जैसलमेर: सुल्ताना में ग्रामीणों ने पुनर्जीवित कीं प्राचीन बेरियां
जैसलमेर के सुल्ताना गांव में ग्रामीण पारंपरिक 'बेरियों' (छोटे कुएं) को पुनर्जीवित कर जल संरक्षण की प्राचीन प्रथाओं को फिर से अपना रहे हैं। नहर के पानी के आने के बाद उपेक्षित हुई ये संरचनाएं, विशेष रूप से सूखे के दौरान पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए महत्वपूर्ण हैं। स्वैच्छिक श्रम और वित्तीय सहायता वाली इस पहल का उद्देश्य भविष्य में संभावित जल संकट का मुकाबला करना और क्षेत्र की अमूल्य जल विरासत को बनाए रखना है। विशेषज्ञ कारीगर इन कुओं की सफाई और गहरा करने में सहायता कर रहे हैं, लगभग 20 ऐसी संरचनाओं की पहचान पुनरुद्धार के लिए की गई है। इस प्रयास से सुल्ताना में एक बड़े तालाब और उसके जलग्रहण क्षेत्र को बहाल करने की उम्मीद भी जगी है।
AI सारांश
3 bulletsसामुदायिक प्रयासों से पुनरुद्धार
जैसलमेर के सुल्ताना गांव के ग्रामीणों ने वर्षों से उपेक्षित पड़ी पारंपरिक 'बेरियों' को पुनर्जीवित करने का कार्य सामूहिक रूप से किया है। यह पहल जल संरक्षण की तत्काल आवश्यकता को देखते हुए स्वैच्छिक श्रम और वित्तीय योगदान के माध्यम से महत्वपूर्ण सामुदायिक भागीदारी से चिह्नित है।
ऐतिहासिक महत्व और उपेक्षा
ये 'बेरियां' कभी पीने के पानी का एक महत्वपूर्ण स्रोत थीं, खासकर सूखे के दौरान, और दो से तीन वर्षों तक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करती थीं। हालांकि, नहर के पानी के आगमन के साथ इनका उपयोग काफी कम हो गया, जिससे वे उपेक्षित हो गईं और अंततः मिट्टी के नीचे दब गईं।
विशेषज्ञों की सहायता और कार्यक्षेत्र
इन प्राचीन कुओं की सफाई और गहरा करने के लिए कुशल कारीगरों को लगाया जा रहा है, जिसमें ग्रामीण सुरक्षा की दृष्टि से निगरानी कर रहे हैं। वरिष्ठ भूजल वैज्ञानिक डॉ. नारायण दास इणखिया ने तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया है, और क्षेत्र में लगभग 20 खुली 'बेरियों' की पहचान की है जिन्हें पुनर्जीवित किया जा सकता है।
भविष्य की उम्मीदें: तालाब और आगोर
'बेरी' पुनरुद्धार परियोजना की सफलता ने सुल्ताना में अन्य महत्वपूर्ण जल निकायों की बहाली की उम्मीद जगाई है। अब एक बड़े तालाब और उसके संबंधित जलग्रहण क्षेत्र को फिर से जीवंत करने की एक आशावादी संभावना है, जो गांव की जल विरासत और संस्कृति के लिए महत्वपूर्ण हैं।
क्यों मायने रखता है
जैसलमेर जैसे शुष्क क्षेत्रों में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'बेरियों' जैसे पारंपरिक जल स्रोतों का पुनरुद्धार महत्वपूर्ण है, खासकर जलवायु परिवर्तन और जल संकट के बारे में बढ़ती चिंताओं के साथ। यह सामुदायिक-नेतृत्व वाली पहल जल संरक्षण और स्थानीय विरासत के संरक्षण के लिए एक स्थायी मॉडल प्रदर्शित करती है।
मुख्य तथ्य
- •Location: Sultana Village, Jaisalmer
- •Initiative Type: Community-led water conservation
- •Structures Revived: Traditional 'beris' (small wells)
- •Approximate Number of Beris: 20 (to be revived)
- •Key Expert Involved: Dr. Narayan Das Inkhiya, senior groundwater scientist
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