बोरुंदा में बारिश की कमी से खरीफ फसल और चारे का संकट गहराया
जोधपुर के बोरुंदा और आसपास के इलाकों में किसान बारिश की गंभीर कमी से चिंतित हैं। पिछले 10-12 दिनों से सूखे मौसम के कारण खरीफ की फसलें मुरझाने लगी हैं, जिससे पशुधन के लिए चारे का संकट गहरा गया है। शनिवार को पटेल नगर और बोरुंदा पर घने बादल छाने के बावजूद बारिश नहीं हुई, जिससे किसानों की चिंताएं और बढ़ गईं। मानसून के डेढ़ माह बीत जाने के बाद भी कई तालाब और जल स्रोत खाली हैं, और किसान अल नीनो के कारण "काल का साया" पड़ने की आशंका जता रहे हैं। समय पर बारिश न होने से फसलों और पशुओं के हरे चारे दोनों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
AI सारांश
3 bulletsबोरुंदा के किसानों पर सूखे का खतरा
जोधपुर के बोरुंदा और आसपास के क्षेत्रों के किसान बारिश की गंभीर कमी को लेकर गहरी चिंता व्यक्त कर रहे हैं। पिछले 10-12 दिनों से क्षेत्र में सूखा पड़ा हुआ है, जिससे खरीफ की फसलें मुरझाने लगी हैं। नमी की यह कमी सीधे कृषि उत्पादन और किसान समुदाय की सामान्य स्थिति को प्रभावित कर रही है।
पशुधन के लिए चारे का गहराता संकट
फसल क्षति के अलावा, बारिश की कमी ने पशुधन के लिए चारे के संकट को बढ़ा दिया है। हरे चारे की कमी के कारण पशुपालकों को अपने जानवरों को खिलाने में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों को डर है कि यदि सूखा जारी रहा, तो स्थिति गंभीर हो जाएगी, जिससे उनके पशुधन के स्वास्थ्य और अस्तित्व को खतरा होगा।
मानसून में देरी और खाली जल स्रोत
मानसून का डेढ़ माह बीत जाने के बावजूद, बोरुंदा के अधिकांश पारंपरिक जल स्रोत जैसे तालाब, नाडे और नाडियां अभी भी काफी हद तक खाली पड़े हैं। ग्रामीण किसान इन महत्वपूर्ण जल स्रोतों को भरने के लिए अभी भी अच्छी बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। मानसून में देरी मौजूदा कृषि संकट में एक प्रमुख कारक है।
किसान अल नीनो प्रभाव को ठहरा रहे जिम्मेदार
स्थानीय किसान वर्तमान सूखे जैसी स्थितियों का कारण अल नीनो या सुपर अल नीनो घटनाओं के प्रभाव को बता रहे हैं। वे इस बढ़ती चिंता को व्यक्त करते हैं कि अपर्याप्त बारिश के कारण धीरे-धीरे 'काल का साया' मंडराने लगा है। यह धारणा उनकी आजीविका के लिए दीर्घकालिक प्रभावों के बारे में समुदाय के भीतर गहरी चिंता को उजागर करती है।
बारिश की तत्काल आवश्यकता
किसानों ने सामूहिक रूप से अपनी आशंका व्यक्त की कि यदि समय पर बारिश नहीं हुई तो पशुधन के लिए चारे का एक बड़ा संकट आसन्न है। स्थिति को खड़ी खरीफ फसलों को बचाने और अपने पशुओं के अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए तत्काल मौसम संबंधी राहत की आवश्यकता है, जो उनकी आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
क्यों मायने रखता है
बोरुंदा और आसपास के क्षेत्रों में बारिश की गंभीर कमी से कृषि आजीविका सीधे प्रभावित हो रही है, जिससे खाद्य सुरक्षा और पशुधन के भरण-पोषण दोनों को खतरा है। यह स्थिति किसानों की जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशीलता को उजागर करती है और यदि सूखे की स्थिति बनी रहती है तो यह गंभीर आर्थिक कठिनाई का कारण बन सकती है।
मुख्य तथ्य
- •Region Affected: Borunda and surrounding areas in Jodhpur, Rajasthan
- •Rainfall Status: No rain for 10-12 days, monsoon delayed
- •Crop Impact: Kharif crops wilting
- •Livestock Impact: Deepening fodder crisis
- •Farmer Concerns: Worries about 'shadow of famine' due to El Niño
- •Water Bodies: Most ponds, 'nade', and 'nadiyan' are empty
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