बॉम्बे HC ने बांग्लादेशी महिला और बच्चों की हिरासत पर मुंबई पुलिस से जवाब मांगा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस से एक कथित बांग्लादेशी नागरिक सबीना और उनके तीन नाबालिग बच्चों को हिरासत में लेने के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने उनके निर्वासन पर रोक लगा दी और बच्चों को उनके पिता को सौंपने का आदेश दिया, साथ ही मां से नियमित मुलाकात की अनुमति भी दी। सबीना के पति और सास द्वारा दायर याचिका में तर्क दिया गया है कि बच्चे भारत में पैदा हुए हैं और उनके पास सहायक दस्तावेज हैं। अदालत ने राज्य को अपने कार्यों को सही ठहराने के लिए समय दिया है, जिसमें प्रक्रियात्मक निष्पक्षता और मानवीय आधारों, खासकर एक बच्चे के डेंगू से पीड़ित होने पर चिंताएं उजागर की गई हैं।
AI सारांश
3 bulletsउच्च न्यायालय ने मांगा स्पष्टीकरण
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कथित बांग्लादेशी नागरिक सबीना और उनके तीन नाबालिग बच्चों की हिरासत के संबंध में महाराष्ट्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। यह निर्देश महिला के पति और सास द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान आया, जिसमें उनकी हिरासत की वैधता को चुनौती दी गई थी।
हिरासत का विवरण और आरोप
सबीना और उनके बच्चों को तिलक नगर पुलिस ने मुंबई में वीजा की अवधि से अधिक रुकने के आरोप में हिरासत में लिया था। हालांकि, याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि सबीना ने 2011 में एक भारतीय नागरिक से शादी की थी और तीनों बच्चे भारत में पैदा हुए हैं, जिनके पास उनके भारतीय जन्म को साबित करने वाले दस्तावेज हैं।
अदालत ने रिहाई का निर्देश दिया और निर्वासन पर रोक लगाई
मामले के निर्णय लंबित रहने तक, उच्च न्यायालय ने सबीना और उनके नाबालिग बच्चों के निर्वासन पर स्पष्ट रूप से रोक लगा दी है। इसके अलावा, इसने तीनों बच्चों को उनके पिता को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया, यह सुनिश्चित करते हुए कि वे हिरासत केंद्र में अपनी मां से नियमित रूप से मिल सकें।
प्रक्रियात्मक निष्पक्षता और बच्चे के स्वास्थ्य पर चिंताएं
याचिकाकर्ताओं ने प्रक्रियात्मक मनमानी पर चिंता जताई, इस बात पर प्रकाश डाला कि परिवार की गिरफ्तारी से पहले कोई नोटिस या हिरासत आदेश जारी नहीं किया गया था। तात्कालिकता को बढ़ाते हुए, पांच साल का एक बच्चा डेंगू से पीड़ित था और उसे सायन अस्पताल में भर्ती कराया गया था, फिर भी परिवार की पहुंच प्रतिबंधित थी।
राज्य 21 जुलाई तक अपने कार्यों को सही ठहराए
बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को हिरासत को उचित ठहराते हुए औपचारिक जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है। इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को निर्धारित है, तब तक राज्य को सबीना और उनके बच्चों के खिलाफ की गई कार्रवाई के लिए अपना तर्क प्रस्तुत करना होगा।
क्यों मायने रखता है
यह मामला हिरासत प्रक्रियाओं पर न्यायिक निरीक्षण और कथित अवैध प्रवासियों, विशेषकर नाबालिग बच्चों के शामिल होने पर उनके अधिकारों को उजागर करता है, मानवीय विचारों पर जोर देता है।
मुख्य तथ्य
- •Court Order: Bombay High Court barred deportation of Sabina and her children.
- •Children's Custody: Children to be released to their father.
- •Police Station: Tilak Nagar police detained the family.
- •Next Hearing: Case scheduled for July 21.
- •Children's Origin: Petitioners claim all three children were born in India.
- •Child's Illness: One child, 5, was suffering from dengue.
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