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तमिलनाडु ने सुप्रीम कोर्ट में गोहत्या प्रतिबंध को चुनौती दी

Briovo· 01 Jul 2026, 10:13 am IST
तमिलनाडु ने सुप्रीम कोर्ट में गोहत्या प्रतिबंध को चुनौती दी

तमिलनाडु सरकार ने मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है, जिसमें गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था। राज्य का तर्क है कि उच्च न्यायालय का निर्देश तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम, 1958 के कानूनी ढांचे से परे है। न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन और वी. लक्ष्मणनारायण द्वारा 27 मई, 2026 को जारी उच्च न्यायालय के आदेश में बकरीद या किसी अन्य दिन गाय या बछड़े का वध न करने का निर्देश दिया गया था, यह अवैध गोहत्या को रोकने की मांग वाली याचिका पर आधारित था। राज्य सरकार का कहना है कि यह एक आंतरिक रूप से विरोधाभासी निर्णय बनाता है, जिसमें मौजूदा कानून का हवाला दिया गया है जो वृद्ध या अनुपयुक्त जानवरों के लिए विशिष्ट शर्तों के तहत गोहत्या की अनुमति देता है।

AI सारांश

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राज्य ने शीर्ष अदालत का रुख किया

तमिलनाडु सरकार ने मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की है, जिसमें गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था। राज्य सरकार का तर्क है कि उच्च न्यायालय ने मौजूदा राज्य कानून के प्रावधानों से परे जाकर यह निर्देश जारी कर अपने अधिकार का उल्लंघन किया है।

उच्च न्यायालय का वध पर प्रतिबंध

मद्रास उच्च न्यायालय ने 27 मई, 2026 के एक आदेश के माध्यम से अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि बकरीद या किसी अन्य दिन किसी भी गाय या बछड़े का वध न किया जाए। यह फैसला इंदु मक्कल काची के सूर्या द्वारा दायर एक याचिका से निकला था, जिसमें सार्वजनिक स्थलों पर कथित अवैध गोहत्या पर अंकुश लगाने की मांग की गई थी।

तमिलनाडु सरकार ने कानूनी ढांचा बताया

तमिलनाडु सरकार का कहना है कि उच्च न्यायालय का पूर्ण प्रतिबंध तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम, 1958 की धारा 4 का खंडन करता है। यह अधिनियम कुछ विशिष्ट शर्तों के तहत गायों के वध की अनुमति देता है, जैसे कि 10 वर्ष से अधिक आयु या काम या प्रजनन के लिए अनुपयुक्त प्रमाणित होना।

संवैधानिक और धार्मिक संदर्भ

उच्च न्यायालय के निर्णय में संविधान के अनुच्छेद 48 का उल्लेख किया गया था, जो राज्यों को गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने के लिए प्रोत्साहित करता है। इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के उन फैसलों का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि गोहत्या बकरीद के लिए एक आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है, जिससे उसके निर्णय को और बल मिला।

राज्य स्वायत्तता पर प्रभाव

तमिलनाडु सरकार द्वारा यह अपील विधायी मामलों में न्यायिक अतिरेक की चिंताओं को रेखांकित करती है और मौजूदा कानूनों की व्याख्या को चुनौती देती है। इसका परिणाम संवेदनशील मुद्दों पर राज्य-स्तरीय नियमों और न्यायिक निर्देशों के बीच संतुलन को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकता है।

क्यों मायने रखता है

यह कानूनी चुनौती भारत में गोहत्या से संबंधित धार्मिक प्रथाओं, पशु कल्याण और राज्य के नियमों के बीच चल रहे संघर्ष को उजागर करती है, जो पशु संरक्षण कानूनों और संवैधानिक निर्देशों की भविष्य की व्याख्याओं के लिए एक मिसाल कायम कर सकती है।

मुख्य तथ्य

  • Challenging Authority: Tamil Nadu Government
  • Challenged Order: Madras High Court's blanket ban on cow slaughter
  • Date of HC Order: May 27, 2026
  • Legal Basis of TN Govt.: Tamil Nadu Animal Preservation Act, 1958 (Section 4)
  • High Court Judges: Justice GR Swaminathan and Justice V Lakshminarayan
  • Petitioner in HC: Surya, Indu Makkal Katchi General Secretary

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