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जैसलमेर रेल पटरियों पर दर्जनों पशुओं की मौत

Briovo· 08 Jul 2026, 08:37 pm IST
जैसलमेर रेल पटरियों पर दर्जनों पशुओं की मौत

राजस्थान के जैसलमेर जिले के लाठी क्षेत्र में रेल की पटरियां जानवरों के लिए मौत का जाल बन गई हैं, जहां 2025 और 2026 के बीच दर्जनों पशुधन और वन्यजीव मारे गए हैं। ऊंटों, गायों, बकरियों, भेड़ों और लुप्तप्राय गिद्धों से जुड़ी लगातार दुर्घटनाओं ने वन्यजीव प्रेमियों, ग्रामीणों और पशुपालकों में आक्रोश पैदा कर दिया है। पटरियों के पास, जहां जानवर अक्सर चरते हैं, पर्याप्त बाड़ और सुरक्षा उपायों की कमी को इन त्रासदियों का एक प्रमुख कारण बताया गया है। आंशिक रूप से लगाई गई एक तरफा बाड़ भी अप्रभावी साबित हुई है, जिससे जानवर कभी-कभी फंस जाते हैं।

AI सारांश

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रेलवे का जानलेवा फैलाव

जैसलमेर के पशु-समृद्ध लाठी क्षेत्र से गुजरने वाली रेलवे लाइन स्थानीय पशुधन और वन्यजीवों के लिए एक बड़ा खतरा बन गई है। ओढ़ानिया से सोढाकोर तक के इस विशेष खंड पर पिछले दो वर्षों में ट्रेनों और विभिन्न जानवरों से जुड़ी कई दुखद घटनाएं देखी गई हैं।

बढ़ती पशु हानि

2025 और 2026 के बीच, राज्य पशु ऊंट, गाय, बकरी, भेड़ और यहां तक कि दुर्लभ गिद्धों सहित दर्जनों जानवर मारे गए हैं। विशिष्ट घटनाओं में 3 जुलाई, 2026 को धोलिया-लाठी में पांच मवेशियों की मौत और 23 मई, 2026 को सांवला गांव के पास तीन ऊंटों का ट्रेन की चपेट में आना शामिल है। इन लगातार होने वाली घटनाओं ने स्थानीय लोगों में व्यापक चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया है।

सुरक्षा उपायों का अभाव

इन दुखद दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण रेलवे पटरियों के किनारे प्रभावी बाड़ और सुरक्षित क्रॉसिंग का अभाव है। जानवर अक्सर पास के जंगलों में चारे की तलाश में पटरियों पर चले जाते हैं, और आने वाली ट्रेनों की चपेट में आ जाते हैं। समुदाय की बार-बार की अपीलों के बावजूद, ठोस सुरक्षा उपाय लागू नहीं किए गए हैं।

अप्रभावी बाड़बंदी

लाठी और धोलिया के बीच लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर एक तरफा बाड़ लगाई गई है, जो अप्रभावी और कभी-कभी खतरनाक साबित हुई है। जानवर अक्सर इस बाड़ में फंस जाते हैं, जिससे वे आने वाली ट्रेनों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। स्थानीय निवासी वर्तमान प्रणाली की समीक्षा और अधिक मजबूत सुरक्षा समाधानों के कार्यान्वयन की मांग कर रहे हैं।

सामुदायिक आक्रोश

जानवरों की लगातार हो रही मौतों ने वन्यजीव प्रेमियों, ग्रामीणों और पशुपालकों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। अखिल भारतीय बिश्नोई सभा के गौरीशंकर पूनिया और गोरक्षक रणवीर सिंह भाटी जैसे प्रतिनिधियों ने अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। वे इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि अधिकारियों को कई बार सूचित किया गया है, लेकिन कोई प्रभावी समाधान प्रदान नहीं किया गया है।

क्यों मायने रखता है

रेल की पटरियों पर जानवरों की लगातार हो रही मौतें मानव-वन्यजीव संघर्ष को उजागर करती हैं और पशु कल्याण तथा पारिस्थितिक संतुलन के बारे में चिंताएं बढ़ाती हैं।

मुख्य तथ्य

  • Affected Area: Lathi region, Jaisalmer, Rajasthan
  • Time Period: 2025-2026
  • Animals Affected: Camels, cows, goats, sheep, vultures
  • Reported Incidents: Dozens of animal deaths
  • Key Issue: Lack of adequate safety measures and fencing

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