लालू यादव: चारा घोटाला मामले में SC ने जमानत रद्द करने से इनकार किया
सुप्रीम कोर्ट ने करोड़ों के चारा घोटाला मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने यादव की जमानत रद्द करने के लिए शीर्ष अदालत में अपील की थी। हालांकि, अदालत ने कहा कि यादव काफी समय से जमानत पर हैं, इसलिए इसमें हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट को उनकी दोषसिद्धि के खिलाफ दायर अपील पर छह महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने का भी निर्देश दिया है। यादव को 2018 में दोषी ठहराया गया था और 2021 में हाई कोर्ट द्वारा दोषसिद्धि के खिलाफ उनकी अपील पर फैसला आने तक जमानत दे दी गई थी।
AI सारांश
3 bulletsSC ने लालू यादव की जमानत बरकरार रखी
सुप्रीम कोर्ट ने करोड़ों के चारा घोटाला मामलों में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की जमानत रद्द करने की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका खारिज कर दी है। यह फैसला यादव को बड़ी राहत देता है, जो इन मामलों से सालों से जूझ रहे हैं।
ईडी की अपील खारिज
ईडी ने यादव की जमानत रद्द करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें जमानत जारी रखने का विरोध किया गया था। हालांकि, शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि चूंकि यादव काफी समय से जमानत पर हैं, इसलिए मौजूदा आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई पुख्ता कारण नहीं है।
पटना हाई कोर्ट को निर्देश
जमानत बरकरार रखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट को भी एक निर्देश जारी किया है। इसने हाई कोर्ट से चारा घोटाला मामलों में यादव की दोषसिद्धि के खिलाफ दायर अपीलों की सुनवाई छह महीने की सख्त समय-सीमा के भीतर पूरी करने का अनुरोध किया है।
मामले की पृष्ठभूमि और जमानत
लालू प्रसाद यादव को 2018 में चारा घोटाला मामलों में दोषी ठहराया गया था। इसके बाद, उन्होंने अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील दायर की थी जो हाई कोर्ट में लंबित हैं। उन्हें 2021 में जमानत दी गई थी, इस शर्त के साथ कि वह तब तक जमानत पर रहेंगे जब तक हाई कोर्ट उनकी अपीलों पर फैसला नहीं कर लेता।
क्यों मायने रखता है
यह फैसला लालू प्रसाद यादव को बड़ी राहत देता है, क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि वह लंबे समय से चल रहे चारा घोटाला मामलों में जमानत पर बने रहेंगे। यह पटना हाई कोर्ट के लिए छह महीने की समय-सीमा निर्धारित करके अपीलों के समय पर निपटारे के प्रति न्यायपालिका के दृष्टिकोण पर भी जोर देता है।
मुख्य तथ्य
- •Court Decision: Supreme Court refused to cancel Lalu Yadav's bail.
- •Case: Fodder Scam cases.
- •Parties Involved: Lalu Prasad Yadav and Enforcement Directorate (ED).
- •High Court Directive: Patna High Court to conclude appeals within six months.
- •Conviction Year: Lalu Yadav convicted in 2018.
- •Bail Granted Year: Bail granted in 2021.
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