्तता और गरिमा को कमजोर करता है।
सत्ताधारी नेताओं पर आरोप
चालवादी नारायणस्वामी के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से केपीसीसी अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद, एमएलसी सलीम अहमद, एस रवि और डीके शिवकुमार का नाम लेते हुए उनके खिलाफ संवैधानिक और कानूनी जांच की मांग की। उन्होंने राज्यपाल को एक याचिका सौंपी जिसमें कहा गया कि सत्ताधारी दल के नेताओं ने "गुंडागर्दी" की तरह व्यवहार किया और जबरन तथा असंवैधानिक रूप से इस्तीफा प्राप्त किया। आरोप है कि होरत्ती के निजी सचिव को आधिकारिक लेटरहेड प्रदान करने का आदेश दिया गया था।
होरत्ती का घटनाक्रम का विवरण
बसवराज होरत्ती ने पुष्टि की कि उन्हें वास्तव में कांग्रेस नेतृत्व द्वारा पद छोड़ने के लिए कहा गया था, जिसमें नेताओं ने मना करने पर अविश्वास प्रस्ताव की धमकी दी थी। उन्होंने मूल रूप से 14 अगस्त को इस्तीफा देने की योजना बनाई थी, लेकिन सत्ताधारी दल के सदस्यों, जिनमें मुख्यमंत्री भी शामिल थे, ने कथित तौर पर 7 अगस्त को उन्हें उनके कक्ष में घेर लिया। होरत्ती ने राज्यपाल को पत्र लिखकर विस्तार से बताया कि उन्हें "स्थिति को शांत करने" के लिए तुरंत इस्तीफा देने के लिए कैसे दबाव डाला गया।
राज्यपाल के हस्तक्षेप की मांग
भाजपा और जद(एस) के नेताओं ने राज्यपाल गहलोत से राज्य के संवैधानिक प्रमुख के रूप में तुरंत हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। उन्होंने उनसे कथित असंवैधानिक इस्तीफे को खारिज करने, घटना की गहन जांच का आदेश देने और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का अनुरोध किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह घटना संविधान के मूल सिद्धांतों पर सीधा हमला है।
क्यों मायने रखता है
विधान परिषद अध्यक्ष के कथित जबरन इस्तीफे से विधायी निकायों की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अखंडता के बारे में गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं। यह घटना एक खतरनाक मिसाल कायम कर सकती है, जिससे कर्नाटक में राजनीतिक स्थिरता और संवैधानिक मूल्यों पर असर पड़ सकता है।
मुख्य तथ्य
- •Official who resigned: Basavaraj Horatti, Legislative Council Chairman
- •Parties making allegations: BJP and JD(S)
- •Official accused of coercion: DK Shivakumar, BK Hariprasad, Saleem Ahmed, S Ravi (ruling party leaders)
- •Date of delegation meeting: Sunday (before Aug 9, 2026)
- •Date Horatti resigned: Friday (before Aug 9, 2026)
- •Intended resignation date: August 14, 2026
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