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संसद में पुलिस कार्रवाई को लेकर हंगामा; विरोध के बीच जन्म और मृत्यु विधेयक पारित

Briovo· 01 Aug 2026, 05:51 am IST
संसद में पुलिस कार्रवाई को लेकर हंगामा; विरोध के बीच जन्म और मृत्यु विधेयक पारित

भारतीय संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के सांसदों ने 20 जुलाई को "संसद चलो" मार्च पर पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, जिससे काफी व्यवधान उत्पन्न हुआ। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति और पुलिस कार्रवाई के लिए स्पष्टीकरण की मांग की। हंगामे के बीच, लोकसभा ने बिना चर्चा के जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कार्यवाही बाधित करने के लिए विपक्ष की आलोचना की, जबकि राज्यसभा में भी राम मंदिर के लिए कथित धन के दुरुपयोग और पेपर लीक को लेकर विरोध प्रदर्शन देखा गया। विपक्षी सदस्यों ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग पर सवाल उठाया।

AI सारांश

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पुलिस कार्रवाई पर संसदीय गतिरोध

लोकसभा और राज्यसभा दोनों में भारी हंगामा देखा गया क्योंकि विपक्षी सांसदों ने 20 जुलाई को 'संसद चलो' मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। विपक्ष ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की तत्काल उपस्थिति की मांग की ताकि वे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस द्वारा बल प्रयोग को संबोधित कर सकें और स्पष्टीकरण दे सकें। नारेबाजी की गई और संसदीय कार्यवाही बाधित हुई, जिससे दोनों सदनों को स्थगित करना पड़ा।

विरोध के बीच लोकसभा में अहम विधेयक पारित

विपक्षी सदस्यों के लगातार विरोध और नारेबाजी के बीच, लोकसभा ने ध्वनि मत से जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया। यह विधायी कार्रवाई विपक्षी बेंचों से किसी भी महत्वपूर्ण चर्चा के बिना हुई, जिस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रकाश डाला। इस विधेयक का उद्देश्य 1969 के अधिनियम में संशोधन करना है, जिससे विलंबित पंजीकरण और सख्त हो जाएंगे।

राज्यसभा में तीखी नोकझोंक

राज्यसभा में भी इसी तरह के व्यवधान देखने को मिले, जहां विपक्षी सांसदों ने विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को विभिन्न मुद्दों पर बोलने की अनुमति देने की मांग की। उपराष्ट्रपति और अध्यक्ष सी.पी. राधाकृष्णन ने विपक्ष के 'आपातकाल के मूड' की आलोचना की, लेकिन अंततः खड़गे को बोलने की अनुमति दी। हालांकि, उन्होंने नियम 267 के तहत आगे के नोटिसों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जब खड़गे ने राम मंदिर के लिए कथित धन के दुरुपयोग और पेपर लीक के बारे में चिंताएं उठाईं।

सरकार ने विपक्ष के आचरण की आलोचना की

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के लगातार व्यवधान पर अपनी नाराजगी व्यक्त की, कहा कि उनका जनादेश चर्चा के लिए था, न कि 'हंगामे' के लिए। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर 'सड़क-छाप' (घटिया) राजनीति में शामिल होने का आरोप लगाया, यह सुझाव देते हुए कि वे सार्थक बहस में शामिल होने के बजाय नाटक करने में अधिक रुचि रखते थे। ये बयान संसदीय गतिरोध से सरकार की निराशा को रेखांकित करते हैं।

गृह मंत्री के बयान की मांग

दोनों सदनों में विपक्ष की एक केंद्रीय मांग 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई, जिसमें कथित तौर पर पैलेट गन का इस्तेमाल भी शामिल है, के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की थी। खड़गे ने गुरुवार को राज्यसभा में शाह के इस्तीफे की भी मांग की थी। विपक्ष का कहना है कि पुलिस कार्रवाई के लिए जवाबदेही सर्वोपरि है और गृह मंत्री से सीधी प्रतिक्रिया की आवश्यकता है।

क्यों मायने रखता है

संसदीय व्यवधान पुलिस कार्रवाई, विधायी प्रक्रिया और जवाबदेही के मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते तनाव को उजागर करते हैं, जिससे भविष्य के विधायी कार्यों और सार्वजनिक विश्वास पर असर पड़ सकता है।

मुख्य तथ्य

  • Date of Police Crackdown: July 20
  • Bill Passed in Lok Sabha: Registration of Births and Deaths (Amendment) Bill, 2026
  • Key Demand by Opposition: Presence of Union Home Minister Amit Shah
  • Rajya Sabha Opposition Concerns: Alleged Ram Temple fund misappropriation & paper leaks
  • Bill's Amendment Requirement: Judicial magistrate order for registrations over two years delayed

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