TADA दोषी की रिहाई के खिलाफ बंगाल सरकार SC पहुँची
पश्चिम बंगाल सरकार ने 1993 के बोबाजार बम धमाके के दोषी मोहम्मद राशिद खान की समय से पहले रिहाई के दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। राज्य सरकार का तर्क है कि यह एक बहुत गंभीर आतंकवादी अपराध है और सेंटेंस रिव्यू बोर्ड (SSRB) ने भी उसकी रिहाई का विरोध किया था। खान को कोलकाता धमाके में 69 लोगों की मौत के लिए TADA के तहत दोषी ठहराया गया था। उच्च न्यायालय ने खान के 33 साल जेल में रहने, अच्छे आचरण और सुधारात्मक न्याय को उसकी रिहाई के कारणों के रूप में उद्धृत किया था। सुप्रीम कोर्ट जल्द ही इस मामले की सुनवाई करेगा।
AI सारांश
3 bulletsबंगाल ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी
पश्चिम बंगाल सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जिसमें मोहम्मद राशिद खान की समय से पहले रिहाई का निर्देश दिया गया था। खान को कोलकाता में 1993 के बोबाजार बम धमाकों के संबंध में दोषी ठहराया गया था। राज्य सरकार इस अपराध की गंभीरता पर जोर दे रही है, इसे एक गंभीर आतंकवादी कृत्य बता रही है।
SSRB ने रिहाई का विरोध किया
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि सेंटेंस रिव्यू बोर्ड (SSRB) ने पहले भी खान की समय से पहले रिहाई का विरोध किया था। यह विरोध गंभीर आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े मामलों में नरमी बरतना के खिलाफ राज्य के लगातार रुख को रेखांकित करता है। अपील उच्च न्यायालय के निर्णय और राज्य के समीक्षा बोर्ड की सिफारिश के बीच विरोधाभास को उजागर करती है।
रिहाई के लिए हाईकोर्ट का तर्क
दिल्ली उच्च न्यायालय ने खान की रिहाई की याचिका को स्वीकार कर लिया था, जिसमें उसकी 33 साल से अधिक की लंबी कैद को ध्यान में रखा गया था। अदालत ने जेल में उसके अच्छे आचरण और सुधारात्मक न्याय के सिद्धांत को भी ध्यान में रखा। यह निर्णय पुनर्वास और लंबे कारावास के प्रभाव पर न्यायिक जोर को दर्शाता है।
1993 बोबाजार बम धमाके
मोहम्मद राशिद खान को 16 मार्च 1993 को कोलकाता में हुए बोबाजार बम धमाकों में शामिल होने के लिए 31 अगस्त 2001 को दोषी ठहराया गया था। इस भयानक घटना में 69 लोगों की जान चली गई थी और आवासीय इमारतों को व्यापक नुकसान हुआ था। धमाके कथित तौर पर स्थानीय अपराधी राशिद खान द्वारा जमा किए गए भारी मात्रा में विस्फोटकों से जुड़े थे।
तत्काल सुनवाई का अनुरोध
पश्चिम बंगाल सरकार के वकील ने न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया। वकील ने अपराध की अत्यधिक गंभीरता का हवाला देते हुए अदालत से 22 जून को सुनवाई निर्धारित करने का आग्रह किया। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह त्वरित सुनवाई के इस अनुरोध पर विचार करेगा।
क्यों मायने रखता है
यह मामला न्यायिक सुधारात्मक दृष्टिकोण और गंभीर आतंकी अपराधों पर राज्य की चिंताओं के बीच संघर्ष को उजागर करता है, जो भविष्य के TADA मामलों के लिए एक मिसाल कायम करेगा और हाई-प्रोफाइल आतंकी दोषियों के संबंध में न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास को प्रभावित करेगा।
मुख्य तथ्य
- •Convict's Name: Mohammed Rashid Khan
- •Case: 1993 Bowbazar Bomb Blast
- •Deaths in Blast: 69 people
- •Years in Prison: 33 years
- •Act: TADA (Terrorist and Disruptive Activities (Prevention) Act)
- •Court that ordered release: Delhi High Court
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