Briovo

Article

Supreme CourtCourtroom RuckusDelhi PoliceLegal Proceedings

सुप्रीम कोर्ट हंगामे में दो गिरफ्तार

Briovo· 15 Jul 2026, 01:05 am IST
सुप्रीम कोर्ट हंगामे में दो गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने प्रबल प्रताप सिंह और उसके सहयोगी चंद्रभान को सुप्रीम कोर्ट में हंगामा करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। यह घटना 10 जुलाई, 2026 को हुई थी, जहां उन्होंने कथित तौर पर मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया, दस्तावेज फेंके और अदालती कार्यवाही तथा सुरक्षा कर्मियों को बाधित किया। दोनों लखनऊ विश्वविद्यालय के एलएलबी छात्र हैं। वे इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती दे रहे थे, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है, और उन्हें दो दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। आईएचबीएएस में मेडिकल परीक्षण में किसी तत्काल मनोरोग उपचार की आवश्यकता नहीं पाई गई, और आपत्तिजनक पर्चे बरामद किए गए हैं।

AI सारांश

3 bullets

कोर्टरूम में हंगामे की घटना

10 जुलाई, 2026 को सुप्रीम कोर्ट के कोर्टरूम नंबर 13 में सुनवाई के दौरान एक बड़ी गड़बड़ी हुई। याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप सिंह ने चंद्रभान के साथ मिलकर कथित तौर पर मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया, दस्तावेज फेंके और जजों को आदेश देने की कोशिश की। इसके चलते सुरक्षाकर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप किया और बाद में पुलिस जांच शुरू हुई।

आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी

दिल्ली पुलिस ने 24 वर्षीय प्रबल प्रताप सिंह, जो लखनऊ विश्वविद्यालय में एलएलबी के तीसरे वर्ष के छात्र हैं, और उनके सहयोगी चंद्रभान, 23 वर्षीय, उसी विश्वविद्यालय के एलएलबी के दूसरे वर्ष के छात्र हैं, को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों व्यक्ति उत्तर प्रदेश (क्रमशः इटावा और रायबरेली) के रहने वाले हैं। वे लखनऊ में एक प्राथमिकी के संबंध में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती दे रहे थे।

कानूनी कार्रवाई और आरोप

दिल्ली के तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन में प्रबल प्रताप सिंह और चंद्रभान के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं, जिनमें 132, 221, 224 और 3(5) शामिल हैं, के तहत न्याय और लोक सेवकों के काम में बाधा डालने के आरोप लगाए गए हैं। दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया और आगे की जांच के लिए दो दिन की पुलिस रिमांड पर रखा गया।

चिकित्सा मूल्यांकन और सबूत

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद, दोनों आरोपियों का आईएचबीएएस (मानव व्यवहार और संबद्ध विज्ञान संस्थान) में चिकित्सा परीक्षण किया गया। मेडिकल रिपोर्ट में तत्काल सक्रिय मनोरोग उपचार की कोई आवश्यकता नहीं बताई गई। पुलिस ने जांच के दौरान उनके कब्जे से आपत्तिजनक पर्चे भी बरामद किए हैं, जिनकी महत्वपूर्ण सबूत के तौर पर जांच की जा रही है।

जांच जारी है

दिल्ली पुलिस दोनों व्यक्तियों से लगातार पूछताछ कर रही है और मामले के सभी पहलुओं की गहनता से जांच कर रही है। यह घटना अदालती कार्यवाही की शुचिता और न्यायिक परिसर के भीतर व्यक्तियों के आचरण से संबंधित चिंताओं को उजागर करती है। अधिकारी उनके कृत्यों के पीछे के पूर्ण मकसद को समझने के लिए काम कर रहे हैं।

क्यों मायने रखता है

यह घटना न्यायिक परिसरों, विशेषकर सुप्रीम कोर्ट के भीतर मर्यादा और सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता को उजागर करती है। यह न्यायपालिका के प्रति सम्मान बनाए रखने और कानूनी कार्यवाही के दौरान व्यवधानों को रोकने के लिए कड़े उपायों की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

मुख्य तथ्य

  • Incident Date: July 10, 2026
  • Accused: Prabal Pratap Singh (24) & Chandrabhan (23)
  • Court involved: Supreme Court, Courtroom No. 13
  • Location: Delhi
  • Charges Filed Under: BNS Sections 132, 221, 224, 3(5) & others
  • Custody: 2-day police remand

क्या यह मददगार था?

Reader pulse

0 votes
Test yourself

Generate a 5-question quiz from this article.

चर्चा

Discussion (0)

Loading…