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रामदेवरा में गोडावण के नन्हे चूजे रिवाइल्डिंग टनल में स्थानांतरित

Briovo· 26 Jul 2026, 08:40 pm IST
रामदेवरा में गोडावण के नन्हे चूजे रिवाइल्डिंग टनल में स्थानांतरित

जैसलमेर के रामदेवरा स्थित गोडावण संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र में तीन नन्हे गोडावण चूजों को एक अत्याधुनिक रिवाइल्डिंग टनल में सफलतापूर्वक स्थानांतरित किया गया है। यह पहल इन लुप्तप्राय पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में जीवन के लिए तैयार करने और उनकी जंगली आबादी को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 9.25 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 160x64x14 मीटर की यह टनल चूजों को लगभग चार महीने तक रखेगी। इस दौरान, विशेषज्ञ उनके स्वास्थ्य, व्यवहार और मरुस्थलीय वातावरण के अनुकूलन की निगरानी करेंगे, ताकि प्राकृतिक परिवेश में छोड़े जाने से पहले वे शिकार और उत्तरजीविता के प्राकृतिक कौशल सीख सकें।

AI सारांश

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अत्याधुनिक रिवाइल्डिंग टनल का उद्घाटन

जैसलमेर के रामदेवरा स्थित गोडावण संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र में पहली बार तीन नन्हे गोडावण चूजों को एक अत्याधुनिक रिवाइल्डिंग टनल में स्थानांतरित किया गया है। यह विशेष सुविधा बंदी बनाए गए चूजों को उनके प्राकृतिक मरुस्थलीय वातावरण में सफलतापूर्वक ढलने के लिए तैयार करने का लक्ष्य रखती है, जो कि विलुप्त होने की कगार पर खड़ी इस प्रजाति के लिए एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

संरक्षण के लिए रणनीतिक निवेश

160x64x14 मीटर में फैली रिवाइल्डिंग टनल का निर्माण राजस्थान स्टेट रोड डेवलपमेंट एंड कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन (आरएसआरडीसी) द्वारा दो वर्षों में किया गया, जिसकी लागत लगभग ₹9.25 करोड़ आई। यह बड़ा निवेश गोडावण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो चूजों को महत्वपूर्ण उत्तरजीविता कौशल विकसित करने के लिए एक नियंत्रित वातावरण प्रदान करता है।

गहन निगरानी और प्रशिक्षण अवधि

R-9, R-10 और R-11 के रूप में पहचाने गए तीनों चूजे लगभग चार महीने तक टनल में रहेंगे। इस अवधि के दौरान, वन विभाग के विशेषज्ञों की एक टीम उनके स्वास्थ्य, व्यवहार और अनुकरणीय प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुकूलन की लगातार निगरानी करेगी। टनल मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र को दोहराती है, जिससे चूजों को स्थानीय वनस्पति, मौसम के पैटर्न और कीड़े-मकोड़ों से परिचित कराया जाता है, जो उनके प्राकृतिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

जंगली रिहाई की तैयारी

इस कार्यक्रम का प्राथमिक उद्देश्य गोडावण चूजों को जंगल में स्वतंत्र अस्तित्व के लिए आवश्यक भोजन ढूंढने, पर्यावरणीय अनुकूलन और शिकारी से बचने के कौशल से लैस करना है। एक बार जब वे स्वतंत्र रूप से पनपने में सक्षम समझे जाएंगे, तो उन्हें धीरे-धीरे डेजर्ट नेशनल पार्क के भीतर उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा। इस रणनीतिक रिहाई का उद्देश्य इस गंभीर रूप से लुप्तप्राय पक्षी की जंगली आबादी को मजबूत करना है।

गोडावण पुनर्वनीकरण प्रयासों को बढ़ावा

यह पहल भारत के ग्रेट इंडियन बस्टर्ड पुनर्वनीकरण कार्यक्रम को एक महत्वपूर्ण बढ़ावा देती है। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि गोडावण दुनिया के सबसे लुप्तप्राय पक्षियों में से एक है, और ऐसे संरक्षण, वैज्ञानिक प्रजनन और पुनर्वनीकरण प्रक्रियाएं इसके विलुप्त होने को रोकने और प्रजातियों के दीर्घकालिक अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

क्यों मायने रखता है

यह रिवाइल्डिंग परियोजना गंभीर रूप से लुप्तप्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है, जिसका लक्ष्य वैज्ञानिक प्रजनन और प्राकृतिक आवासों में पुनर्वास के माध्यम से इसकी जंगली आबादी को बढ़ाना है, जिससे इसके विलुप्त होने को रोका जा सके।

मुख्य तथ्य

  • Location: Ramdevra, Jaisalmer, Rajasthan
  • Affected Species: Great Indian Bustard (GIB)
  • Number of Chicks Transferred: Three (R-9, R-10, R-11)
  • Tunnel Dimensions: 160 x 64 x 14 meters
  • Project Cost (Tunnel): ₹9.25 crore
  • Monitoring Period: Approximately 4 months

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