ईडी ने इंपीरिया ग्रुप पर छापा मारा: PMLA जांच में नकदी, लग्जरी कारें जब्त
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत इंपीरिया विशफील्ड प्राइवेट लिमिटेड और इंपीरिया स्ट्रक्चर्स लिमिटेड से जुड़े दिल्ली स्थित आठ ठिकानों पर छापेमारी की। इन छापों में कंपनियों, उनके प्रमोटरों और एक समाधान पेशेवर को निशाना बनाया गया, जिसमें ₹50.50 लाख नकद, तीन लग्जरी कारें और महत्वपूर्ण दस्तावेज़ जब्त किए गए। इन दस्तावेज़ों में संपत्ति के कागजात, वित्तीय रिकॉर्ड और डायवर्ट किए गए धन का विवरण शामिल था। ईडी ने हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में इंपीरिया ग्रुप के खिलाफ लगे धोखाधड़ी, परियोजनाओं की गैर-सुपुर्दगी और 15 वर्षों से निवेशकों को सुनिश्चित रिटर्न का भुगतान न करने के कई FIRs के आधार पर अपनी जांच शुरू की। समूह पर खरीदारों के धन को अन्य परियोजनाओं और संबंधित संस्थाओं में डायवर्ट करने का आरोप है।
AI सारांश
3 bulletsईडी ने कई ठिकानों पर की छापेमारी
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुरुग्राम ज़ोनल कार्यालय ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत दिल्ली स्थित आठ आवासीय और वाणिज्यिक संपत्तियों पर व्यापक छापेमारी की। ये अभियान इंपीरिया विशफील्ड प्राइवेट लिमिटेड, इंपीरिया स्ट्रक्चर्स लिमिटेड, उनके प्रमोटर निदेशकों और एक वर्तमान समाधान पेशेवर को निशाना बनाकर संचालित किए गए थे।
महत्वपूर्ण ज़ब्तियां हुईं
तलाशी अभियानों के दौरान, ईडी ने ₹50.50 लाख नकद और तीन महंगी लग्जरी गाड़ियां जब्त कीं। इसके अतिरिक्त, महत्वपूर्ण डिजिटल उपकरण और कई दस्तावेज़ भी जब्त किए गए, जिनमें प्रमोटरों से जुड़े संपत्ति के कागजात, ऑडिट किए गए वित्तीय रिकॉर्ड, टैली डेटा और धन के कथित दुरुपयोग तथा खरीदारों द्वारा किए गए निवेश से संबंधित विवरण शामिल हैं।
कई FIRs के आधार पर जांच
ईडी ने इंपीरिया स्ट्रक्चर्स लिमिटेड, इंपीरिया विशफील्ड प्राइवेट लिमिटेड और उनके प्रमोटर निर्देशकों, जिसमें हरप्रीत सिंह बत्रा, ब्रजिंदर सिंह बत्रा, प्रदीप शर्मा और अविनाश सेठिया शामिल हैं, के खिलाफ एक ईसीआईआर दर्ज करके अपनी जांच शुरू की। यह कार्रवाई हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की पुलिस द्वारा समूह के खिलाफ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के कथित आरोपों के तहत आईपीसी, 1860 के तहत दायर कई एफआईआर के बाद की गई।
धन के डायवर्जन और परियोजना में देरी के आरोप
FIRs में व्यापक धोखाधड़ी, निवेशकों को गुमराह करने, रियल एस्टेट परियोजनाओं को पूरा न करने और सुनिश्चित मासिक रिटर्न व लीज़ किराए का भुगतान न करने के आरोप लगाए गए हैं। ईडी की जांच से पता चला है कि इंपीरिया विशफील्ड प्राइवेट लिमिटेड ने कथित तौर पर गुरुग्राम के सेक्टर 37 में 'एल्वेडोर' परियोजना के खरीदारों से एकत्र किए गए लगभग ₹63 करोड़ को अन्य देनदारियों को पूरा करने और संबंधित कंपनियों या व्यक्तियों को ऋण के रूप में डायवर्ट किया।
निवेशकों से किए गए वादे पूरे नहीं हुए
इंपीरिया विशफील्ड प्राइवेट लिमिटेड ने 2011 में इकाइयों की बुकिंग शुरू की थी, लेकिन 15 साल बाद भी वह खरीदारों को कब्जा देने में नाकाम रही है। इसी तरह, इंपीरिया स्ट्रक्चर्स लिमिटेड ने 'इंपीरिया माइंडस्पेस' और 'इंपीरिया बिजनेस पार्क' के लिए अग्रिम बुकिंग ली थी, जिसमें कब्जा और सुनिश्चित मासिक रिटर्न का वादा किया गया था, जो कभी पूरा नहीं हुआ। ऐसे मामले भी सामने आए हैं जहां एक ही इकाई को कई खरीदारों द्वारा बुक किया गया था, अक्सर बिना उचित खरीदार-निर्माता समझौतों के केवल समझौता ज्ञापन के माध्यम से।
क्यों मायने रखता है
इंपीरिया ग्रुप पर ईडी की यह कार्रवाई रियल एस्टेट क्षेत्र में व्यापक वित्तीय अनियमितताओं और कथित धोखाधड़ी को उजागर करती है, जिससे कई घर खरीदार और निवेशक प्रभावित हुए हैं जो एक दशक से अधिक समय से अपने वैध रिटर्न और संपत्तियों का इंतजार कर रहे हैं। यह विलंबित या अधूरे रियल एस्टेट परियोजनाओं में निवेशकों के सामने आने वाली चुनौतियों और ऐसी प्रथाओं को रोकने के लिए सरकार के प्रयासों को रेखांकित करता है।
मुख्य तथ्य
- •Seized Cash: ₹50.50 lakh
- •Seized Items: 3 luxury cars, digital devices, property documents, financial records
- •Companies Involved: Imperia Wishfield Pvt Ltd, Imperia Structures Ltd
- •Accused Promoters/Directors: Harpreet Singh Batra, Brajinder Singh Batra, Pradeep Sharma, Avinash Sethia
- •Project Delays: 15 years for some projects like Elvedor
- •Projects Mentioned: Elvedor (Sec 37, Gurugram), Imperia Mindspace (Gurugram), Imperia Business Park (Grater Noida)
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