जयपुर नॉर्थ रिंग रोड: भूमि अधिग्रहण में देरी से किसान चिंतित
प्रस्तावित जयपुर नॉर्थ रिंग रोड परियोजना से प्रभावित गांवों के किसान, भूमि अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर स्पष्टता के अभाव में खरीफ फसल की बुवाई को लेकर असमंजस में हैं। मिट्टी के नमूने लेने और संभावित क्षेत्रों का सीमांकन करने के बावजूद, किसानों को अधिग्रहण नोटिस नहीं मिले हैं, जिससे खेती या सड़क निर्माण को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। उन्हें डर है कि यदि वे अभी बुवाई करते हैं और बाद में निर्माण शुरू होता है तो नुकसान होगा, या यदि वे बुवाई नहीं करते तो पूरा सीज़न बर्बाद हो जाएगा। किसान निर्माण शुरू होने से पहले परियोजना की समय-सीमा और बाजार मूल्य का छह गुना उचित मुआवजे की तत्काल स्पष्टता की मांग कर रहे हैं।
AI सारांश
3 bulletsबुवाई के मौसम को लेकर किसान असमंजस में
राजपुरा, कोदर और केसरी सिंहपुरा जैसे गांवों के किसान, जो जयपुर नॉर्थ रिंग रोड परियोजना से प्रभावित हैं, खरीफ फसल को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय का सामना कर रहे हैं। बुवाई का मौसम शुरू होने के साथ, उन्हें इस बात पर स्पष्टता नहीं है कि अपनी भूमि पर खेती करें या सड़क निर्माण की तैयारी करें। यह अनिश्चितता उनकी कृषि आय और पूरे कृषि मौसम के लिए खतरा उत्पन्न कर रही है।
आधिकारिक सूचना का अभाव
प्रस्तावित परियोजना क्षेत्र की मिट्टी के नमूने लेने और प्रारंभिक सीमांकन के बावजूद, किसानों को अभी तक भूमि अधिग्रहण के आधिकारिक नोटिस नहीं मिले हैं। अधिकारियों की ओर से इस संचार की कमी एक बड़ी चिंता का विषय है, जिससे वे परियोजना की सटीक समय-सीमा और अगले कदमों के बारे में अनभिज्ञ हैं। किसानों को इस बात की चिंता है कि यदि बुवाई के बाद निर्माण शुरू होता है तो उन्हें संभावित नुकसान होगा।
उचित मुआवजे की मांग
कैलाशचंद चौधरी सहित किसान नेता सरकार से नॉर्थ रिंग रोड निर्माण अनुसूची और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को तुरंत स्पष्ट करने का आग्रह कर रहे हैं। वे इस बात पर जोर देते हैं कि किसानों को उचित और समय पर मुआवजा दिए बिना निर्माण शुरू नहीं किया जाना चाहिए। एक प्रमुख मांग अधिग्रहित भूमि के बाजार मूल्य के छह गुना के बराबर मुआवजे की है।
परियोजना का दायरा और लागत
जयपुर नॉर्थ रिंग रोड एक 100 किलोमीटर लंबा, 6-लेन कॉरिडोर प्रस्तावित है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग ₹3,000 करोड़ है। यह दिल्ली रोड, कालवाड़, जोबनेर और चोमू जैसे क्षेत्रों को जोड़ेगा, जिसका उद्देश्य शहर के भारी यातायात को कम करना है। परियोजना को दो चरणों में प्रस्तावित किया गया है: आगरा रोड से सी-जोन बाईपास तक 45 किमी, और बाईपास से अजमेर रोड तक 52 किमी।
बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण आवश्यक
इस महत्वाकांक्षी नॉर्थ रिंग रोड के निर्माण के लिए, लगभग 662 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करना होगा। इस व्यापक अधिग्रहण से 150 से अधिक गांव और उनकी कृषि भूमि प्रभावित होने की उम्मीद है। इस प्रक्रिया के संबंध में स्पष्ट संचार की कमी किसान समुदायों के बीच चिंता का मुख्य कारण है।
क्यों मायने रखता है
जयपुर नॉर्थ रिंग रोड परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण और मुआवजे में देरी किसानों की आजीविका और कृषि उत्पादन को सीधे प्रभावित कर रही है, जिससे उन्हें बड़ा आर्थिक नुकसान और उनके बीच असंतोष पैदा हो सकता है।
मुख्य तथ्य
- •Project Cost (Estimated): ₹3,000 crore
- •Project Length (Proposed): 100 km
- •Land to be Acquired: 662 hectares
- •Villages Affected (Estimated): 150+
- •Compensation Demanded: 6x market value
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