क्रॉस-वोटिंग के बीच कांग्रेस ने कर्नाटक परिषद की 7 में से 5 सीटें जीतीं
कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी ने विधान परिषद की सात में से पांच सीटों पर जीत हासिल की, जिसमें भाजपा और जद (एस) विधायकों द्वारा क्रॉस-वोटिंग के आरोप लगे हैं। जद (एस) के उम्मीदवार गोविंदराजू को केवल 14 पहली वरीयता के वोट मिले, जो अपेक्षित 18 से कम थे, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष का पता चलता है। मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार के सहयोगी कांग्रेस उम्मीदवार विनय कार्तिक को इसका सीधा फायदा हुआ और उन्होंने आसानी से जीत हासिल की। भाजपा में भी क्रॉस-वोटिंग देखी गई, क्योंकि उम्मीदवार लिंगराज पाटिल को केवल 27 पहली वरीयता के वोट मिले, हालांकि उन्होंने अंततः जीत हासिल की। एक अन्य भाजपा उम्मीदवार, रघु कौटिल्य को 29 वोट मिले, जो अनुमान से एक कम था, जिससे आंतरिक मतदान विसंगतियों का और संकेत मिलता है।
AI सारांश
3 bulletsकांग्रेस का विधान परिषद चुनावों में दबदबा
कर्नाटक में विधान परिषद की सात सीटों में से पांच पर कांग्रेस पार्टी ने जीत हासिल की। यह महत्वपूर्ण जीत द्विवार्षिक चुनावों में पार्टी के लिए एक मजबूत प्रदर्शन को दर्शाती है, जिससे राज्य के विधायी निकाय में उसकी स्थिति मजबूत हुई है।
क्रॉस-वोटिंग के आरोप
कांग्रेस की सफलता का श्रेय, आंशिक रूप से, भाजपा और जद (एस) पार्टियों के विधायकों द्वारा कथित क्रॉस-वोटिंग को दिया जाता है। विपक्षी दलों के भीतर इस आंतरिक असंतोष ने कांग्रेस उम्मीदवारों को सीधे लाभ पहुंचाया है, जिससे वोटों का संतुलन बदल गया है।
जद (एस) को बड़ा झटका
जद (एस) के उम्मीदवार गोविंदराजू को एक बड़ा झटका लगा, उन्हें पार्टी की ताकत के आधार पर अपेक्षित 18 के मुकाबले केवल 14 पहली वरीयता के वोट मिले। यह कमी स्पष्ट रूप से इंगित करती है कि कुछ जद (एस) विधायकों ने अन्य पार्टी उम्मीदवारों को वोट दिया, जो आंतरिक दरारों को उजागर करता है।
भाजपा में भी असंतोष
भाजपा को भी आंतरिक मतदान संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा। उसके एक उम्मीदवार, लिंगराज पाटिल को केवल 27 पहली वरीयता के वोट मिले, जो न्यूनतम सीमा से थोड़ा ही कम था, हालांकि उन्होंने अंततः जीत हासिल की। एक अन्य भाजपा उम्मीदवार, रघु कौटिल्य को अपेक्षित से एक कम 29 वोट मिले, जिससे पार्टी के भीतर क्रॉस-वोटिंग को लेकर चिंताएं बढ़ गईं।
राजनीतिक गतिशीलता पर प्रभाव
इन चुनाव परिणामों और संबंधित क्रॉस-वोटिंग के आरोपों से कर्नाटक की राजनीतिक गतिशीलता में काफी बदलाव आ सकता है। भाजपा और जद (एस) के भीतर स्पष्ट आंतरिक कलह भविष्य के चुनावों की तैयारी में गठबंधनों और रणनीतियों के पुनर्मूल्यांकन को प्रेरित कर सकती है।
क्यों मायने रखता है
कर्नाटक विधान परिषद चुनाव परिणाम भाजपा और जद (एस) पार्टियों के भीतर संभावित आंतरिक कलह को उजागर करते हैं, क्योंकि कथित क्रॉस-वोटिंग ने कांग्रेस पार्टी को महत्वपूर्ण रूप से मदद की। यह परिणाम राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में भविष्य के राजनीतिक गठबंधनों और रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है।
मुख्य तथ्य
- •Congress Wins: 5 out of 7 Legislative Council seats
- •JD(S) Candidate Govindaraju Votes: 14 first preference votes (expected 18)
- •Winning Threshold: 27.63 first preference votes
- •BJP Candidate Lingaraj Patil Votes: 27 first preference votes
- •BJP Candidate Raghu Kautilya Votes: 29 first preference votes
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