पंचायत चुनाव में देरी: पूर्व विधायक ने दायर की अवमानना याचिका
राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में देरी को लेकर पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार और चुनाव आयोग ने 31 जुलाई, 2026 तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की कोर्ट द्वारा निर्धारित समय सीमा का पालन नहीं किया। इस कानूनी चुनौती से उम्मीदवारों और मतदाताओं में अनिश्चितता बढ़ गई है, क्योंकि अब चुनाव अक्टूबर-दिसंबर 2026 तक टलने की संभावना है। देरी का कारण आरक्षण के लिए डेटा संग्रह की जटिल प्रक्रिया को बताया जा रहा है, जिससे ग्रामीण विकास प्रभावित हो रहा है।
AI सारांश
3 bulletsअवमानना याचिका दायर
पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने राजस्थान हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है। याचिका राज्य चुनाव आयोग और सरकारी अधिकारियों को अदालत द्वारा निर्धारित 31 जुलाई, 2026 तक स्थानीय निकाय चुनाव कराने में विफल रहने का आरोप लगाती है।
समय सीमा चूकने का आरोप
याचिका में दावा किया गया है कि 31 जुलाई, 2026 तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के अदालत के स्पष्ट आदेशों के बावजूद, राज्य सरकार और चुनाव आयोग ने अभी तक चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं की है। इस देरी से हजारों उम्मीदवारों और ग्रामीण मतदाताओं में अनिश्चितता पैदा हो गई है जो चुनावों की तैयारी कर रहे थे।
वरिष्ठ अधिकारी शामिल
लोढ़ा की याचिका में राज्य चुनाव आयोग, पंचायती राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग के वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को विशेष रूप से नामित किया गया है। यह अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और दंड की मांग करती है, जिन पर कथित तौर पर चुनाव में देरी करने और न्यायिक आदेशों का पालन न करने का आरोप है।
देरी का कारण डेटा समस्याएँ
देरी का मुख्य कारण प्रशासनिक डेटा संग्रह की जटिल प्रक्रिया है, विशेष रूप से लगभग 400 ग्राम पंचायतों में एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं के लिए 50% आरक्षण से संबंधित है। इस व्यापक डेटा संग्रह और संशोधन में उम्मीद से अधिक समय लग गया है, जिससे चुनाव वर्ष के अंत तक टल गए हैं।
पिछली अदालती फटकार
यह अदालत के हस्तक्षेप का पहला मामला नहीं है; अप्रैल में, राज्य चुनाव आयोग को सरकार से समय पर डेटा न मिलने के कारण चुनाव में देरी के लिए हाईकोर्ट से माफी मांगनी पड़ी थी। जब सरकार ने बोर्ड परीक्षाओं और कर्मचारियों की कमी का हवाला देकर दिसंबर तक चुनाव स्थगित करने का सुझाव दिया था, तब अदालत ने पहले भी कड़ी नाराजगी व्यक्त की थी।
ग्रामीण उम्मीदवार स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं
चल रही देरी ने ग्रामीण उम्मीदवारों को काफी प्रभावित किया है, जो महीनों से प्रचार कर रहे हैं और पैसा खर्च कर रहे हैं। उन्हें अब अंतिम आरक्षण सूची के लिए लंबा इंतजार करना होगा, जिसके अगस्त 2026 के अंतिम सप्ताह तक आने की उम्मीद है, इससे पहले कि चुनावी माहौल फिर से गति पकड़ सके।
क्यों मायने रखता है
स्थानीय निकाय चुनावों में देरी से ग्रामीण प्रशासन और विकास प्रभावित होता है, जिससे अदालती आदेशों के समय पर पालन और प्रशासनिक दक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
मुख्य तथ्य
- •Petitioner: Former MLA Sanyam Lodha
- •Court Deadline: July 31, 2026 (for election completion)
- •Expected Delay: October-December 2026
- •Affected Elections: Panchayat & Urban Local Body Elections
- •Reason for Delay: Complex data collection for reservation (especially 50% for women, SC, ST, OBC)
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