सुप्रीम कोर्ट ने कोर्टरूम में हंगामा करने वाले शख्स पर कार्रवाई से इनकार किया
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप के खिलाफ कार्रवाई न करने का फैसला किया है, जिसने कोर्टरूम में हंगामा किया, केस फाइलें फेंकीं और भारत के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया. जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और आलोक आराधे की पीठ ने उनके अमर्यादित व्यवहार और याचिका खारिज होने के बावजूद, उनकी "स्थिति" का हवाला देते हुए उन्हें दंडित नहीं करने का फैसला किया. यह घटना शुक्रवार सुबह हुई, जिसके बाद याचिकाकर्ता को दिल्ली पुलिस ने संक्षिप्त समय के लिए हिरासत में ले लिया. कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई औचित्य नहीं पाया.
AI सारांश
3 bulletsकोर्टरूम में बवाल
शुक्रवार सुबह याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप ने सुप्रीम कोर्ट में भारी हंगामा किया. उसने अपनी केस फाइल के कागज हवा में उछाले और भारत के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया. गर्मी की छुट्टियों के बाद सुप्रीम कोर्ट के नियमित कामकाज शुरू होने से पहले यह आखिरी कार्यदिवस था, और उसके कार्यों से कोर्टरूम में अफरा-तफरी मच गई.
न्यायिक नाराज़गी और हिरासत
पीठ की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और आलोक आराधे याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप के आचरण से नाराज़ थे. इसके बावजूद, उन्होंने शुरुआत में उसे हिरासत में लेने का आदेश दिया. सादे कपड़ों में मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत उसे कोर्टरूम से बाहर निकाला, और बाद में दिल्ली पुलिस ने उसे पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया.
याचिका खारिज, आगे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं',
सुप्रीम कोर्ट ने प्रबल प्रताप के व्यवहार की कड़ी आलोचना की, इसे अमर्यादित और उसके मामले से असंबद्ध बताया. परिणामस्वरूप, उसकी याचिका खारिज कर दी गई, क्योंकि अदालत ने हाई कोर्ट के मूल आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं पाया. हालांकि, नरमी दिखाते हुए, पीठ ने उनकी 'स्थिति' को ध्यान में रखते हुए उनके खिलाफ कोई और कानूनी कार्रवाई शुरू न करने का फैसला किया.
घटना का संदर्भ
यह घटना सुप्रीम कोर्ट में आंशिक कार्यदिवस के दौरान हुई, जो अदालत के नियमित कार्य फिर से शुरू होने से पहले की कार्यवाही का आखिरी दिन था. प्रबल प्रताप ने विघटनकारी व्यवहार करने से पहले, अदालत को निर्देशित करने की कोशिश की थी, पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी की मांग की थी और अपने मामले में श्रेष्ठता का दावा किया था.
कोर्ट का करुणामय रुख
याचिकाकर्ता के गंभीर दुर्व्यवहार के बावजूद, जिसमें मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ मौखिक दुर्व्यवहार भी शामिल था, सुप्रीम कोर्ट ने करुणामय दृष्टिकोण अपनाया. पीठ ने जानबूझकर उनके खिलाफ अवमानना के आरोप या अन्य दंडात्मक उपाय न करने का फैसला किया, सख्त प्रवर्तन के बजाय मानवीय दृष्टिकोण पर जोर दिया.
क्यों मायने रखता है
यह घटना अदालत की अवमानना के मामलों में भी सुप्रीम कोर्ट के मानवीय दृष्टिकोण को उजागर करती है, जो न्यायिक गरिमा और करुणा के बीच संतुलन स्थापित करती है.
मुख्य तथ्य
- •Incident Date: Friday morning (likely July 5, 2024, given article date)
- •Location: Supreme Court of India
- •Petitioner Name: Prabal Pratap
- •Judges on Bench: Justices K.V. Viswanathan and Alok Aradhe
- •Action Taken by Police: Brief detention for questioning
क्या यह मददगार था?
Reader pulse
0 votesGenerate a 5-question quiz from this article.
चर्चा
Discussion (0)
Loading…