कश्मीरी कार्यकर्ता, पत्रकार को सालों बाद मिली जमानत
कश्मीरी मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज और पत्रकार इरफान मेहराज को "आतंकवाद" के वित्तपोषण के आरोप में कई सालों तक जेल में रहने के बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया है। दोनों को नई दिल्ली जेल से रिहा किया गया। भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) उनकी जमानत रद्द करने की कोशिश कर रही है, लेकिन दिल्ली उच्च न्यायालय ने रिहाई आदेश को निलंबित करने से इनकार कर दिया। दोनों पर जम्मू कश्मीर कोएलिशन ऑफ सिविल सोसाइटी (JKCCS) का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों को वित्तपोषित करने और अलगाववाद को बढ़ावा देने का आरोप है, हालांकि वे इन आरोपों से इनकार करते हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों ने लगातार उनकी रिहाई की मांग की है, यह कहते हुए कि उन्हें उनके मानवाधिकारों के काम के लिए जेल में डाला गया था।
AI सारांश
3 bulletsकानूनी चुनौती के बीच मिली जमानत
प्रमुख कश्मीरी मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज और पत्रकार इरफान मेहराज को जमानत मिल गई है और उन्हें नई दिल्ली की जेल से रिहा कर दिया गया है। यह रिहाई कठोर 'आतंकवाद विरोधी' कानूनों के तहत सालों की हिरासत के बाद हुई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) सक्रिय रूप से उनकी जमानत रद्द करने की कोशिश कर रही है, जिससे कानूनी लड़ाई और तेज हो गई है।
आरोप और इनकार
जम्मू कश्मीर कोएलिशन ऑफ सिविल सोसाइटी (JKCCS) के कार्यक्रम समन्वयक परवेज और उसी समूह के लिए एक स्वतंत्र पत्रकार और शोधकर्ता मेहराज पर 'आतंकवाद के वित्तपोषण' और 'अलगाववादी एजेंडा को बढ़ावा देने' के आरोप हैं। ये आरोप भारत के कड़े 'आतंकवाद विरोधी' कानूनों के तहत आते हैं। दोनों पुरुष सभी आरोपों से दृढ़ता से इनकार करते हैं, अपनी बेगुनाही का दावा करते हैं।
अदालती प्रतिबंध और अपीलें
एक निचली अदालत ने शुरू में जमानत दी थी, लेकिन NIA ने इस फैसले के खिलाफ अपील की। दिल्ली उच्च न्यायालय ने उनकी रिहाई को निलंबित करने से इनकार कर दिया, लेकिन उनकी गतिविधियों और आवाजाही पर कड़े प्रतिबंध लगाए। उन्हें मुकदमे के लिए नई दिल्ली में अपने रहने की व्यवस्था करनी होगी और कश्मीर यात्रा करने से प्रतिबंधित किया गया है।
अंतर्राष्ट्रीय आक्रोश और मानवाधिकार चिंताएँ
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय सहित अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों ने लगातार उनकी रिहाई की मांग की है, और उनकी गिरफ्तारियों को उनके मानवाधिकार कार्यों के लिए प्रतिशोध बताया है। इंटरनेशनल फेडरेशन फॉर ह्यूमन राइट्स और वर्ल्ड ऑर्गनाइजेशन अगेंस्ट टॉर्चर जैसे संगठनों ने आरोपों को 'मनगढ़ंत' और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। वे भारतीय अधिकारियों से मामले को रद्द करने का आग्रह करते हैं।
कश्मीर में व्यापक कार्रवाई
ये गिरफ्तारियां 2019 से भारतीय-प्रशासित कश्मीर में कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और असंतुष्टों पर व्यापक कार्रवाई का हिस्सा हैं। क्षेत्र की स्वायत्तता रद्द होने के बाद से, 'आतंकवाद विरोधी' कानूनों के तहत हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस स्थिति ने क्षेत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिक स्वतंत्रता के संबंध में महत्वपूर्ण चिंताएं पैदा की हैं।
क्यों मायने रखता है
खुर्रम परवेज और इरफान मेहराज की रिहाई, चल रही कानूनी चुनौतियों के बावजूद, कश्मीर में कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के सामने आने वाले जटिल कानूनी परिदृश्य को उजागर करती है। यह भारत के "आतंकवाद विरोधी" कानूनों और क्षेत्र में उनके आवेदन पर नए सिरे से ध्यान आकर्षित करती है।
मुख्य तथ्य
- •Individuals Released: Khurram Parvez (activist) and Irfan Mehraj (journalist)
- •Charges: Terrorism financing, secessionist agenda
- •Arresting Agency: National Investigation Agency (NIA)
- •Release Status: Released on bail, under court-imposed restrictions
- •Location of Release: New Delhi jail
- •Years Imprisoned: Parvez arrested 2021, Mehraj arrested 2023
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