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बोरुंदा, पटेल नगर में मानसून की कमी से खरीफ फसलें मुरझाईं

Briovo· 17 Jul 2026, 08:38 pm IST
बोरुंदा, पटेल नगर में मानसून की कमी से खरीफ फसलें मुरझाईं

जोधपुर के बोरुंदा, पटेल नगर और आसपास के गाँवों में किसान गहरी चिंता में हैं क्योंकि पिछले 10-12 दिनों से मानसून की बारिश न होने से खरीफ की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। कई खड़ी फसलें मुरझा रही हैं, और कुछ क्षेत्रों में तो बुवाई भी शुरू नहीं हुई है। पानी की कमी से पशुओं के लिए चारे का गंभीर संकट पैदा होने की आशंका है, यदि अगले सप्ताह पर्याप्त बारिश नहीं होती है। ग्रामीण बेसब्री से बारिश के लिए आसमान की ओर देख रहे हैं, क्योंकि उनकी फसलें सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रही हैं, जिससे उनकी कृषि और पशुधन की आजीविका को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं।

AI सारांश

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मानसून की कमी से व्यापक चिंता

जोधपुर जिले के बोरुंदा, पटेल नगर और आसपास के कई गांवों में किसान अपर्याप्त मानसून वर्षा के कारण बढ़ती चिंताओं का सामना कर रहे हैं। लंबे समय तक सूखे की स्थिति ने कृषि गतिविधियों को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे किसान समुदाय में निराशा का माहौल है। कई लोगों का मानना है कि यह स्थिति सूखे के आसन्न संकट का संकेत है, जो उनकी आजीविका और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को खतरे में डाल रहा है।

खरीफ फसलें मुरझा रहीं, बुवाई ठप

लगभग 10-12 दिनों से बारिश न होने के कारण खड़ी खरीफ की फसलें बड़े पैमाने पर मुरझा रही हैं, पानी की कमी के स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा, कई गाँव सूखे की स्थिति के कारण अपनी खरीफ फसलों की बुवाई शुरू नहीं कर पाए हैं। कृषि चक्र में यह देरी पूरे मौसम की उपज को महत्वपूर्ण जोखिम में डालती है, जिससे किसानों की चिंताएँ और गहरी हो गई हैं।

पशुधन के लिए चारे का मंडराता संकट

किसानों को अपने पशुधन के लिए चारे के संभावित संकट की विशेष चिंता है, यदि अगले सप्ताह तक पर्याप्त बारिश नहीं होती है। वर्तमान स्थिति, जहाँ फसलें खराब हो रही हैं, चारे की उपलब्धता को सीधे प्रभावित करती है, जो पशुओं के भरण-पोषण के लिए महत्वपूर्ण है। यह पहले से ही चुनौतीपूर्ण कृषि परिदृश्य में एक और जटिलता जोड़ता है।

बारिश के लिए चिंतापूर्ण प्रार्थनाएं जारी

ग्रामीण किसान अपनी निराशा और चिंता स्पष्ट रूप से व्यक्त कर रहे हैं, लगातार आसमान की ओर देख रहे हैं और बारिश के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। शुक्रवार दोपहर को बोरुंदा, पटेल नगर और अन्य गांवों में हल्के बादल छाने से उनकी उम्मीदें कुछ देर के लिए जगीं, लेकिन बारिश नहीं हुई। इसने उनकी निराशा को बढ़ा दिया, जो मानसून की बारिश पर उनकी अत्यधिक निर्भरता को उजागर करता है।

क्यों मायने रखता है

मानसून की बारिश की कमी का सीधा असर कृषि उपज पर पड़ता है, जिससे किसानों के लिए आर्थिक संकट और क्षेत्र में भोजन और चारे की संभावित कमी हो सकती है। यह स्थिति वर्षा आधारित कृषि की जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशीलता को उजागर करती है।

मुख्य तथ्य

  • Affected Region: Borunda, Patel Nagar, and nearby villages in Jodhpur, Rajasthan
  • Rainfall Status: No significant rain for 10-12 days
  • Crop Impact: Kharif crops withering; sowing incomplete in some areas
  • Potential Crisis: Fodder shortage for livestock
  • Farmer Sentiment: Anxious and concerned

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