बाल श्रम के खिलाफ गुजरात पुलिस का अभियान: 84 बच्चों को बचाया
गुजरात पुलिस ने "ऑपरेशन चाइल्डहुड फ्रीडम" के तहत 14 दिनों में 84 बाल मजदूरों को बचाया और 26 आरोपियों के खिलाफ 16 मामले दर्ज किए। इस अभियान का उद्देश्य बच्चों को कारखानों से निकालकर स्कूलों में दाखिल कराना और बाल श्रम के नेटवर्क को खत्म करना है। बिहार और राजस्थान के कई प्रवासी बच्चे 11 घंटे की शिफ्ट में प्रतिदिन मात्र ₹200 में काम करने को मजबूर थे। यह अभियान अंतरराज्यीय मानव तस्करी और श्रम नेटवर्क को निशाना बना रहा है। पुलिस का लक्ष्य चार-चरणीय रणनीति के माध्यम से 50,000 से अधिक स्थानों का निरीक्षण करना, 10,000 खुफिया जानकारी जुटाना और 5,000 से अधिक बाल मजदूरों को बचाना है।
AI सारांश
3 bulletsऑपरेशन चाइल्डहुड फ्रीडम शुरू
गुजरात पुलिस ने राज्य भर में बाल श्रम के खिलाफ लड़ने के लिए 'ऑपरेशन चाइल्डहुड फ्रीडम' शुरू किया है। पहले 14 दिनों में, पुलिस ने विभिन्न कारखानों से 84 बाल मजदूरों को सफलतापूर्वक बचाया। यह बड़े पैमाने का अभियान बाल शोषण को खत्म करने और बच्चों के शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए राज्य की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
सूरत में शोषण का खुलासा
सूरत में जय अम्बे टेक्सटाइल्स पर छापे के दौरान, पुलिस ने दो नाबालिग लड़कों को अमानवीय परिस्थितियों में काम करते हुए पाया। उन्हें 11 घंटे की शिफ्ट के लिए प्रतिदिन मात्र ₹200 का भुगतान किया जाता था, जिसमें केवल एक घंटे का लंच ब्रेक मिलता था। नियोक्ता पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं।
पुनर्वास और कानूनी कार्रवाई
गुजरात पुलिस ने बाल श्रम में शामिल 26 आरोपी ठेकेदारों के खिलाफ 16 मामले दर्ज किए हैं। बचाए गए बच्चे, जिनमें ज्यादातर बिहार और राजस्थान के प्रवासी हैं, पुनर्वास किया जा रहा है, जिसमें से 67 को पहले ही स्थानांतरित कर दिया गया है। इस अभियान में जनता को जागरूक करने के लिए 160 जागरूकता कार्यक्रम भी शामिल हैं।
नेटवर्क से लड़ने के लिए चार-चरणीय रणनीति
पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) जी एस मलिक ने कहा कि इस ऑपरेशन में एक व्यापक चार-चरणीय रणनीति है। इस रणनीति में बाल श्रम हॉटस्पॉट की मैपिंग, औचक निरीक्षण करना, बच्चों को स्कूलों में पुनर्वासित करना और संगठित नेटवर्क के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करना शामिल है। लक्ष्य 5,000 से अधिक बाल मजदूरों को बचाना है।
क्यों मायने रखता है
भारत में बाल श्रम एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है, जो बच्चों को शिक्षा और स्वस्थ बचपन के अधिकार से वंचित करता है। यह अभियान शोषण और बाल तस्करी से लड़ने के लिए कानून प्रवर्तन के सक्रिय प्रयासों पर प्रकाश डालता है, जिसका उद्देश्य कमजोर बच्चों के लिए बेहतर भविष्य प्रदान करना है।
मुख्य तथ्य
- •Children Rescued: 84
- •Duration of Operation: 14 days
- •Accused Booked: 26
- •Cases Registered: 16
- •Daily Wage for Child Laborers: ₹200
- •Target Children to be Rescued: Over 5,000
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