अल नीनो ने कर्नाटक के मानसून को बाधित किया, फसल और पानी की कमी की आशंका बढ़ी
विशेषज्ञों ने कर्नाटक के दक्षिण-पश्चिम मानसून को प्रभावित करने वाले मजबूत अल नीनो के कारण गंभीर परिणामों की चेतावनी दी है। जुलाई में कुल वर्षा में थोड़ा सुधार (+13% सामान्य से) देखा गया, वहीं 1 जून से 8 जुलाई की अवधि में 28% की महत्वपूर्ण कमी दर्ज की गई। दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, जो एक प्रमुख कृषि क्षेत्र है, ने जुलाई में 60% वर्षा की भारी कमी का अनुभव किया, जिससे खरीफ और भविष्य की रबी दोनों फसलों पर असर पड़ सकता है। मौसम विज्ञानियों और पूर्व राज्य आपदा निगरानी अधिकारियों के अनुसार, इस कमी से अगले गर्मी में भूजल स्तर में गिरावट और पेयजल संकट पैदा हो सकता है, जो तत्काल मानसून सीजन से परे है।
AI सारांश
3 bulletsअल नीनो का कर्नाटक की बारिश पर दोहरा प्रभाव
एक मजबूत अल नीनो ने कर्नाटक के दक्षिण-पश्चिम मानसून को काफी प्रभावित किया है, जिससे कई क्षेत्रों में वर्षा की कमी हुई है। जबकि कुछ हिस्सों में भारी बारिश हुई, अन्य में सूखे जैसी स्थिति थी, जो एक अनियमित वर्षा पैटर्न को उजागर करता है। वर्षा में यह परिवर्तनशीलता मुख्य रूप से अल नीनो घटना के कारण है, जो मानसून की शुरुआत में देरी करती है और उसके वितरण को बदल देती है।
जून की कमी के बाद जुलाई में सुधार
1 जून से 8 जुलाई तक, कर्नाटक में 28% वर्षा की कमी दर्ज की गई, सामान्य 266 मिमी के मुकाबले केवल 191 मिमी वर्षा हुई। हालांकि, जुलाई में थोड़ा सुधार देखा गया, जिसमें राज्य को 75 मिमी वर्षा प्राप्त हुई, जो सामान्य 67 मिमी से 13% अधिक है। इस महीने का डेटा सामान्य श्रेणी में आता है, जो शुरुआती कमी के बाद आंशिक सुधार का संकेत देता है।
दक्षिण आंतरिक कर्नाटक को गंभीर कमी का सामना करना पड़ा
जुलाई में कुल मिलाकर सुधार के बावजूद, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 60% की महत्वपूर्ण वर्षा की कमी का सामना करना पड़ा। यह क्षेत्र राज्य की कृषि के लिए महत्वपूर्ण है, कर्नाटक की लगभग 70% खरीफ फसलें यहां उगाई जाती हैं। इस क्षेत्र में लंबे समय तक सूखे की स्थिति चल रहे खरीफ सीजन के लिए सीधा खतरा पैदा करती है।
खरीफ और रबी फसलों के लिए खतरा
कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र के पूर्व निदेशक जी.एस. श्रीनिवासा रेड्डी सहित विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में कम बारिश खरीफ फसलों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा, पूर्वानुमान sugiere है कि यदि मानसून कमजोर होता रहा, तो रबी फसलों पर भी संभावित प्रभाव पड़ेगा। इससे व्यापक कृषि संकट पैदा हो सकता है।
दीर्घकालिक परिणाम: पानी की कमी
अल नीनो का प्रभाव मौजूदा फसल चक्रों से भी आगे तक है, विशेषज्ञ भविष्य के लिए दूरगामी परिणामों की भविष्यवाणी कर रहे हैं। कम मानसून के कारण भूजल स्तर में कमी से बोरवेल सूख सकते हैं, जिससे अगले गर्मी में गंभीर पेयजल संकट पैदा हो सकता है। यह एक आसन्न संकट को उजागर करता है जिसके लिए तत्काल ध्यान औरS उपशमन रणनीतियों की आवश्यकता है।
क्यों मायने रखता है
अल नीनो का कर्नाटक में मानसूनी वर्षा पर दीर्घकालिक प्रभाव, विशेषकर महत्वपूर्ण कृषि क्षेत्रों में, व्यापक फसल नुकसान का कारण बन सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा और किसानों की आजीविका प्रभावित होगी। इसके अलावा, भूजल स्तर में अपेक्षित गिरावट से राज्य भर में आगामी गर्मी के महीनों में पेयजल संकट का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
मुख्य तथ्य
- •Overall Monsoon Deficit (June 1 …: 28% (191 mm vs normal 266 mm)
- •July Rainfall Improvement: +13% departure (75 mm vs normal 67 mm)
- •South Interior Karnataka Deficit…: 60%
- •Kharif Crop Dependence on South…: Nearly 70%
- •Monsoon Season Completed: 30%
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