RSS ने कांग्रेस के पंजीकरण दावों पर दिया जवाब
प्रियंक खड़गे और पवन खेड़ा जैसे कांग्रेस नेताओं द्वारा RSS के पंजीकरण और फंडिंग पर उठाए गए हालिया सवालों के बीच, RSS समर्थक संगठन के ऐतिहासिक योगदानों और सेवा कार्यों पर प्रकाश डाल रहे हैं। वे तत्कालीन प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू के निमंत्रण पर 1963 की गणतंत्र दिवस परेड में RSS की भागीदारी, स्वतंत्रता संग्राम में इसकी भूमिका और राष्ट्रीय आपदाओं के दौरान इसकी निस्वार्थ सेवा जैसे उदाहरणों का हवाला देते हैं। लेख इस बात पर जोर देता है कि RSS खुद को एक पंजीकृत संस्था के बजाय एक सामाजिक संगठन मानता है, यह तर्क देते हुए कि समाज को स्वयं पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होती है। यह RSS पर प्रतिबंध लगाने के कांग्रेस के पिछले प्रयासों का भी जिक्र करता है, जिसकी तुलना संगठन की निरंतर राष्ट्र सेवा से की गई है।
AI सारांश
3 bulletsकांग्रेस ने RSS की स्थिति पर उठाए सवाल
हाल ही में कांग्रेस नेताओं प्रियंक खड़गे और पवन खेड़ा के बयानों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पंजीकरण की स्थिति और वित्तीय कामकाज को लेकर बहस छेड़ दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि एक अपंजीकृत संगठन कैसे संचालित होता है और अपने धन का प्रबंधन कैसे करता है। ये आरोप नए नहीं हैं, कांग्रेस और वामपंथी दलों द्वारा वर्षों से इसी तरह की आलोचनाएं की जाती रही हैं।
RSS: एक सामाजिक, पंजीकृत नहीं, संगठन
RSS समर्थक दृढ़ता से इन आरोपों का खंडन करते हुए कहते हैं कि 'समाज' को पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होती है, और RSS समाज का एक संगठन है, न कि एक अलग पंजीकृत संस्था। वे इस बात पर जोर देते हैं कि सभी सदस्य भाईचारे की भावना के साथ काम करते हैं और राष्ट्र को सर्वप्रथम प्राथमिकता देते हैं। संगठन इस विश्वास के साथ कार्य करता है कि हिंदू विचार सभी के कल्याण को बढ़ावा देता है, जो 'मैं नहीं, हम' के सिद्धांत को दर्शाता है।
ऐतिहासिक मान्यता और सेवा कार्य
लेख RSS के योगदानों को रेखांकित करने के लिए ऐतिहासिक घटनाओं पर प्रकाश डालता है, जैसे चीन युद्ध में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका के बाद जवाहरलाल नेहरू द्वारा 1963 की गणतंत्र दिवस परेड में इसका निमंत्रण। यह विभाजन के दौरान विस्थापित हिंदुओं को RSS की सहायता और स्वतंत्रता संग्राम में इसकी सक्रिय भागीदारी का भी उल्लेख करता है। संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार एक स्वतंत्रता सेनानी थे, और महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस और बाबा साहेब अंबेडकर जैसे व्यक्ति संगठन के संपर्क में थे।
स्वतंत्रता आंदोलन और आपदाओं में भूमिका
RSS ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई, जिसके तत्कालीन प्रमुख गुरु गोलवलकर ने स्वयंसेवकों को राष्ट्र सेवा और बलिदान के लिए प्रेरित किया था। 1942 की ब्रिटिश खुफिया रिपोर्टों सहित ऐतिहासिक अभिलेख, विभिन्न गुप्त अभियानों में RSS की भागीदारी की पुष्टि करते हैं। संगठन के स्वयंसेवक लगातार देश भर में आपदा राहत प्रयासों में सबसे आगे रहे हैं, बिना मीडिया का ध्यान या श्रेय मांगे निस्वार्थ सेवा प्रदान करते हैं।
हिंदुत्व दर्शन के माध्यम से एकता
RSS की विचारधारा 'हिंदावः सोदरा सर्वे, न हिन्दू पतितो भवेत्' की अवधारणा को बढ़ावा देती है, जिसका अर्थ है कि सभी हिंदू भाई हैं, और कोई भी अछूत या हीन नहीं है। यह दर्शन, आपसी भाईचारे और 'वसुधैव कुटुम्बकम्' (विश्व एक परिवार है) में विश्वास पर आधारित है, जिसका उद्देश्य हिंदू समाज को एकजुट करना है। वर्तमान सरसंघचालक मोहन भागवत इस बात पर जोर देते हैं कि समावेशिता, विविध परंपराओं, भाषाओं और जातियों के प्रति सम्मान, और मातृभूमि के प्रति भक्ति इस एकीकरण संस्कृति के मूल सिद्धांत हैं।
क्यों मायने रखता है
RSS के पंजीकरण और इसकी ऐतिहासिक भूमिका के इर्द-गिर्द की बहस भारतीय राजनीति में एक विवाद का विषय बनी हुई है। इन आरोपों पर RSS के दृष्टिकोण को समझना महत्वपूर्ण है ताकि उसके रुख और खुद को एक स्वैच्छिक सामाजिक संगठन के रूप में उसकी आत्म-छवि को समझा जा सके, जो अक्सर राजनीतिक आख्यानों के विपरीत, राष्ट्र-निर्माण और समाज सेवा में शामिल रहा है।
मुख्य तथ्य
- •Allegations: Congress leaders Priyank Kharge and Pawan Khera questioned RSS's registration and funding.
- •RSS Stance: RSS states it is a social organization, not requiring 'registration' like society itself.
- •Historical Event: Jawaharlal Nehru invited RSS to the 1963 Republic Day parade.
- •Founding: RSS founder Dr. Keshav Rao Baliram Hedgewar was a freedom fighter and involved with Congress.
- •Notable Contacts: Mahatma Gandhi, Subhas Chandra Bose, and Baba Saheb Ambedkar had contact with RSS.
- •Service during Disasters: RSS volunteers consistently provide service during national disasters without seeking credit.
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