रोहिणी इमारत ढही: एजेंसियां एक-दूसरे पर दोष मढ़ रही हैं
दिल्ली के रोहिणी सेक्टर 16 में बुधवार को एक निर्माणाधीन इमारत ढह गई, जिससे सरकारी एजेंसियों के कामकाज पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि डीडीए, एमसीडी और अन्य निकाय पर्याप्त निरीक्षण और निगरानी नहीं करते, जिससे ऐसी घटनाएं होती हैं। डीडीए ने स्पष्ट किया कि 2016 में इस क्षेत्र को डी-नोटिफाई कर दिया गया था, जिससे निर्माण की निगरानी की जिम्मेदारी स्थानीय निकाय पर आ गई। एमसीडी की प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि प्लंबिंग के काम से संरचना कमजोर हो सकती है। निवासी भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सख्त नियमों और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
AI सारांश
3 bulletsरोहिणी में इमारत ढही
दिल्ली के रोहिणी सेक्टर 16 में बुधवार को एक निर्माणाधीन बहुमंजिला इमारत अचानक ढह गई। इस घटना के बाद विभिन्न सरकारी विभागों के कामकाज पर स्थानीय निवासियों ने कड़ी आलोचना की है। समुदाय निर्माण गतिविधियों के समय पर निरीक्षण और पर्याप्त निगरानी की कमी पर सवाल उठा रहा है।
एजेंसियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप
स्थानीय निवासियों ने डीडीए, एमसीडी, दिल्ली फायर सर्विस और दिल्ली पुलिस जैसी एजेंसियों पर निर्माणाधीन इमारतों का नियमित निरीक्षण करने में विफल रहने का आरोप लगाया है। जवाब में, डीडीए ने एक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि सेक्टर 16 क्षेत्र को 2016 में डी-नोटिफाई कर दिया गया था, जिससे निर्माण की निगरानी की जिम्मेदारी स्थानीय निकाय पर आ गई। इससे नागरिक अधिकारियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का खेल शुरू हो गया है।
एमसीडी की प्रारंभिक जांच
दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के अधिकारियों ने बताया कि ढही हुई संरचना का भवन मानचित्र उचित प्रक्रिया के माध्यम से स्वीकृत किया गया था और निर्माण अपने अंतिम चरण में था। उनकी प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि प्लंबिंग के काम के दौरान ड्रिलिंग या कॉलम और बीम के साथ छेड़छाड़ ने संरचना को कमजोर कर दिया होगा, जिससे यह ढह गई। सटीक कारण जानने के लिए विस्तृत तकनीकी जांच चल रही है।
अवैध निर्माण पर चिंता
रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) ने अनाधिकृत कॉलोनियों और गैर-अधिसूचित क्षेत्रों में भवन संहिता के उल्लंघन के लगातार मुद्दे को उजागर किया है। वे अवैध निर्माण और संबंधित सुरक्षा जोखिमों में वृद्धि का कारण विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय और प्रभावी निगरानी की कमी को बताते हैं। इस घटना को ऐसे अनियंत्रित विकास के प्रत्यक्ष परिणाम के रूप में देखा जा रहा है।
जवाबदेही की मांग
रोहिणी की घटना के बाद, स्थानीय निवासी मांग कर रहे हैं कि सभी निर्माणाधीन इमारतों का नियमित तकनीकी निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए, और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका मानना है कि दुर्घटनाओं के बाद ही निरीक्षण करने के बजाय, समय पर निगरानी और जवाबदेही भविष्य में ऐसी आपदाओं को रोकने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
क्यों मायने रखता है
यह घटना दिल्ली में अवैध निर्माण और उचित निगरानी की कमी के चल रहे मुद्दे को उजागर करती है, जिससे निवासियों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा जोखिम पैदा होते हैं।
मुख्य तथ्य
- •Incident Date: Wednesday
- •Location: Rohini Sector 16, Delhi
- •Inspected Buildings (2026): 2.8 Million
- •Hazardous Buildings Identified…: 19
- •DDA De-notification Year: 2016
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