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6 UBT सांसदों ने उद्धव को छोड़ा, शिंदे गुट में शामिल: महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा…

Briovo· 18 Jun 2026, 10:37 pm IST
6 UBT सांसदों ने उद्धव को छोड़ा, शिंदे गुट में शामिल: महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा…

शिवसेना (यूबीटी) के छह लोकसभा सांसदों ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ विद्रोह कर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का साथ दिया है। यह महत्वपूर्ण दलबदल महाराष्ट्र की राजनीति को गहराई से प्रभावित कर रहा है, जिससे एनडीए के भीतर शिंदे की स्थिति मजबूत हुई है और दिल्ली तथा मुंबई दोनों में उनका प्रभाव बढ़ा है। यूबीटी गुट की संसदीय उपस्थिति घटकर तीन सांसद रह गई है, जिससे संसद और महा विकास अघाड़ी में उसकी स्थिति कमजोर हो गई है। यह कदम शिवसेना विरासत पर शिंदे के नियंत्रण को मजबूत करता है, राज्य के सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को तेज करता है और संभावित रूप से केंद्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर उनके गुट के लिए अधिक प्रमुख भूमिकाओं की मांग को जन्म दे सकता है।

AI सारांश

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उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के नौ लोकसभा सांसदों में से छह ने विद्रोह कर दिया है, जिससे पार्टी को एक बड़ा झटका लगा है। यह दलबदल 2022 के शिवसेना विभाजन के बाद हुआ है और यूबीटी गुट के राजनीतिक प्रभाव और संसदीय ताकत को और कम करता है। यह कदम शिवसेना विरासत पर नियंत्रण के लिए चल रहे संघर्ष को उजागर करता है।

एकनाथ शिंदे की स्थिति मजबूत

इस दलबदल से महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को काफी फायदा हुआ है, जिनके गुट की संसदीय ताकत में अब वृद्धि हुई है। यह भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के भीतर उनके महत्व को बढ़ाता है, दिल्ली में उनकी मोलभाव करने की शक्ति को बढ़ाता है और अन्य सहयोगियों पर सत्तारूढ़ गठबंधन की निर्भरता को कम करता है। महाराष्ट्र में शिंदे की राजनीतिक पकड़ भी मजबूत हुई है, जिससे सत्तारूढ़ गठबंधन में उनकी अपरिहार्य भूमिका की पुष्टि हुई है।

यूबीटी का कमजोर प्रभाव

बड़े पैमाने पर हुए इस पलायन से यूबीटी गुट की लोकसभा में उपस्थिति घटकर केवल तीन सांसद रह गई है, जिससे मूल शिवसेना पर नियंत्रण खोने के चार साल बाद एक नया झटका लगा है। यह न केवल संसद में पार्टी की स्थिति को कमजोर करता है बल्कि विपक्षी महा विकास अघाड़ी के भीतर भी इसके प्रभाव को कम करता है। यह कदम यूबीटी की भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति को प्रभावी ढंग से चुनौती देने की क्षमता पर सवाल उठाता है।

आगे कानूनी और राजनीतिक लड़ाई

यूबीटी नेतृत्व ने अनुपस्थित छह सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जिसमें संतोषजनक जवाब न मिलने पर दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता की धमकी दी गई है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी मुलाकात कर अपना पक्ष रखा है। शिंदे खेमा आंतरिक बैठकों के लिए जारी व्हिप की वैधता पर विवाद कर रहा है, जिससे दसवीं अनुसूची की व्याख्या को लेकर एक लंबी संवैधानिक और कानूनी लड़ाई की पृष्ठभूमि तैयार हो रही है।

शिंदे का बढ़ता प्रभाव

शिंदे की बढ़ी हुई ताकत से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राज्य भाजपा नेतृत्व पर दबाव बढ़ने की संभावना है। यह सफल दलबदल उनकी राजनीतिक पहुंच का विस्तार करने की क्षमता को दर्शाता है और एक अपरिहार्य सहयोगी के रूप में उनकी स्थिति को मजबूत करता है। बढ़ी हुई संख्या शिंदे के मुख्यमंत्री पद पर लंबे समय तक दावे को मजबूत कर सकती है और राज्य के शीर्ष पद पर लौटने की महत्वाकांक्षाओं का संकेत दे सकती है।

क्यों मायने रखता है

छह यूबीटी सांसदों का शिंदे गुट में शामिल होना महाराष्ट्र के राजनीतिक परिदृश्य को महत्वपूर्ण रूप से बदलता है, सत्तारूढ़ गठबंधन को मजबूत करता है और विपक्ष को कमजोर करता है। यह एनडीए और महा विकास अघाड़ी के भीतर शक्ति संतुलन को प्रभावित करता है, जिससे शिंदे को शासन में बड़ी हिस्सेदारी मिल सकती है।

मुख्य तथ्य

  • Number of UBT MPs defecting: 6
  • Total UBT Lok Sabha MPs: 9
  • Number of UBT MPs remaining: 3
  • Date of defection news: June 18, 2026
  • Location of absent MPs (alleged): Jaipur

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