रियल एस्टेट धोखाधड़ी: ED ने दिल्ली-गाजियाबाद में डेवलपर ठिकानों पर की छापेमारी
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली और गाजियाबाद में रियल एस्टेट डेवलपर्स और सहकारी समिति के अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी की। ED के लखनऊ जोनल कार्यालय ने पीएमएलए के तहत यह कार्रवाई शुरू की है। यह छापेमारी श्रेष्ठ प्रॉपबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड के संदीप सिंह और सेवा सुरक्षा सहकारी आवास समिति के अधिकारियों के खिलाफ चल रही जांच से जुड़ी है। इन पर भूमि के पुनर्विकास पर नए फ्लैट देने का वादा करके सोसायटी सदस्यों को धोखा देने और फिर अवैध रूप से भूमि और निर्मित संपत्तियों को तीसरे पक्ष को बेचने का आरोप है। ED मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों का पता लगाने के लिए वित्तीय लेनदेन की जांच कर रहा है।
AI सारांश
3 bulletsदिल्ली-NCR रियल एस्टेट सेक्टर पर ED की रेड
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली और गाजियाबाद में कई ठिकानों पर व्यापक छापेमारी की है। ये अभियान विशेष रूप से रियल एस्टेट विकास और सहकारी आवास समितियों से जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं को लक्षित कर रहे हैं। ED का लखनऊ जोनल कार्यालय धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के प्रावधानों के तहत इन कार्रवाइयों का नेतृत्व कर रहा है।
संपत्ति धोखाधड़ी की जांच
यह छापेमारी श्रेष्ठ प्रॉपबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर संदीप सिंह और सेवा सुरक्षा सहकारी आवास समिति के अधिकारियों के खिलाफ चल रही जांच से जुड़ी है। इन व्यक्तियों पर आवास समितियों के सदस्यों को धोखा देकर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने का आरोप है। आरोप है कि उन्होंने सदस्यों को भूमि पर अपने अधिकार छोड़ने के बदले नए फ्लैटों का वादा किया, लेकिन बाद में अवैध रूप से भूमि और विकसित संपत्तियों को तीसरे पक्ष को बेच दिया।
मनी लॉन्ड्रिंग पर ध्यान केंद्रित
ED के वर्तमान तलाशी अभियानों का प्राथमिक उद्देश्य इस धोखाधड़ी योजना से जुड़े वित्तीय लेनदेन के संबंध में ठोस सबूत जुटाना है। जांचकर्ता यह पता लगाने का काम कर रहे हैं कि इस बड़े पैमाने के धोखे से प्राप्त धन को कहाँ और कैसे लगाया गया है और इसे कैसे वैध किया गया है। एजेंसी का लक्ष्य धन के दुरुपयोग की पूरी श्रृंखला को उजागर करना और मनी लॉन्ड्रिंग के निश्चित सबूत इकट्ठा करना है।
अल-फलाह ट्रस्ट मामले में जमानत का विरोध
एक अलग लेकिन संबंधित घटनाक्रम में, ED ने 493 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अल-फलाह ट्रस्ट के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी की अंतरिम जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। सिद्दीकी ने अपनी पत्नी के कैंसर के इलाज का हवाला देते हुए जमानत मांगी थी, जिसे पहले निचली अदालत ने खारिज कर दिया था। दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक स्टेटस रिपोर्ट मांगी है, जिसमें ED का तर्क है कि सिद्दीकी को रिहा करने से सबूतों और अपराध से प्राप्त आय को नष्ट किया जा सकता है।
क्यों मायने रखता है
ED की यह बड़ी कार्रवाई रियल एस्टेट सेक्टर पर बढ़ती जांच को दर्शाती है, जिसका उद्देश्य धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग पर अंकुश लगाना है, जिससे घर खरीदारों और सहकारी समिति के सदस्यों की सुरक्षा हो सके।
मुख्य तथ्य
- •Agencies Involved: Enforcement Directorate (ED), Lucknow Zonal Office
- •Target Locations: Delhi, Ghaziabad
- •Targeted Entities: Real estate developers, cooperative society officials (Shresth Propbuild Private Limited, Seva Suraksha Sahakari Avas Samiti)
- •Accusation: Defrauding society members by illicitly selling land and properties after promising redevelopment
- •Legal Framework: Prevention of Money Laundering Act (PMLA)
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