मानसून ने पकड़ी धीमी रफ्तार: 23 जून तक तेज बारिश नहीं
दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के बावजूद, अगले एक सप्ताह तक इसके कमजोर रहने की उम्मीद है, जिससे 23 जून से पहले भारी बारिश की संभावना नहीं है. बारिश लाने वाला वायुमंडलीय सिस्टम कमजोर होने के कारण ऐसा होगा. भले ही मानसून तकनीकी रूप से अधिक क्षेत्रों को कवर करेगा, लेकिन व्यापक भारी बारिश की संभावना कम है. दक्षिण भारत और पूर्वी घाट के कुछ हिस्सों में स्थानीय आंधी-तूफान से कुछ राहत मिलेगी. 22-28 जून के बीच मानसून की गतिविधि में उल्लेखनीय वृद्धि होने का अनुमान है, और 29 जून से 5 जुलाई तक इसकी पूरी तीव्रता खासकर कोंकण तट और दक्षिणी केरल के पश्चिमी घाटों पर देखने को मिलेगी. किसान और मौसम वैज्ञानिक जून के अंतिम सप्ताह में बेहतर परिस्थितियों पर कड़ी नजर रख रहे हैं.
23 जून तक मानसून की धीमी रफ्तार
दक्षिण-पश्चिम मानसून, अपनी अग्रिम प्रगति के बावजूद, अगले कम से कम एक सप्ताह तक कमजोर रहेगा. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का अनुमान है कि 23 जून से पहले देश भर में कोई खास भारी बारिश नहीं होगी. यह लंबी खामोशी मुख्य रूप से मानसून की बारिश लाने वाले वायुमंडलीय सिस्टम के कमजोर होने के कारण है.
तकनीकी प्रगति बनाम सक्रिय बारिश
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून की आगे की चाल उसकी सक्रिय वर्षा अवस्था से अलग है. जबकि मानसून तकनीकी रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ रहा है, भारी बारिश के लिए महत्वपूर्ण वायुमंडलीय सिस्टम अनुपस्थित हैं. इसका मतलब है कि भौगोलिक कवरेज बढ़ सकती है, लेकिन तुरंत महत्वपूर्ण वर्षा नहीं होगी.
स्थानीय आंधी-तूफान से अस्थायी राहत
जब तक मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं हो जाता, तब तक कई क्षेत्र गर्मी से राहत के लिए स्थानीय आंधी-तूफान पर निर्भर रहेंगे. ये आंधी-तूफान मुख्य रूप से कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु के सीमावर्ती क्षेत्रों और पूर्वी घाट में अपेक्षित हैं. ये स्थानीय घटनाएं तेज हवाएं, बिजली और कुछ जगहों पर मध्यम से भारी बारिश ला सकती हैं.
22 जून के बाद मानसून में सुधार
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग जून के उत्तरार्ध में इस सूखे दौर के धीरे-धीरे समाप्त होने की उम्मीद कर रहा है. 22 जून से 28 जून के बीच तटीय केरल, कर्नाटक के अंदरूनी इलाकों, आंध्र प्रदेश-कर्नाटक सीमा और मुंबई की ओर जाने वाले घाटों में बारिश की गतिविधि में उल्लेखनीय वृद्धि होने का अनुमान है. 29 जून से 5 जुलाई तक पूर्ण तीव्रता के साथ मानसून की पूरी तरह से वापसी की उम्मीद है.
पश्चिमी और दक्षिणी तटों पर प्रारंभिक प्रभाव
मानसून की गतिविधि का पुनरुत्थान सबसे पहले कोंकण तट और दक्षिणी केरल के पश्चिमी घाटों पर तीव्रता से महसूस किया जाएगा, जहां भारी वर्षा का अनुमान है. उपग्रह की तस्वीरें वर्तमान में न्यूनतम बादल गतिविधि दिखा रही हैं, जो मौसम की धीमी शुरुआत का संकेत है. किसान और मौसम विशेषज्ञ जून के अंतिम सप्ताह से बेहतर परिस्थितियों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.
क्यों मायने रखता है
मानसून में देरी से भारत के कई हिस्सों में पानी की कमी बढ़ सकती है, जिससे कृषि और दैनिक जीवन प्रभावित होगा. मानसून आने के बाद बारिश में यह ठहराव एक असामान्य घटना है, जिससे आने वाले कृषि सीजन के लिए चिंताएं बढ़ गई हैं.
मुख्य तथ्य
- •Heavy Rain Delay: No heavy monsoon rain expected before June 23, 2026.
- •Monsoon Weakness Reason: Rain-bringing atmospheric system is unusually weak.
- •Current Relief: Only local thunderstorms (thunderstorm) in parts of South India and Eastern Ghats will provide relief.
- •Monsoon Pick-up: Activity to increase between June 22-28, with full intensity from June 29 to July 5.
- •Affected Regions (Initial): Konkan coast and Western Ghats of South Kerala to see heavy rains first.
- •Monsoon Advance: Monsoon is technically advancing towards Maharashtra, parts of Karnataka, Telangana, Odisha, Jharkhand, Bihar, and Chhattisgarh, but without heavy rain systems.
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