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दिल्ली HC ने पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाया

Briovo· 24 Jul 2026, 03:31 am IST
दिल्ली HC ने पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाया

दिल्ली हाईकोर्ट ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों के आपराधिक मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए राउज़ एवेन्यू कोर्ट में एक फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन किया है। इस अदालत के लिए जज अनु ग्रोवर बालिगा को विशेष न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस घोषणा के बाद आया है, जिसमें उन्होंने पेपर लीक में शामिल लोगों को जल्द और कड़ी सजा दिलाने के लिए ऐसे कोर्ट बनाने की बात कही थी। इन मामलों में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 लागू होगा, जिसमें 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

AI सारांश

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विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन

दिल्ली हाईकोर्ट ने राउज़ एवेन्यू कोर्ट में एक फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन कर एक निर्णायक कदम उठाया है। इस विशेष अदालत को देश भर में सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों के उपयोग से संबंधित आपराधिक मामलों से निपटने का काम सौंपा गया है। यह कदम परीक्षा प्रणाली में शुचिता सुनिश्चित करने के लिए न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

जज बालिगा त्वरित सुनवाई के लिए नियुक्त

तीस हजारी कोर्ट के मीडिएशन सेंटर की इंचार्ज रही जज अनु ग्रोवर बालिगा को स्थानांतरित कर इस नवनिर्मित फास्ट-ट्रैक कोर्ट के विशेष न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया है। उनकी भूमिका यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण होगी कि इन मामलों पर त्वरित और समर्पित ध्यान दिया जाए, जिससे तेजी से समाधान और न्याय मिल सके।

पीएम मोदी का सख्त कार्रवाई पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने के सरकार के निर्णय की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य गलत काम करने वालों को तुरंत और कड़ी सजा दिलाना है। यह पहल परीक्षाओं में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार के कड़े रुख और देश के युवाओं के भविष्य की रक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

पब्लिक एग्जामिनेशंस एक्ट, 2024

देशभर में नकल और पेपर लीक रोकने के लिए पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 पहले ही लागू किया जा चुका है। यह कड़ा कानून ऐसे अपराधों के लिए दोषी पाए जाने वालों के लिए 10 साल तक की जेल और ₹1 करोड़ तक के भारी जुर्माने सहित कड़ी सजा का प्रावधान करता है। फास्ट-ट्रैक कोर्ट इस महत्वपूर्ण कानून के दायरे में काम करेगा।

जनता का आक्रोश और सरकार की प्रतिक्रिया

सरकार का यह कड़ा रुख व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच आया है, जिसमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हजारों छात्रों द्वारा 'संसद मार्च' भी शामिल है। ये विरोध प्रदर्शन बार-बार होने वाले पेपर लीक को लेकर जनता की हताशा को उजागर करते हैं और सार्वजनिक परीक्षाओं की पवित्रता बनाए रखने के लिए मजबूत उपायों की आवश्यकता पर जोर देते हैं।

क्यों मायने रखता है

दिल्ली हाईकोर्ट की यह पहल लाखों छात्रों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण सार्वजनिक परीक्षाओं की शुचिता की रक्षा और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए है। यह पेपर लीक और अनुचित साधनों को लेकर बढ़ती चिंताओं को दूर करती है, तथा पारदर्शिता और निष्पक्षता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।

मुख्य तथ्य

  • Court Established: Fast-track court at Rouse Avenue Court
  • Special Judge Appointed: Judge Anu Grover Baliga
  • Purpose: Hear criminal cases related to public exam paper leaks and malpractices
  • Relevant Act: The Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024
  • Penalties under Act: Up to 10 years jail and ₹1 crore fine

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