DRDO के स्वदेशी ‘नेत्र’ AEW&C सिस्टम को मिली अंतिम मंजूरी
DRDO ने भारतीय वायुसेना को स्वदेशी नेत्र एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) प्रणाली का अंतिम परिचालन क्लीयरेंस (FOC) प्रमाणपत्र सौंप दिया है। यह प्रणाली अब पूरी तरह से परिचालन के लिए तैयार है, जिससे हवाई निगरानी, स्थितिजन्य जागरूकता और युद्ध प्रबंधन क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इस प्रणाली ने ऑपरेशन सिंदूर और बालाकोट हवाई कार्रवाई के दौरान अपनी विश्वसनीयता साबित की थी। DRDO ने भारतीय वायुसेना और रक्षा उद्योगों के सहयोग से इसे विकसित किया है। 2017 में इसका प्रारंभिक क्लीयरेंस हुआ था और लगातार परीक्षणों के बाद अब इसे अंतिम परिचालन स्वीकृति मिली है। नेत्र प्रणाली एक "उड़ता रडार" है जो सैकड़ों किलोमीटर दूर तक हवाई गतिविधियों पर नज़र रख सकता है।
AI सारांश
3 bulletsनेत्र प्रणाली ने हासिल की पूर्ण परिचालन तत्परता
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने भारतीय वायुसेना को स्वदेशी नेत्र एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) प्रणाली का अंतिम परिचालन क्लीयरेंस (FOC) प्रमाणपत्र सौंप दिया है। यह महत्वपूर्ण उपलब्धि पुष्टि करती है कि नेत्र प्रणाली अब पूर्ण परिचालन तैनाती के लिए पूरी तरह तैयार है और भारतीय वायुसेना की पूरी क्षमता में एकीकृत होने के लिए तैयार है। बेंगलुरु में वायुसेना उप प्रमुख एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती की अध्यक्षता में हुए इस समारोह में DRDO, IAF, और रक्षा उद्योग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
हवाई टोही और युद्ध क्षमताओं में वृद्धि
भारतीय वायुसेना में नेत्र प्रणाली को पूरी तरह से शामिल करने से हवाई निगरानी, स्थितिजन्य जागरूकता और समग्र युद्ध प्रबंधन क्षमताओं में पर्याप्त वृद्धि होने की उम्मीद है। एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने ऑपरेशन सिंदूर और बालाकोट हवाई हमलों जैसे महत्वपूर्ण मिशनों के दौरान प्रणाली की सिद्ध विश्वसनीयता और प्रभावशीलता पर प्रकाश डाला। उन्होंने जोर दिया कि नेत्र जैसी स्वदेशी तकनीक भारतीय सेनाओं को बदलते युद्ध परिदृश्यों के अनुरूप अपने उपकरणों और प्रणालियों को तेजी से अनुकूलित करने की सुविधा प्रदान करती है।
विकास यात्रा और प्रारंभिक परिचालन क्लीयरेंस
DRDO के एयरोनॉटिक्स क्लस्टर की महानिदेशक डॉ. राजालक्ष्मी मेनन ने नेत्र परियोजना की विस्तृत विकास यात्रा और इसमें आई तकनीकी चुनौतियों का विवरण दिया। उन्होंने बताया कि बेहतर सिस्टम इंजीनियरिंग और सटीक निर्णयों के कारण सभी उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए गए। नेत्र प्रणाली को पहली बार 2017 में प्रारंभिक परिचालन क्लीयरेंस (IOC) मिला था, जिसके बाद निरंतर परीक्षण और सुधार के बाद इसे वर्तमान अंतिम परिचालन स्वीकृति मिली है।
'फ्लाइंग रडार' की मुख्य विशेषताएं
नेत्र को भारत की स्वदेशी एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल प्रणाली के रूप में वर्णित किया गया है और इसे अक्सर "आसमान में तीसरी आंख" या "फ्लाइंग रडार" कहा जाता है। यह एक बड़े विमान पर लगे उन्नत रडार का उपयोग करके सैकड़ों किलोमीटर दूर तक हवाई गतिविधियों की निगरानी करता है। यह महत्वपूर्ण निगरानी क्षमता इसे दुश्मन के लड़ाकू विमानों, ड्रोनों, हेलीकॉप्टरों और क्रूज मिसाइलों का पहले से पता लगाने की अनुमति देती है, जिससे वायुसेना को समय पर चेतावनी मिलती है।
कमांड सेंटर और वास्तविक समय डेटा रिले
अपनी निगरानी कार्यक्षमता से परे, नेत्र प्रणाली एक उड़ते हुए कमांड सेंटर के रूप में भी कार्य करती है। यह सुरक्षित डेटा लिंक के माध्यम से जमीन पर स्थित कमांड सेंटरों और लड़ाकू विमानों को वास्तविक समय की जानकारी प्रदान करती है। यह कार्यक्षमता भारतीय वायुसेना की दुश्मन के लक्ष्यों की पहचान करने, ट्रैक करने और जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता को काफी तेज करती है, जिससे हवाई युद्ध में उनकी परिचालन प्रतिक्रिया समय और प्रभावशीलता मजबूत होती है।
क्यों मायने रखता है
नेत्र AEW&C प्रणाली भारत की हवाई निगरानी और युद्ध की तैयारी को बहुत बढ़ाती है, जिससे भारतीय वायुसेना को हवाई खतरों का पता लगाने और उनका जवाब देने में महत्वपूर्ण लाभ मिलता है।
मुख्य तथ्य
- •System Name: Netra Airborne Early Warning & Control (AEW&C)
- •Developing Agency: DRDO, Indian Air Force, Indian defense industries
- •Operational Clearance Status: Final Operational Clearance (FOC)
- •Initial Clearance Year: 2017
- •Function: Aerial surveillance, situational awareness, combat management, flying radar
- •Key Capabilities: Detects enemy aircraft, drones, helicopters, cruise missiles; acts as a command center; provides real-time data
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