आपातकाल भारतीय लोकतंत्र पर "सबसे बड़ा हमला": बिहार भाजपा
बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का "सबसे काला अध्याय" था। उन्होंने तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी के इस फैसले की आलोचना करते हुए अनुच्छेद 352 के दुरुपयोग, मौलिक अधिकारों के निलंबन और स्वतंत्रता के दमन का हवाला दिया। सरावगी ने जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में बिहार के "संपूर्ण क्रांति" आंदोलन को एक मजबूत प्रतिरोध बताया। उन्होंने दावा किया कि भाजपा इस आपातकाल-विरोधी संघर्ष की वैचारिक उत्तराधिकारी है और पीएम मोदी के नेतृत्व में लोकतांत्रिक तथा संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
AI सारांश
3 bulletsआपातकाल: लोकतंत्र का एक काला अध्याय
बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला दौर था। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के इस फैसले की आलोचना की और इसे संविधान के अनुच्छेद 352 का घोर दुरुपयोग बताया। इसके परिणामस्वरूप मौलिक अधिकारों का निलंबन और लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं का दमन हुआ था।
दमन और भय का माहौल
सरावगी ने बताया कि आपातकाल के दौरान प्रेस सेंसरशिप, राजनीतिक गिरफ्तारियां और सत्तावादी शासन लागू हुआ, जिसने देश को डर और अनिश्चितता के माहौल में धकेल दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस अवधि ने देश भर में लोकतांत्रिक मूल्यों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को काफी हद तक eroded कर दिया।
बिहार का 'संपूर्ण क्रांति' प्रतिरोध
बिहार भाजपा अध्यक्ष ने बताया कि आपातकाल का सबसे मजबूत प्रतिरोध बिहार से, लोकनायक जयप्रकाश नारायण के 'संपूर्ण क्रांति' आंदोलन के नेतृत्व में उभरा। इस आंदोलन ने देशव्यापी जागरण को प्रेरित किया और भारतीय राजनीति को एक नई दिशा दी। पटना से लेकर बिहार के सुदूर कोनों तक के छात्र, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता अधिनायकवाद के खिलाफ एकजुट हुए।
भाजपा: आपातकाल विरोधी संघर्ष की वैचारिक उत्तराधिकारी
सरावगी ने दावा किया कि भाजपा खुद को आपातकाल विरोधी आंदोलन से उभरे लोकतांत्रिक संघर्ष की वैचारिक उत्तराधिकारी मानती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भाजपा लोकतंत्र, संवैधानिक मूल्यों और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जॉर्ज फर्नांडिस और कर्पूरी ठाकुर जैसे नेताओं की भूमिकाओं को भी मान्यता दी।
1977 का जनादेश और भविष्य की पीढ़ियाँ
सरावगी ने याद दिलाया कि बिहार में 1977 के आम चुनावों ने अधिनायकवादी शासन के खिलाफ एक निर्णायक जनादेश दिया था, जिसने लोकतंत्र को बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने नागरिकों से आपातकाल के भयावह अनुभवों को याद रखने और भारत के लोकतांत्रिक ढांचे की रक्षा के लिए किए गए बलिदानों के बारे में भावी पीढ़ियों को शिक्षित करने का आग्रह किया।
क्यों मायने रखता है
बिहार भाजपा अध्यक्ष का यह बयान आपातकाल के ऐतिहासिक महत्व और उसकी लगातार बनी हुई राजनीतिक प्रासंगिकता को रेखांकित करता है। यह लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने के भाजपा के नैरेटिव को उजागर करता है, जिसकी वैचारिक जड़ें आपातकाल-विरोधी आंदोलन में हैं, और पार्टी को कथित अधिनायकवाद के खिलाफ संवैधानिक सिद्धांतों के संरक्षक के रूप में स्थापित करता है।
मुख्य तथ्य
- •Criticism of Emergency: Bihar BJP President Sanjay Saraogi termed 1975 Emergency
- •Reason for Criticism: Misuse of Article 352, suspension of fundamental rights, and suppression of democratic freedoms.
- •Key Resistance Movement: Bihar's 'Total Revolution' movement led by Loknayak Jayaprakash Narayan.
- •BJP's Stance: BJP considers itself the ideological heir to the anti-Emergency movement, committed to democratic values under PM Modi.
- •Leaders Involved: George Fernandes (underground resistance) and Karpoori Thakur (active engagement).
- •Historical Verdict: 1977 general elections in Bihar gave a decisive verdict against authoritarian rule, restoring democracy.
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