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मोदी ने G7 से की अपील: पश्चिम एशिया युद्ध से ग्लोबल साउथ को चाहिए वित्तीय सहायता…

Briovo· 17 Jun 2026, 11:48 pm IST1
मोदी ने G7 से की अपील: पश्चिम एशिया युद्ध से ग्लोबल साउथ को चाहिए वित्तीय सहायता…

फ्रांस में G7 नेताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोर देकर कहा कि पश्चिम एशिया युद्ध के ईंधन, उर्वरक और खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को ग्लोबल साउथ अकेले वहन नहीं कर सकता। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से कमजोर राष्ट्रों के लिए सहायता प्रणाली स्थापित करने का आह्वान किया। मोदी ने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधानों पर प्रकाश डाला, जिसने एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित किया है। उन्होंने कुशल गतिशीलता के लिए "ग्लोबल स्किल्स पार्टनरशिप" और कनेक्टिविटी परियोजनाओं के लिए "इंटरनेशनल मोबिलाइजेशन पार्टनरशिप फॉर एक्सिलरेटिंग कनेक्टिविटी एंड ट्रेड (IMPACT)" का भी प्रस्ताव रखा, जो इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) की परिकल्पना से प्रेरित है।

AI सारांश

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ग्लोबल साउथ का आर्थिक बोझ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने G7 नेताओं से कहा कि ग्लोबल साउथ से पश्चिम एशिया युद्ध के आर्थिक नतीजों को अकेले झेलने की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने जोर दिया कि ईंधन, उर्वरक और खाद्य पदार्थों की आवश्यक आपूर्ति श्रृंखलाओं में चल रही बाधाएं लंबे समय तक इन कमजोर राष्ट्रों को प्रभावित करती रहेंगी। मोदी ने इन झटकों से जूझ रहे देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संगठनों को मजबूत सहायता प्रणाली बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

युद्ध का व्यापक आर्थिक प्रभाव

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के भारत और अन्य विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के लगभग बंद होने से एलपीजी, एलएनजी, डीजल, पेट्रोल और उर्वरकों जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों की आपूर्ति में भारी बाधा आई है। इस कमी ने ईंधन की कीमतों में वृद्धि को बढ़ावा दिया है, जिससे समग्र आर्थिक स्थिरता पर व्यापक प्रभाव पड़ रहा है और काफी कठिनाइयाँ पैदा हो रही हैं।

संस्थागत सहायता का आह्वान

पीएम मोदी ने विश्व बैंक, आईएमएफ, ओईसीडी और अफ्रीकी विकास बैंक सहित शिखर सम्मेलन में मौजूद सभी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से मजबूत सहायता तंत्र विकसित करने का आग्रह किया। ये तंत्र विकासशील देशों को आर्थिक झटकों को अवशोषित करने और वैश्विक संकटों के बीच अपनी स्थिरता बनाए रखने में मदद करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि सच्ची अंतरराष्ट्रीय एकजुटता के लिए कमजोर राष्ट्रों को अकेले संकट का बोझ उठाने से रोकना आवश्यक है।

नई साझेदारियों का प्रस्ताव

अपने संबोधन के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक सहयोग और विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दो प्रमुख प्रस्ताव प्रस्तुत किए। उन्होंने भारत और अन्य ग्लोबल साउथ देशों में प्रचुर मात्रा में युवा प्रतिभा का लाभ उठाते हुए, विश्वसनीय कुशल गतिशीलता और प्रतिभा मानचित्रण को सुविधाजनक बनाने के लिए एक "ग्लोबल स्किल्स पार्टनरशिप" स्थापित करने का सुझाव दिया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) से प्रेरणा लेते हुए, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और प्रशांत द्वीपों में कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर काम करने के लिए एक "इंटरनेशनल मोबिलाइजेशन पार्टनरशिप फॉर एक्सिलरेटिंग कनेक्टिविटी एंड ट्रेड (IMPACT)" का प्रस्ताव रखा।

क्यों मायने रखता है

पश्चिम एशिया संघर्ष के वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ रहे प्रभावों से विकासशील देश असमान रूप से प्रभावित हो रहे हैं। G7 शिखर सम्मेलन में वित्तीय सहायता और नई साझेदारियों के लिए पीएम मोदी का आह्वान व्यापक आर्थिक अस्थिरता को रोकने और न्यायसंगत विकास को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।

मुख्य तथ्य

  • PM Modi's Address: Addressed G7 leaders in Evian-les-Bains, France.
  • Key Concern: Global South bearing disproportionate burden of West Asia war's economic disruptions.
  • Impact Areas: Fuel, fertilizer, and food supply chains disrupted, affecting prices.
  • Proposed Solutions: Financial support mechanisms from global institutions, Global Skills Partnership, and IMPACT for connectivity.
  • Affected Regions: Developing countries in Asia, Africa, and Latin America.
  • Existing Initiative Referenced: India-Middle East-Europe Economic Corridor (IMEC).

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